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विराट कोहली और रवि शास्त्री ने कहा- 1983 और 2011 के विश्व कप से बड़ी है ऑस्ट्रेलिया पर यह जीत

रवि शास्त्री ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि जितने जुनून के साथ विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं, कोई और खेलता होगा.

विराट कोहली और रवि शास्त्री ने कहा- 1983 और 2011 के विश्व कप से बड़ी है ऑस्ट्रेलिया पर यह जीत
विराट कोहली ऐसे पहले भारतीय कप्तान हैं, जिनकी अगुवाई में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती है. (फाइल फोटो)

सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज (India vs Australia) जीतने का भारत का इंतजार सोमवार (7 जनवरी) को पूरा हो गया. सिडनी में खेले गए चौथे टेस्ट के ड्रॉ होने के साथ ही भारत ने चार मैचों की यह सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली. मैच के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री ने इस जीत को विश्व कप की जीत से भी बड़ा बताया. भारत ने 71 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराया है. अब दोनों टीमों के बीच 12 जनवरी से वनडे सीरीज खेली जाएगी. 

भारतीय कोच रवि शास्त्री ने इस जीत की तुलना 1983 की विश्व कप से की. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताऊंगा कि यह मेरे लिए कितनी संतोषजनक है. विश्व कप 1983, क्रिकेट विश्व चैंपियनशिप 1985 की जीत याद कीजिए. यह भी उनकी तरह बड़ी है या आप इसे उनसे भी बड़ी कह सकते हैं क्योंकि यह खेल के सबसे अहम प्रारूप (टेस्ट) में मिली है. यह टेस्ट क्रिकेट है जिसे सबसे कड़ा माना जाता है.’ 

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रवि शास्त्री ने इसके बाद भी कप्तान कोहली की तारीफ में जमकर कसीदे गढ़े. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि जितने जुनून के साथ वह टेस्ट क्रिकेट खेलता है कोई और खेलता होगा.’ शास्त्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में सीरीज में जीत पिछले एक साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है. टीम इंडिया ने इसकी तैयार और प्लानिंग 12 महीने पहले दक्षिण अफ्रीका में ही शुरू कर दी थी. 

विश्व कप 2011 की तुलना में यह जीत अधिक भावनात्मक: कोहली
विराट कोहली 2011 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने के बाद विश्व कप की जीत को भी याद किया. उन्होंने कहा ऑस्ट्रेलिया में पहली टेस्ट सीरीज में जीत उसकी तुलना में ‘अधिक भावनात्मक’ है. कोहली ने कहा, ‘यह मेरी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है. यह सूची में सबसे ऊपर रहेगी.’ 

तब मैं टीम का सबसे कम उम्र का खिलाड़ी था 
विराट कोहली ने कहा, ‘मैं 2011 विश्व कप टीम का हिस्सा था. मैं टीम का सबसे कम उम्र का खिलाड़ी था, लेकिन साथी खिलाड़ियों के मुकाबले कम भावुक था. हम स्वदेश में खेले और आखिर उसे जीतने में सफल रहे. कई सीनियर खिलाड़ियों पर भावनाएं हावी थीं. इसलिए यह उनके लिए था कि हमने क्या हासिल किया है. हां उसका हिस्सा होना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी. लेकिन अगर आप मुझसे पूछोगे कि मेरे लिए कौन सा क्षण भावनात्मक है तो मैं इसका जिक्र करूंगा. यह मेरा यहां का तीसरा दौरा है और मुझे अनुभव है कि यहां जीतना कितना मुश्किल है. इस लिहाज से यह मेरे लिए बेहद भावनात्मक है.’