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ZEE जानकारी: हर तरफ से आ रही है पाकिस्तान के लिए बुरी खबर

FATF यानी Financial Action Task Force ने पाकिस्तान को Enhanced Expedited Follow Up List में डाल दिया है. इस लिस्ट को आप Black List भी कह सकते हैं.

ZEE जानकारी: हर तरफ से आ रही है पाकिस्तान के लिए बुरी खबर

भारत के बाद पाकिस्तान की बात करते हैं. और आपको ये बताते हैं, कि Weekend शुरु होने से ठीक एक दिन पहले, हमारे पड़ोसी के लिए कौन सी बुरी ख़बर आई है ?

FATF यानी Financial Action Task Force ने पाकिस्तान को Enhanced Expedited Follow Up List में डाल दिया है. इस लिस्ट को आप Black List भी कह सकते हैं.

FATF एक ऐसा संगठन है, जो दुनिया में आतंक की Funding पर नज़र रखता है और उसे रोकने की कोशिश करता है. ये संस्था ऐसे देशों की लिस्ट तैयार करती है जो Money Laundering और Terror Funding पर लगाम लगाने में नाकाम रहते हैं.

FATF के Asia-Pacific Group ने पाया है कि पाकिस्तान, 40 में से 32 मानकों का पालन नहीं कर रहा था . इसलिए ये कार्रवाई की गई है.

पाकिस्तान जून 2018 से ही FATF के Scanner पर था. और उसने पाकिस्तान को Grey List में डाल रखा था.

पिछले वर्ष पाकिस्तान ने वादा किया था, कि वो FATF के हर मानक पर खरा उतरने की कोशिश करेगा.

इसके लिए पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों और आतंकी संगठनों पर कार्रवाई भी की गई. लेकिन ये सिर्फ और सिर्फ एक दिखावा था. 

पुलवामा हमले के बाद भारत की कोशिश ये थी, कि FATF, पाकिस्तान को 'Black List' में डाल दे. 

एक पहलू ये भी है, कि FATF ने पाकिस्तान को अभी अनौपचारिक रुप से Black List में डाला है. यानी ये अंतिम फैसला नहीं है. पेरिस में 13 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के बीच इस संस्था की अगली बैठक होगी. इसमें औपचारिक रुप से पाकिस्तान को Black List में डालने का फैसला लिया जा सकता है.

अब सवाल है, कि आगे क्या होगा ?

अगर FATF पाकिस्तान को Blacklist में डालने का फैसला करता है. तो इस फैसले को रोकने के लिए संस्था के 37 सदस्यों में से कम से कम तीन के Votes की ज़रुरत पड़ेगी. इन 37 सदस्यों में चीन, मलेशिया और Turkey जैसे देश भी शामिल हैं. यानी इस बात की संभावना है, कि पाकिस्तान एक बार फिर चीन की मदद ले. और कूटनीतिक तरीके से अन्य देशों को मनाने की कोशिश करे.

जून 2019 में जब पाकिस्तान को Black List करने का फैसला लिया जाना था. उस वक्त भी इन्हीं तीन देशों ने पाकिस्तान का साथ देकर, उसे Black List में जाने से बचा लिया था. लेकिन इस बार पाकिस्तान की कोशिशों पर पानी फिर सकता है. जो देश FATF के मानकों पर खरे नहीं उतरते, ऐसे देशों के लिए दो List तैयार की जाती है. पहली लिस्ट Grey और दूसरी Black होती है. Grey लिस्ट में शामिल होने वाले देशों को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलने में मुश्किल होती है. जबकि, Black List में आने वाले देशों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है. IMF, World Bank, Asian Development Bank और European Union जैसे अंतर्राष्ट्रीय कर्ज़दाता इस List में आने के बाद संबंधित देश को Downgrade कर सकते हैं.

इस बीच आज ब्रिटेन, फ्रांस और Maldives से भी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को झटका लगा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, कि दोनों देशों को कश्मीर का मुद्दा द्दिपक्षीय तरीके से सुलझाना होगा. कश्मीर के मुद्दे पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता का कोई प्रश्न ही नहीं उठता. साथ ही उन्होंने ये भी कहा, कि किसी भी प्रकार की कोई आतंकी गतिविधि नहीं होनी चाहिए.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आज Maldives के विदेश मंत्री को फोन किया. और कश्मीर के मुद्दे पर Maldives का समर्थन मांगा. लेकिन Maldives ने स्पष्ट कर दिया है, कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का फैसला, भारत का आंतरिक मामला है.

