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Twitter ने किया बड़ा बदलाव, अब नहीं चल पाएगा फॉलोअर बढ़ाने का ये जुगाड़

अगर आप भी ट्विटर इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर (twitter) ने स्पैम भेजने वालों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है.

Twitter ने किया बड़ा बदलाव, अब नहीं चल पाएगा फॉलोअर बढ़ाने का ये जुगाड़

नई दिल्ली : अगर आप भी ट्विटर इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर (twitter) ने स्पैम भेजने वालों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट के फैसले के बाद कोई भी यूजर अब एक दिन में 400 से ज्यादा नए ट्विटर हैंड्ल्स (Twitter Accout) को फॉलो नहीं कर सकेगा. ट्विटर की तरफ से एक बयान में कहा गया कि कोई भी यूजर एक दिन में 400 से ज्यादा हैंड्ल्स को फॉलो नहीं कर सकता. पहले यह संख्या 1000 थी, जिसे अब 600 घटा दिया गया है. दरअसल, फॉलोअर बढ़ाने के लिए कुछ लोग हर रोज ज्यादा से ज्यादा लोगों को फॉलो करते हैं. साथ ही इसके जरिए लोग अपनी बातों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाते हैं.

1000 से घटाकर 400 किया
ट्विटर की सेफ्टी टीम ने ट्वीट किया है, 'फॉलो, अनफॉलो, फॉलो, अनफॉलो. कौन करता है ऐसा? स्पैमर्स (स्पैम संदेश भेजने वाले).' टीम ने लिखा, इसलिए हम एक दिन में फॉलो किए जाने वाले हैंल्डस की संख्या को 1000 से घटाकर 400 कर रहे हैं. आप चिंता न करें. आपको कोई दिक्कत नहीं होगी. गौरतलब है कि ट्विटर की नीतियां स्पैम भेजने को प्रतिबंधित करती हैं.

भारत में चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए Twitter ने उठाया यह कदम

पारदर्शिता लाने के लिय उठाया कदम
दूसरी तरफ से ट्विटर ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारत के लिये विज्ञापन पारदर्शिता केंद्र भी स्थापित किया है. इस तरह के केंद्र की स्थापना फेसबुक की तरफ से भी की गई है. इसके माध्यम से लोग देश में राजनीतिक विज्ञापनों का ब्योरा देख सकते हैं. यहां विज्ञापन देने वालों का खर्च और उसके प्रभाव के आंकड़े भी प्रदर्शित किए जाते है. कंपनी ने राजनीतिक विज्ञापनों के लिए नियम कड़े कर ट्वीटर पर पारदर्शिता लाने के लिय यह कदम उठाया है.

मार्च से उपलब्ध कराई गई ये सेवा
ट्वीटर की तरफ से पिछले दिनों ब्लॉग में लिखा गया कि इस नीति को भारत समेत अन्य देशों में 11 मार्च से लागू किया जाएगा. इससे केवल प्रमाणित विज्ञापनदाताओं को ही राजनीतिक विज्ञापन करने की अनुमति मिलेगी. नई सर्विस से यह जानकारी जुटाना आसान हो जाएगा कि राजनीतिक विज्ञापन किसने दिया और उस पर कितना खर्च करना पड़ा. इतना ही नहीं यह भी पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र विशेष के लोगों को ध्यान में रखकर विज्ञापन जारी किया गया है.