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'इतनी फ्रीडम मिल तो गई है मना लो' Women's Day, उत्सव नहीं आंदोलन है महिला दिवस...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मतलब क्या है? ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं कि इसे क्यों मनाया जाता है.

'इतनी फ्रीडम मिल तो गई है मना लो' Women's Day, उत्सव नहीं आंदोलन है महिला दिवस...
हमें बारबारी का दर्जा चाहिए आपकी सहानुभूति नहीं.

बहुत छोटी थी तब से पता नहीं क्यों हर उस बात पर बिदक जाती थी जो महिलाओं को कमजोर आंकती थी. मैंने अपने घर में मम्मी और दादी को एक मजबूत महिला के रोल में देखा था. मेरी मां अपने गांव की उन दो लड़कियों में से एक थी जो स्कूल जाती थीं, और भी तब लड़कियों को घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी. वहीं मेरी दादी मुझे हमेशा बताती हैं कि कैसे उनकी मम्मी ने उन्हें स्कूल न जाने पर पीट दिया था. आपको लग रहा होगा कि मैं इस ब्लॉग में अपनी दादी और मां के बारे में क्यों बातें कर रही हूं. तो मैं आपको बता दूं महिलाओं को हमेशा से इतनी आसानी से अपने अधिकार कभी नहीं मिले. उन्हें हर बार लड़ाई करनी पड़ी और उसकी जीत के जिक्र को हमेशा दबा दिया गया. आज इंटरनेशनल महिला दिवस के दिन जानिए कि ऐसा क्या हुआ था जो हम इस दिन को सेलिब्रेट करने लगे. ये दिन सिर्फ फैशन ट्रेंड बनकर न रह जाए इसलिए जानिए कि क्या आप महिला दिवस के सही मयाने जानते हैं. अपने कुछ जानकारों से जब इस विषय पर बात की तो मिले जवाब हैरान करने वाले थे. 

मेरे ऑफिस में काम करने वाले मेरे एक सहयोगी से जब मैंने पूछा कि क्या आपको लगता है कि इस दिन को सेलिब्रेट करने की जरूरत है तो उनका जवाब था कि आपको हमें इतनी फ्रीडम दे तो रखी है कि आप कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन ये दिन आपके लिए ना है तो आप इसे सेलिब्रेट करें बिलकुल करें. जवाब हैरानी वाला इसलिए था क्योंकि उन्हें इसके दिन के पीछे की कहानी का जरा सा भी अंदाजा नहीं था. वहीं मेरे इस सवाल पर सवाल खड़ा करते हुए मेरे मित्र ने कहा कि इसे बिलकुल मनाना चाहिए क्योंकि ये आपके होने का एहसास कराता है और आपको को मजबूत बनाने में सहायता करता है. मैं जब उन्हें कहा कि वुमनहुड तो अपने आप में सेलिब्रेशन है, इसके लिए सिर्फ एक दिन काफी होगा क्या तो उनका कहना था कि कहीं से शुरुआत तो करनी होगी. ये शुरुआत कहां से हुई इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था. 

इस सवाल-जवाब की बाजी थोड़ी आगे बढ़ी तो मैं अपने एक सीनियर से पूछा कि वो इस दिन को किस तरह बयां करना चाहेंगे. उनका जवाब काफी हद तक मुझे संतुष्ट करने में सफल रहा. उनका कहना था कि वो इस दिन को नॉर्मल दिनों की तरह देखते हैं और न ही वो इस दिन किसी को विश करते हैं न ही सेलिब्रेट करते हैं. संतुष्ट करना इसलिए कह रही हूं क्योंकि उन्होंने मुझे कोई बेवजह का ज्ञान दिए बिना अपना जवाब दिया. 

चलिए ये तो हुए सवाल जवाब अब मैं आपको बता दूं कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मतलब क्या है क्योंकि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं कि इसे क्यों मनाया जाता है. इस अच्छे खास ऐतिहासिक दिन को लोगों ने ट्रेंड बनाकर मार्केट में बेचने का काम कर लिया है. फूल-केक, गिफ्ट्स और न जाने कितनी ही अन्य चीजों में छुपाकर महिलाओं को भ्रमित करने का काम किया जा रहा है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ खुद को फील गुड कराने का फैक्टर मात्र नहीं है. ये एक लड़ाई है जो 111 साल पहले एक मजदूर आंदोलन के रूप में शुरू हुई थी. न्यूयॉर्क शहर  साल1908 में 15 हजार औरतों ने में एक मार्च निकाला था जिसमें मांग की गई थी कि उनके काम करने के घंटों को कम किया जाए. इसके अलावा उन महिला कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें अच्छी सैलरी दी और वोट डालने का हक दिया जाए.  

इस आंदोलन के एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया. इसके बाद साल 1910 में क्लारा जेटकिन ने कोपेनहेगन में कामकाजी औरतों की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद 17 देशों की 100 औरतें ने इस सुझाव का समर्थन किया. साल 1011 में सबसे पहले साल ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था. 

अब बड़ा सवाल ये है कि इसे 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है. कई आर्टिकल पढ़ने के बाद पता लगा कि क्लारा जेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई डेट तय नहीं की थी. 1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने 'ब्रेड एंड पीस' (यानी खाना और शांति) की मांग की. महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और आखिरकार सरकार ने महिलाओं को वोट का अधिकार दे दिया. उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था और जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी वो तारीख 23 फरवरी थी. ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा. कई देशों में इस दिन नेशनल हॉली डे रहता है तो कई जगह जैसे चीन में इस दिन महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है. वहीं अमेरिका में मार्च का पूरा महीना 'विमेन्स हिस्ट्री मंथ' के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. 

111 साल पहले शुरू हुआ आंदोलन आज भी जारी है. जेंडर एक्वालिटी से लेकर पढ़ने-लिखने और यहां तक की अपनी मर्जी का पार्टनर चुनने तक के अधिकारों की लड़ाई हम आज भी लड़ रहे हैं. इसलिए मेरा निवेदन है इस दिन की अहमियत को जानिए... खासकर की महिलाओं से मैं ये कहना चाहूंगी कि सिर्फ फूलों की खूश्बू, संदेशों के शब्दों तक इस दिन को सीमित मत रहने दीजिए. हर उस औरत को इस लड़ाई में शामिल कर लीजिए जो अपने अधिकारों से वंचित, थाम लीजिए उस लड़की का हाथ जिसे दहेज की आग में झोंका जा रहा हो, शिक्षा को हथियार बनाकर इससे अपने हर हक को हासिल करिए क्योंकि महिला दिवस सेलिब्रेट करने का नहीं आंदोलन का दिन है. पुरुषों से एक ही निवेदन है इतिहास हमने भी बनाया है तो उसे पढ़े और अपडेट रहें. हमें बारबारी का दर्जा चाहिए आपकी सहानुभूति नहीं.

(लेखिका ज़ी न्यूज़ में कार्यरत हैं)

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)