वापस नहीं जाते पाकिस्तान से उड़कर भारत आने वाले कबूतर

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भारतीय सीमा के पास के कबूतरबाज अपने कीमती और दुर्लभ प्रजातियों के कबूतरों की बेवफाई से काफी परेशान हैं. उनके इन कबूतरों में से कई तेज हवा के साथ उड़ते हुए भारत चले जाते हैं और फिर या तो उन्हें भारत पसंद आ जाता है या फिर वे रास्ता भूल जाते हैं और लौटकर पाकिस्तान नहीं आते. इससे इन पाकिस्तानी कबूतरबाजों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इंसानों की बनाई सरहद को यह परिंदे नहीं मानते और नतीजा यह होता है कि कुछ मामलों में लाख रुपये तक की कीमत के कबूतर को उसे पालने वाला खो बैठता है.

वापस नहीं जाते पाकिस्तान से उड़कर भारत आने वाले कबूतर

नई दिल्लीः करीना कपूर और अभिषेक बच्चन ने रिफ्यूजी फिल्म से बॉलिवुड में कदम रखा था. फिल्म तो नहीं चली लेकिन इसका एक गीत आज काफी सच साबित हो रहा है. गीत है पंछी, नदियां पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके. यह गीत पाकिस्तान के कबूतरों पर बेहद सटीक बैठता है. एक रिपोर्ट के हवाले से खबर आई है कि पाकिस्तान के कबूतरबाज अपने कबूतरों के भारत प्रेम से बहुत परेशान हैं. सरहद के पास रहने वाले कबूतर उड़ के जब इस पार आ जाते हैं तो वह लौटना पसंद नहीं करते हैं. इससे उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ता है. हालांकि पाकिस्तान के हालात किसी से छिपे नहीं हैं, लेकिन कबूतर यानी कि एक पक्षी प्रजाति ऐसा क्यों कर रही है यह समझ से परे है. 

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भारतीय सीमा के पास के कबूतरबाज अपने कीमती और दुर्लभ प्रजातियों के कबूतरों की बेवफाई से काफी परेशान हैं. उनके इन कबूतरों में से कई तेज हवा के साथ उड़ते हुए भारत चले जाते हैं और फिर या तो उन्हें भारत पसंद आ जाता है या फिर वे रास्ता भूल जाते हैं और लौटकर पाकिस्तान नहीं आते. इससे इन पाकिस्तानी कबूतरबाजों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इंसानों की बनाई सरहद को यह परिंदे नहीं मानते और नतीजा यह होता है कि कुछ मामलों में लाख रुपये तक की कीमत के कबूतर को उसे पालने वाला खो बैठता है.

एक न्यूज रिपोर्ट में सामने आए तथ्य
पाकिस्तान के न्यूज पेपर की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि भारतीय सीमा के पास के इलाकों वाघा, भानुचक, नरोड, लवानवाला और कई अन्य जगहों में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें कबूतर पालने का और कबूतरबाजी का शौक है. अपने इस शौक को पूरा करने के लिए यह लोग बहुत कीमती कबूतर भी पालते हैं. इनमें ऐसे कबूतर भी होते हैं जिनकी कीमत एक लाख रुपये या इससे भी अधिक होती है. कई बार ऐसा होता है कि यह अपनी छतों से अपने जिन कबूतरों को उड़ाते हैं, वे सरहद पार कर भारत चले जाते हैं.

कुछ तो वापस लौटकर अपनी छत पर आ जाते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं जो नहीं लौटते हैं. एक कबूतरबाज ने कहा, मेरे पास सैकड़ों कबूतर हैं जिनमें से कई की कीमत एक-एक लाख रुपये तक है. मैं इन्हें अपने बच्चों की तरह पालता हूं. उस वक्त बहुत दुख होता है जब मेरे कबूतर थोड़ी ही दूरी पर मेरे सामने ही सीमा पार कर जाते हैं और फिर नहीं लौटते. कई दफा हवा बहुत तेज होती है जिससे कबूतर भारतीय सीमा में दूर तक चले जाते हैं. पाकिस्तानी कबूतरबाजों ने यह भी बताया कि कई बार भारत के कबूतर भी उनकी छतों पर आकर बैठ जाते हैं. कबूतरों को पालने के एक और शौकीन ने कहा कि आम कबूतर चला जाए तो दुख नहीं होता लेकिन बहुत महंगे कबूतर जब नहीं लौटते, तब दुख होता है. 

कई बार तनाव की वजह भी बनते हैं कबूतर
इन महंगे कबूतरों के परों में मुहर लगाई जाती है, इनके पैरों में खास निशान वाले छल्ले पहनाए जाते हैं ताकि पहचान हो सके. लेकिन, जब यह दूसरे मुल्क चले जाते हैं तो कम ही वापस लौटते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान से जाने वाले इन कबूतरों को कई बार भारत में जासूस समझ लिया जाता है. पाकिस्तानी कबूतरबाज पहचान के लिए अपने कबूतरों के परों में उर्दू में लिखी मुहरें लगाते हैं. इसे ही भारत में कोई खुफिया संदेश समझ लिया जाता है.

खैर, पाकिस्तान का फन ऐसे ही भारत आता है
पाक के हालातों का नतीजा यह है कि वहां कोई फन नहीं टिकना चाहता है. काफी पाकिस्तानी फनकारों ने भारत में अपनी पहचान बनाई है और यहीं से उनकी कला को सम्मान भी मिलता है. इस लिस्ट में अली जफर, आतिफ असलम, फवाद खान राहत फतेह अली खान जैसे बड़े नाम हैं. अभिनेत्री माहिरा खान तो रईस फिल्म के बाद पाकिस्तान में काफी फेमस हो गई हैं. इससे पहले अदनान सामने के करियर को भी भारत ने ही लिफ्ट दी है. उन्होंने भारत की नागरिकता भी ली है. ऐसे में शांति प्रिय कबूतर कहां पाकिस्तान में टिकने वाले हैं.

सेना पर साइबर हमला, पाक-चीन पर शक