इस बीच ब्रिटेन ने भी उन अफवाहों पर विराम लगा दिया है, जिसमें कहा जा रहा था, कि सुरक्षा परिषद की Closed Door मीटिंग में उसने चीन और पाकिस्तान का साथ दिया था. ब्रिटेन के मुताबिक, उसने ना तो ये बैठक बुलाई थी. और ना ही किसी सार्वजनिक बयान का समर्थन किया था. ब्रिटेन का भी मानना है, कि कश्मीर विवाद दोनों देशों का द्विपक्षीय मामला है. और वो इसमें मध्यस्थता नहीं करना चाहता.

पाकिस्तान को हर जगह से निराशा हाथ लग रही है. और इसीलिए इमरान ख़ान पूरी तरह हताश हो गए हैं. 

एक अमेरिकी अखबार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा है, कि अब भारत से बात करने का कोई फायदा नहीं है. 
इस बीच इमरान ख़ान अपनी हताशा Social Media के ज़रिए भी निकाल रहे हैं. ऐसी रिपोर्ट है, कि लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकवादी श्रीलंका के रास्ते तमिलनाडु में घुस गए हैं. और भारत पर बड़ा हमला करने की फिराक में हैं. लेकिन इमरान ख़ान ने बड़ी चालाकी से इसे एक दूसरा मोड़ दे दिया.

इमरान ख़ान ने आज एक Tweet किया. जिसमें उन्होंने Media Reports का ज़िक्र करते हुए कहा, कि अफगानिस्तान के कुछ आतंकवादी दक्षिण भारत और जम्मू-कश्मीर में प्रवेश कर गए हैं. इमरान ख़ान ने इसे ध्यान भटकाने वाला दावा बताया. और कहा, कि ऐसी अफवाहें फैलाकर भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में हो रहे मानव अधिकारों के उल्लंघन को छिपा रही है. 

उन्होंने धर्म और आस्था के नाम पर हिंसा के शिकार हुए लोगों को याद करते हुए कल भी एक Tweet किया था. और उसमें भी कश्मीरियों के मानव अधिकारों के उल्लंघन की बात कही थी. और दावा किया था, कि कश्मीर के लोगों पर अत्याचार होते हैं. उन्हें उनके मौलिक अधिकार नहीं दिए जाते. और अपने धर्म का पालन करने की इजाज़त नहीं दी जाती. 

इमरान ख़ान के इन दावों में ज़रा भी सच्चाई नहीं है. शायद इसीलिए, संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती. संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक लंबी बहस हुई है. जिसमें दुनिया के प्रमुख देशों ने हिस्सा लिया. धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे भेदभाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र में ना सिर्फ अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने पाकिस्तान को Expose कर दिया. बल्कि पाकिस्तान को Expose करने वालों में खुद एक पाकिस्तानी NGO के प्रमुख भी थे.

कश्मीर के नाम पर पाकिस्तान सिर्फ एजेंडा नहीं चला रहा. बल्कि झूठ भी फैला रहा है. हालांकि, श्रीलंका के राष्ट्रपति के कार्यालय ने पाकिस्तान का झूठ पकड़ लिया.

श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने वहां के राष्ट्रपति से मुलाकात करके कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की थी. और अनुच्छेद 370 पर भारत के फैसले पर जानकारी दी. लेकिन इस मुलाकात के बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कश्मीर को विवादित मुद्दा बताया. एक प्रेस रिलीज़ जारी करके पाकिस्तान ने दावा किया था, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि UN के प्रस्तावों के अनुसार और कश्मीरियों की इच्छाओं के तहत कश्मीर मुद्दे का हल होना चाहिए. 

लेकिन 24 घंटों के भीतर श्रीलंका ने पाकिस्तान के झूठ को Expose कर दिया. वहां के राष्ट्रपति कार्यालय ने सफाई दी कि बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने दोनों देशों को श्रीलंका का अच्छा मित्र बताया. पाकिस्तान के उच्चायुक्त की बातें ध्यान से सुनीं. लेकिन, राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों पर इसके अलावा कोई और टिप्पणी नहीं की.

पाकिस्तान को एक और झटका उस वक्त लगा, जब संयुक्त राष्ट्र, भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के समर्थन में आ गया. पाकिस्तान ने मांग की थी, कि प्रियंका चोपड़ा से UNICEF की Goodwill Ambassador For Peace वाला दर्जा छीन लिया जाए. 

पाकिस्तान की मानव अधिकार मंत्री Shireen Mazari ने आरोप लगाया था, कि प्रियंका चोपड़ा भारत सरकार का एजेंडा चलाती हैं. और परमाणु युद्ध की वकालत करती हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने Shireen Mazari की दलील को खारिज कर दिया है. और कहा है, कि प्रियंका चोपड़ा, अपनी Personal Capacity में यानी निजी रुप से टिप्पणी देने के लिए स्वतंत्र हैं. 

