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...और 1 करोड़ का सवाल बन गया दारा शिकोह

दारा शिकोह को देश की 95 फीसदी से ज्यादा आबादी जानती भी नहीं होगी क्योंकि वो हारा हुआ था या यूं कहें कि उसे हराया गया था और जीतने वाले ने इतिहास में उसे ज्यादा जगह नहीं लेने दी. आज अचानक ये नाम सुर्खियां बटोरने लगा तो भी उसका कारण यही है कि आज के विजेता उसे सुर्खियों में लाना चाहते हैं.

...और 1 करोड़ का सवाल बन गया दारा शिकोह

आने वाला पल जाने वाला है... बीता हुआ कल भी कभी आज था और आज भी आने वाले कल में इतिहास हो जाएगा... यही नियति भी है. लेकिन आने वाले कल की पीढ़ी आज का जो इतिहास पढ़ेगी वो आज के विजेता की कलम से ही लिखा जाएगा. यानी जो आज शक्तिशाली है वो आने वाले कल के इतिहास में हीरो होगा.  

मेरी इस बात से आप कन्फ्यूज़ हो गए शायद... चलिए सीधे शब्दों में बात करें तो इतिहास के किसी भी पन्ने को खोलिए. एक ही बात पता लगेगी कि उस पन्ने पर जो दर्ज़ है वो जीतने वाले की इच्छा के मुताबिक ही है. कल जो इतिहास था ये उसका भी सच है और आज को इतिहास में कैसे दर्ज़ किया जाएगा ये भी आज के विजेता की ही मर्ज़ी से होगा.  

करीब 400 सालों बाद अचानक एक नाम फिर से सुर्खियों में आया है और ये नाम है दारा शिकोह... और सुर्खियों में भी क्या आया कि 'कौन बनेगा करोड़पति' में एक करोड़ का सवाल ही दारा शिकोह पर किया गया. इतना ही नहीं करण जौहर जैसे बड़े निर्माता दारा शिकोह पर फिल्म बना रहे हैं और उसमें रणवीर सिंह दारा शिकोह का रोल कर सकते हैं. जब बड़े-बड़े खलनायकों पर बनी फिल्मों में भी उनके कैरेक्टर को हीरो के तौर पर दिखाया जाता रहा है तो जाहिर है इतिहास के इस गुमनाम कैरेक्टर को भी इस फिल्म में हीरो की तरह ही दिखाया जाएगा.

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दारा शिकोह को देश की 95 फीसदी से ज्यादा आबादी जानती भी नहीं होगी क्योंकि वो हारा हुआ था या यूं कहें कि उसे हराया गया था और जीतने वाले ने इतिहास में उसे ज्यादा जगह नहीं लेने दी. आज अचानक ये नाम सुर्खियां बटोरने लगा तो भी उसका कारण यही है कि आज के विजेता उसे सुर्खियों में लाना चाहते हैं.

मुगल शासक शाहजहां का नाम आते ही ज्यादातर लोगों को ताजमहल याद आ जाता है. शाहजहां के दादा मुगल सम्राट अकबर थे और शाहजहां का बेटा भी मुगल शासक औरंगज़ेब था. अब इसी शाहजहां और मुमताज़ महल का बड़ा बेटा और औरंगज़ेब का बड़ा भाई था दारा शिकोह. जी हां, जिस अकबर के परिवार के ज्यादातर सदस्यों के बारे में इतिहास भरा हुआ है, उस परिवार का ये शख्स दारा शिकोह इतिहास में महज़ हाज़िरी लगाने जैसा ही दर्ज़ है.

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औरंगज़ेब क्रूर था, आततायी था और हिंदुओं का विरोधी था, ये बात इतिहास को समझने वाले सब लोग जानते हैं, लेकिन लोगों को नहीं मालूम कि उस औरंगज़ेब के नाम पर दिल्ली में सड़कें भी हैं और लोग अपने बच्चों का नाम भी रखते हैं.  क्योंकि वो विजेता था और उस वर्तमान की इबारत उसी औरंगज़ेब की कलम से लिखी गई थी. दारा शिकोह शाहजहां का उत्तराधिकारी था, बहादुर था और भला था, लेकिन वो हार गया था और हारने वाले को इतिहास भुला देता है. अपने ही बड़े भाई दारा शिकोह और उसके बेटे की हत्या करवाने वाला, अपने पिता शाहजहां को मरते दम तक जेल में रखने वाला औरंगज़ेब सिर्फ विजेता होने के कारण ही 400 साल बाद तक भी सुर्खियां बटोरे रहा.  

वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता. ये हमेशा बदलता रहा है और एक बार फिर बदला है. जो लगातार सत्ता में रहे वो सत्ता से बाहर हो गए. बरसों से हारते आ रहे लोग अब विजेता बनकर निकले हैं और विजेता भी ऐसे वैसे नहीं अश्वमेध विजेता की तरह प्रचंड जीत वाले. तो ये तय है कि उनका जो मत है वो भावी पीढ़ी को इतिहास के पन्नों पर दिखेगा और दिखना भी चाहिए. अब देखिए विजेता बदले तो क्या-क्या बदल गया... अंग्रेजों ने जब राज किया तो हर चीज़ पर उनका नाम था यहां तक कि दिल्ली की सड़कों और बिल्डिंगों पर भी. उन्हीं अग्रेज़ों के नाम की एक सड़क 'डलहौज़ी रोड' का नाम बदलकर दो साल पहले दारा शिकोह हो गया. कई संगठनों की तरफ से दारा शिकोह के व्यक्तित्व को बताने के लिए सेमिनार भी होने लगे हैं. आने वाले दिनों में दारा शिकोह का नाम वक्त-वक्त पर देश में सुर्खियां बटोरता रहेगा...

'दो समंदरों का संगम'
20 मार्च 1615 को पैदा हुए दारा शिकोह ने सर्वधर्म सद्भाव रखा... कुरान की आयतों को पढ़ते थे तो गीता के श्लोक भी उनको कंठस्थ थे... वेद उपनिषदों के ज्ञाता थे. दारा शिकोह ने दो किताबें लिखी थीं जिनमें से एक थी 'मज्म उल बहरैन'. इसका शाब्दिक अर्थ है दो समंदरों का संगम. ये किताब फारसी में लिखी गई थी जिसका बाद में हिंदी संस्करण भी आया. इसमें हिंदू धर्म ग्रंथों और कुरान में समानताएं बताई गई थी. मुगल सल्तनत के उत्तराधिकारी के तौर पर शाहजहां की पसंद दारा शिकोह ही थे, लेकिन उस तख्त पर बैठा दारा शिकोह का छोटा भाई औरगंजेब. और तख्त पर बैठा ही नहीं बल्कि सबसे लंबे अर्से तक राज भी किया.

बेशक इस तख्त को हासिल करने के लिए उसने शाहजहां से बगावत की, उन्हें जेल में डाला, दारा शिकोह के एक बेटे को मरवा दिया और दूसरे को जेल में डाल दिया. दारा शिकोह को गिरफ्तार कर दिल्ली में हाथी से बांधकर घुमाया. इटली के इतिहासकार निकोलो मनूची (Niccolo Manucci) के मुताबिक दारा शिकोह की मौत की पुष्टि करने के लिए औरंगज़ेब ने उसका सिर अपने सामने पेश करवाया और उस कटे हुए सिर पर भी तलवार से वार किए. साथ ही उसने वो सिर अपने पिता शाहजहां के पास जेल में भेज दिया.

(लेखक ज़ी न्यूज़ के डिजिटल एडिटर हैं)