भारत ने विश्वविद्यालयों की विश्व रैंकिंग में किया कमाल, 25 संस्थानों ने टॉप 200 में बनाई जगह

बता दें साल 2018 की रैंकिंग में यह संख्या सिर्फ सात थी जबकि इस बार भारी बढ़त के साथ यह 25 पर पहुंच गई है

भारत ने विश्वविद्यालयों की विश्व रैंकिंग में किया कमाल, 25 संस्थानों ने टॉप 200 में बनाई जगह
भारतीय विज्ञान संस्थान भारत (14 वें) की रैंकिंग में सबसे पहला स्थान रखता है. (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः मंगलवार को टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2019 की रैंकिंग में 49 संस्थानों ने जगह बनाई है. इन 49 संस्थानों में से 25 ने टॉप 200 में जगह बनाई है. बता दें साल 2018 की रैंकिंग में यह संख्या सिर्फ सात थी जबकि इस बार भारी बढ़त के साथ यह 25 पर पहुंच गई है. द टाइम्स हायर एजुकेशन इमर्जिंग इकोनॉमीज यूनिवर्सिटी की रैंकिंग बताती है कि भारतीय विज्ञान संस्थान भारत (14 वें) की रैंकिंग में सबसे पहला स्थान रखता है, इसके बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (27 वां स्थान) है.

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वहीं वॉल्यूम, आय और प्रतिष्ठा और उद्योग आय में सुधार के कारण इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की 35 वें स्थान पर 35 वें स्थान पर है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंदौर ने इस लिस्ट में 61 वां और जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च ने 64 स्थान पाया है. वहीं सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने अपने अनुसंधान स्कोर में वृद्धि, मेक्सिको के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के साथ अपने अनुसंधान प्रभाव के स्कोर में एक महत्वपूर्ण वृद्धि के कारण 93 वें स्थान पर रखा गया है.

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रैंकिंग के आयोजकों ने कहा कि 72 संस्थानों के साथ चीन वार्षिक सूची में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश बना हुआ है, जो तालिका के शीर्ष पांच पदों में से चार का दावा करता है. द एली बोथवेल ऑफ द ने कहा कि: “भारतीय संस्थानों में सफलता की अपार संभावनाएं हैं - न केवल उभरते हुए मंच पर, बल्कि विश्व स्तर पर भी. वहीं जहां वैश्विक स्तर पर आगे जा रहा है तो वहीं अन्य देश जो काफी पीछे चल रहे थे, जैसे- मलेशिया और मिस्त्र अब वह बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. जो कि भारतीय संस्थानों की अपेक्षा काफी ज्यादा है.

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“इस वर्ष की लिस्ट में, भारत की शिक्षण संस्थाएं अच्छा प्रदर्शन करती हैं दिखाई दे रही हैं. हालांकि वे अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा जाते तो और वैश्विक औसत दर की बात की जाए तो भारत अभी भी अन्य देशों से काफी पीछे है. ऐसे में अगर भारतीय उच्च शिक्षा संस्थआन इसे मजबूत करने पर ध्यान देते हैं तो इससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ावा मिलेगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी छात्रों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी.