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रवि शास्त्री ईमानदारी से फीडबैक देते हैं, इससे मुझे काफी मदद मिलती है: विराट कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि वे भारत को टेस्ट क्रिकेट का सुपरपावर बनते देखना चाहते हैं. 

रवि शास्त्री ईमानदारी से फीडबैक देते हैं, इससे मुझे काफी मदद मिलती है: विराट कोहली
विराट कोहली ने एडिलेड में खेले गए दूसरे वनडे मैच में शतक बनाया था. वे जब 2015 में पहली बार कप्तान बने, तब रवि शास्त्री टीम के साथ जुड़ चुके थे. (फाइल फोटो)

एडिलेड: भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा है कि उनकी ख्वाहिश टेस्ट फॉर्मेट में भारत को महाशक्ति (सुपरपावर) बनाने की है. कोहली ने साथ ही कहा कि उनके लिए टेस्ट क्रिकेट प्राथमिकता है और हमेशा रहेगी. अगर भारतीय क्रिकेट में इसे सम्मान मिलता है तो क्रिकेट का यह फॉर्मेट हमेशा शीर्ष पर रहेगा. कोहली ने कोच रवि शास्त्री के बारे में कहा कि वे हमेशा पूरी ईमानदारी से अपनी बात सामने रखते हैं. 

विराट कोहली की कप्तानी में ही भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती है. भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 से मात दी है. तीन वनडे मैचों की सीरीज में दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर हैं. तीसरा और आखिरी वनडे शुक्रवार (18 जनवरी) को खेला जाना है. यह भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आखिरी मैच भी होगा. 

विराट कोहली ने स्टार स्पोटर्स से बात करते हुए कहा, ‘मैं इसे लक्ष्य नहीं, बल्कि विजन कहूंगा. मैं भारत को टेस्ट क्रिकेट में सुपरपावर बनते देखना चाहता हूं और आने वाले दिनों में भारत को टेस्ट में सबसे मजबूत टीम बनते देखना चाहता हूं. मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट का सम्मान करती है. भारतीय खिलाड़ी भी इसे इज्जत देते हैं तो टेस्ट क्रिकेट हमेशा शीर्ष पर रहेगी.’

विराट कोहली ने कहा, ‘शॉर्ट फार्मेट क्रिकेट की लोकप्रियता के लिए जरूरी हैं. लेकिन अगर सिर्फ उन्हीं पर ध्यान दिया जाता है और उनका नाम लेकर टेस्ट क्रिकेट से बचने की कोशिश की जाती है तो आने वाले खिलाड़ियों को दिक्कत हो सकती है. हमें इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा.’

विराट कोहली ने कोच रवि शास्त्री के रिश्ते पर भी बात की. उन्होंने कहा, ‘2014 में जब से शास्त्री आए हैं तब से वह मुझे पूरी ईमानदारी फीडबैक देते हैं. मुझे याद है कि जब इंग्लैंड के खिलाफ मैंने एक ही मैच में शतक और अर्धशतक जमाया था, तब एक दिन वे मेरे पास आए. उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारी बल्लेबाजी के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना, लेकिन कप्तानी के बारे में हमें बात करनी होगी कि कैसे खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बाहर लाया जाए. इससे मुझे काफी फर्क पड़ा क्योंकि मैं जानता हूं कि कई बार आप जितना सोचते हो, कप्तानी में उससे कहीं ज्यादा देना होता है. उनके इस फीडबैक से मुझे कप्तानी में काफी मदद मिली है.’

(इनपुट: आईएएनएस)