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पाकिस्‍तान के हाथ लगने वाला है तेल और गैस का बड़ा खजाना? हो जाएगा मालामाल!

इमरान खान ने कहा कि 'बस दुआ करें कि हमारी उम्मीदें और आंकाक्षाएं एक्सॉनमोबिल-आधारित कंसोर्टियम द्वारा की जा रही ऑफशोर ड्रिलिंग के लिए सही साबित हों'.

पाकिस्‍तान के हाथ लगने वाला है तेल और गैस का बड़ा खजाना? हो जाएगा मालामाल!
(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली/इस्‍लामाबाद : क्‍या पाकिस्‍तान के हाथ तेल और गैस के विशाल भंडार का खजाना लगने वाला है? इस बात की चर्चा गुरुवार से तेजी से होने लगी है, क्‍योंकि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान तेल और गैस के विशाल भंडार की खोज के रूप में एक प्रकार का खजाना पाने के कगार पर है.

इमरान खान ने कहा कि 'बस दुआ करें कि हमारी उम्मीदें और आंकाक्षाएं एक्सॉनमोबिल-आधारित कंसोर्टियम द्वारा की जा रही ऑफशोर ड्रिलिंग के लिए सही साबित हों'.

उन्‍होंने कहा कि “पहले से ही लगभग तीन सप्ताह की देरी हो गई है, लेकिन अगर कंपनियों से हमें जो संकेत मिल रहे हैं, वे कुछ भी हो सकते हैं, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि हम अपने पानी में एक बहुत बड़े रिजर्व की खोज कर सकते हैं. और अगर ऐसा होता है, तो पाकिस्तान पूरी तरह से एक अलग लीग में होगा.”

अखबार के संपादकों और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों के एक समूह के साथ अनौपचारिक बातचीत में इमरान खान ने यह खुलासा तो किया, लेकनि उन्‍होंने अपतटीय ड्रिलिंग प्रक्रिया का विवरण साझा नहीं किया. साथ ही एक्सॉनमोबिल और अंतरराष्ट्रीय तेल अन्वेषण कंपनी ईएनआई से कोई आधिकारिक बयान भी इस बारे में जारी नहीं किया गया है, जो जनवरी से तेल के लिए एक अल्ट्रा-डीप वेल (समुद्र के अंदर 230 किमी) की ड्रिलिंग में शामिल हैं. इसे केकरा-1 क्षेत्र के रूप में जाना जाता है.

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पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)

एक्सॉनमोबिल पिछले साल सर्वेक्षणों के बाद लगभग एक दशक के बाद पाकिस्तान लौट आया था, जिसमें पाकिस्तानी जल के भीतर बड़े तेल भंडार की संभावना का सुझाव दिया गया था.

प्रधानमंत्री इमरान खान को उम्‍मीद है कि अगर तेल के बड़ा भंडार मिल जाता है तो पाकिस्‍तान की ज्‍यादातर आर्थिक समस्‍याओं को सुलझाया जा सकेगा और देश की काफी प्रगति भी होगी. उन्‍होंने साथ ही कहा कि आर्थिक स्थिरता उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रही है.

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तो विदेशी भंडार बहुत कम था और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) बेहद कठिन परिस्थितियां डाल रहा था.