INDvsNZ: मैच हारने के बाद विलियमसन को इस बात का अफसोस, DRS लेते तो हो सकता था दूसरा रिजल्‍ट

टीम इंडि‍या के ख‍िलाफ वनडे सीरीज का 5वां और अंतिम मैच गंवाने के बाद कहा कि अनुभवी रोस टेलर के पगबाधा आउट होने के बाद डीआरएस नहीं लेने का उन्हें अफसोस है.

INDvsNZ: मैच हारने के बाद विलियमसन को इस बात का अफसोस, DRS लेते तो हो सकता था दूसरा रिजल्‍ट

वेलिंगटन: न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने रविवार को भारत के खिलाफ वनडे सीरीज का पांचवां और अंतिम मैच गंवाने के बाद कहा कि अनुभवी रोस टेलर के पगबाधा आउट होने के बाद डीआरएस नहीं लेने का उन्हें अफसोस है. जीत के 253 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की पारी के 11वें ओवर में पंड्या ने फार्म में चल रहे टेलर (एक) को पगबाधा आउट कर दिया, जिससे टीम का स्कोर तीन विकेट पर 38 रन हो गया.

गेंद टेलर के घुटने के ऊपर लगी थी और मैदानी अंपायर के द्वारा आउट दिए जाने के बाद उन्होंने दूसरे छोर पर खड़े विलियमसन से बात करने के बाद पवेलियन का रुख कर लिया. टेलीविजन रिप्ले में हालांकि देखा गया कि गेंद विकेट के ऊपर से निकल रही थी.

विलियमसन ने मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मुझे इसके बारे मे जल्द ही पता चल गया और यह काफी निराशाजनक था. रोस (टेलर) शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे ऐसे में जब आपको अपनी गलती का एहसास होता है तो दिल दुखता है.’

इन दोनों खिलाड़ियों के पास मैदानी अंपायर के फैसले को चुनौती देने के लिए 15 सेकेंड का समय था लेकिन विलियमसन से कोई इशारा नहीं मिलने पर टेलर ने पवेलियन का रुख कर लिया. उन्होंने कहा, ‘हां, वह मेरे पास आये और बोले क्या हमें डीआरएस लेना चाहिए, शायद गेंद थोड़ी ज्यादा ऊंची थी. दुर्भाग्य से हमने डीआरएस नहीं लेने का फैसला किया.’

हरफनमौला जिमी नीशाम भी विकेट के पीछे महेन्द्र सिंह धोनी की चपलता से आउट हुए उनके खिलाफ पगबाधा की अपील हुई और वह क्रीज के बाहर खड़े थे जब तब धोनी ने स्टंप्स बिखेर दी.
विलियमसन ने कहा, ‘हां, वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे. वह ऐसे आउट होना नहीं चाहते थे. यह लापरवाही का नतीजा है. वह अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे और मिशेल सैंटनर के साथ उनकी साझेदारी से हमें जीत की उम्मीद थी.’

विलियमसन ने भारतीय गेंदबाजों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने न्यूजीलैंड पर दबाव बनाये रखा. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है पूरी श्रृंखला के दौरान भारतीय टीम हम से कहीं बेहतर रही और गेंदबाजी इकाई के तौर पर वे शानदर थे. तेज और स्पिन गेंदबाजों की सटीकता ने हम पर दबाव बनाये रखा.’