म्यांमार: समझिए इसका ‘भूगोल’, जहां दो बार आतंकियों पर बड़े हमले कर चुकी है भारतीय सेना

म्यांमार में आतंकियों पर हुए ताजा हमलों के पीछे भारत की एक परियोजना को बढ़ता खतरा था. 

म्यांमार: समझिए इसका ‘भूगोल’, जहां दो बार आतंकियों पर बड़े हमले कर चुकी है भारतीय सेना
दुनिया के कई देशों में म्यांमार को अभी सैन्य शासन के प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त नहीं माना जाता है. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: दुनिया भर ध्यान जब भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर तनाव पर था, भारतीय ने म्यांमार में वहां की सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों पर कड़ी सैन्य कार्रवाई कर दी. दोनों देश लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहे हैं और उससे निपटने के लिए सहयोग भी कर रहे हैं. म्यांमार जिसका कि पुराना नाम बर्मा है, 1937 तक ब्रिटिश भारत का हिस्सा था. 194 दक्षिण पूर्व एशिया के इस देश में लंबे समय तक सैन्य शासन रहा जिसे अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने मान्यता नहीं दी. हाल के कुछ सालों में यहां से रोहिंग्या मुसलमानों के बड़ी तादात में पलायान और पड़ोस में भारत और बांग्लादेश में शरण लेना सुर्खियों में रहा. फरवरी और मार्च के महीने में  भारतीय सेना ने म्‍यांमार सेना के साथ मिलकर दोनों देशों की सीमा पर मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया है. इससे पहले भी भारतीय सेना ने 2015 में भी म्यांमार की सीमा में घुसकर वहां सक्रिय नागा आतंकियों के कैम्पों को नष्ट किया था. 

वर्तमान में हुए हमलों का कारण म्यांमार के अराकान सेना को निशाने पर लेना है. अराकान सेना एक उग्रवादी संगठन है जिसे म्यांमार के आतंकी संगठन काचिन स्वतंत्रता सेना का समर्थन है जो म्यांमार चीन सीमा पर सक्रिय है. अराकान सेना से भारत के कालादान परियोजना को गंभीर खतरा है. इस को देखते हुए भारत ने म्यांमार सेना के साथ मिलकर यह अभियान चलाया. 

म्यांमार के भूगोल की भूमिका
इस समस्या को समझने के लिए हमें म्यांमार का भूगोल समझना होगा. दक्षिण पूर्व एशिया में  676,578 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले म्यांमार के उत्तर पूर्व में चीन, उत्तर पश्चिम में भारत, पश्चिम में बांग्लादेश एवं बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में अंडमान सागर, पूर्व में लाओस और थाईलैंड, से घिरा है. यह भारत के अरुणांचल प्रदेश, नागालैंड, मणीपुर और मिजोरम से नागा और चिन पर्वत श्रृंखला में जमीनी सीमा साझा करता है. उत्तर में हेंग्दुआन शान पर्वत श्रृंखला चीन के साथ सीमा बनाती है. वहीं इरावदी और सालवीन नदीयां देश के मध्यभूभाग को उपजाऊ मैदान बनाती हैं. वहीं पूर्व में शान के पठार मौजूद है. वर्तमान समस्या का संबंध म्यांमार के दक्षिण पश्चिमी इलाके से जो अराकान पर्वत श्रृंखला के पश्चिम में कलादान नदी का भूभाग है. यह क्षेत्र म्यांमार का रखाइन इलाका है जहां रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं. 

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क्या है कलादन परियोजना
रखाइन राज्य म्यांमार के अराकान पर्वत श्रृंखला के पश्चिम में स्थित है. रखाइन राज्य में कलादान नदी भारत के मिजोरम से आती है.  बंगाल की खाड़ी में स्थित इस नदी के मुहाने पर सिट्टवे में भारत एक बंदरगाह का निर्माण कर रहा है. जिससे भारत के कोलकाता और मिजोरम का संपर्क नजदीक हो जाएगा. सिट्टवे के बाद यहां के 158 किलोमीटर के नदीमार्ग से प्लेतवा तक और वहां से 129 किलोमीटर के सड़क मार्ग से मिजोरम को जोड़ेगी. इसमें अगर कोलकाता से सिट्टवे तक के 539 किलोमीटर के समुद्री मार्ग को जोड़ दें तो यह दूरी 826 किलोमीटर रह जाएगी. इससे लगभग मिजोरम और कोलकाता के बीच की दूरी लगभग 1000 किलोमीटर तक कम हो जाएगी. 

सांस्कृतिक विविधता का देश है म्यांमार
5 करोड़ 14 लाख की आबादी वाले म्यांमार का प्रमुख शहर यंगून (जिसका पुराना नाम रंगून) है. 2005 से देश की राजधानी नाएप्यीडॉ को बनाया गया जो देश के मध्य में स्थित है. यहां की आधिकारिक भाषा बर्मी है, इसके अलावा यहां काचिन, कयाआ, कारेन, चिन मोन रखाइन (रोहिंग्या मुस्लिमों की भाषा) और शान क्षेत्रीय भाषा हैं. बौद्ध धर्म यहां का प्रमुख धर्म है, लेकिन यहां 10 लाख से ज्यादा मुस्लिम आबादी भी है जो रखाइन राज्य में रहती है. 

रोहिंग्या समस्या पहले ही कर रही है म्यांमार को परेशान
अगस्त 2017 में सेना ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों के खिलाफ एक ऑपरेशन चलाया जिसने बड़ी संख्या में (लगभग 5 लाख) रोहिंग्या मुस्लमानों को अपना देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया. ये लोग देश के दक्षिण पश्चिम में बांग्लादेश की सीमा और बंगाल की खाड़ी से लगे रखाइन राज्य के रहने वाले लोग हैं. सालों से यहां रहने वाले मुस्लिमों के बारे में माना जाता है कि ये बांग्लादेशी शरणार्थी हैं. लेकिन 2012 से रखाइन इलाके में सामप्रदायिक हिंसा बढ़ गई जिसमें छुटपुट घटनाओं में कई लोगों के मरने की खबरें आने लगीं, लेकिन 2017 में सेना ने इस अभियान ने समस्या को गंभीर बना दिया. इससे हजारों शरणार्थी बांग्लादेश चले गए. इस घटना को सयुंक्त राष्ट्र ने नस्लीय नरसंहार (एथनिक क्लेन्जिंग) करार दिया. इससे म्यांमार की नई लोकतांत्रिक सरकार की अंतरराष्ट्रीय मंच पर किरकिरी हुई और माना गया कि म्यांमार की राजनीति अब भी सैन्य प्रभाव से मुक्त नहीं हुई है.

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2015 में अलग वजह से हुआ था सर्जिकल स्ट्राइक
भारत के साथ म्यांमार की नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम की सीमा का क्षेत्र ही विवादास्पद है. यह सीमा विवाद न होकर विभिन्न समुदायों के बीच सशस्त्र संघर्ष है.  भारत में नागालैंड में नागा आतंकियों का सशस्त्र संघर्ष पहले से ही चल रहा है. ये आतंकी भारत और म्यांमार सीमा का फायदा उठाते रहे हैं. भारतीय सेना ने 2015 के सर्जिकल स्ट्राइक में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड पर निशाना बनाया गया था जिसने मणिपुर में एक हमले में 18 भारतीय सैनिकों को मार दिया था.