20 अगस्त 2019 को Shireen Mazari ने, बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNICEF को एक चिट्ठी लिखी थी. 

Shireen Mazari ने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया था, कि प्रियंका चोपड़ा सार्वजनिक रुप से जम्मू-कश्मीर में हुए बदलाव का समर्थन करती हैं. और भारत के रक्षा मंत्री द्वारा परमाणु हमले की चेतावनी का साथ देती हैं. 

प्रियंका चोपड़ा UNICEF की Goodwill Ambassador For Peace हैं. और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर शांति की बात करती हैं. लेकिन पाकिस्तान की सरकार चाहती थी, कि उनसे Goodwill Ambassador वाला दर्जा छीन लिया जाए. 
पाकिस्तान का कहना था, कि अगर प्रियंका चोपड़ा शांति की दूत बनी रहीं, तो ये संयुक्त राष्ट्र का उपहास होगा. 

यहां पर एक सवाल ये भी है, कि क्या वाकई में प्रियंका चोपड़ा ने ऐसी किसी बात का समर्थन किया है या किया था ? 

26 फरवरी 2019 को प्रियंका चोपड़ा ने भारत के सुरक्षाबलों की याद में 'जय हिन्द' लिखकर एक Tweet किया था. ये वही दिन था, जब भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में Air Strikes की थी. उस दिन लाखों भारतीयों ने इसी भाव के साथ Tweet किए होंगे.लेकिन, पाकिस्तान ने अपना एजेंडा चलाने के लिए प्रियंका चोपड़ा के Tweet का इस्तेमाल कर लिया. 

वैसे Shireen Mazari की चिट्ठी में कुछ तथ्यात्मक गलतियां भी हैं. जिसमें हम थोड़ा सुधार करना चाहते हैं.

Shireen Mazari ने लिखा, कि प्रियंका चोपड़ा ने पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध का समर्थन किया, ये बात ग़लत है.
उन्होंने ये भी लिखा, कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाया जाना अंतर्राष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है, ये भी ग़लत है.
जम्मू-कश्मीर में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की बात की गई, ये भी ग़लत है.
भारत सरकार द्वारा असम में मुस्लिमों को नागरिकता ना देने का ज़िक्र किया गया, ये भी पूरी तरह ग़लत है. 

यानी भारत के खिलाफ अफवाह फैलाकर और एक अभिनेत्री को निशाना बनाकर, पाकिस्तान वही कर रहा है, जो आज तक करता आया है. और वो है Propaganda करना. 

अगर प्रियंका चोपड़ा अपने Twitter Handle से 'जय हिन्द' लिखकर Tweet करती हैं, तो इसका ये मतलब नहीं है, कि वो परमाणु युद्ध का समर्थन करती हैं. वैसे पिछले कुछ समय से ऐसा देखने को मिला है, जब पाकिस्तान के Trolls ने प्रियंका चोपड़ा को Target किया है. कुछ दिनों पहले एक ऐसा ही वाकया अमेरिका में हुआ था. जब आयशा मलिक नाम की पाकिस्तानी मूल की अमेरिकी नागरिक ने प्रियंका चोपड़ा को पाखण्डी बताया था. हालांकि, तब प्रियंका ने क्या कहा था, ये आज आपको भी सुनना चाहिए.

पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए किसी की आस्था के साथ भी खिलवाड़ कर सकता है. आज ही पाकिस्तान के पूर्व सेना अध्यक्ष मिर्ज़ा असलम बेग ने कहा है जिहाद ही भारत को सबक सिखाने का एक मात्र तरीका है . असलम बेग ने ये भी कहा कि पाकिस्तान करतारपुर कॉरिडोर का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए करेगा .

आज आपको ये भी देखना चाहिए, कि जब इमरान ख़ान की कैबिनेट का कोई मंत्री किसी विदेशी दौरे पर जाता है. तो क्या होता है. पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद कुछ दिनों पहले London में थे. ये व्यक्ति अपनी अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए बदनाम है. और इसी का नतीजा था, कि Pakistan Peoples Party के दो समर्थकों ने मंत्री जी के ऊपर अंडे फेंक दिए . और बाद में उन्होंने अपनी सफाई देते हुए, अंडे फेंकने की वजह भी बताई. 

ये वही London है, जहां 15 अगस्त को पाकिस्तान समर्थित हिंसक भीड़ और खालिस्तान के प्रदर्शनकारियों ने भारतीय उच्चायोग के बाहर उपद्रव मचाया था. और अब पाकिस्तान के लोग अपने ही देश के मंत्री के ऊपर अंडे फेंक रहे हैं .