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जानिए, आखिर क्यों अमेरिका समेत 50 देश चाहते हैं इस देश में सत्ता बदलाव, कौन लगा रहा अड़ंगा

 मादुरो की सहायता के लिये रूसी सैनिकों और उपकरणों की तैनाती ने अंतरराष्ट्रीय तनाव को बढ़ा दिया है क्योंकि कभी समृद्ध रहे इस देश में बढ़ती अशांति के बीच ट्रंप प्रशासन सत्ता परिवर्तन पर जोर दे रहा है.

.(फाइल फोटो)
.(फाइल फोटो)

मास्को: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से वेनेजुएला से अपनी सेना हटाने की मांग के बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला में उसके सैनिकों की मौजूदगी से किसी को कोई खतरा नहीं है. अमेरिका और 50 से अधिक देशों ने संकट ग्रस्त वेनेजुएला के विपक्षी नेता जुआन गुइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दी है जबकि रूस के साथ चीन ने निकोलस मादुरो का समर्थन किया है. मादुरो की सहायता के लिये रूसी सैनिकों और उपकरणों की तैनाती ने अंतरराष्ट्रीय तनाव को बढ़ा दिया है क्योंकि कभी समृद्ध रहे इस देश में बढ़ती अशांति के बीच ट्रंप प्रशासन सत्ता परिवर्तन पर जोर दे रहा है.

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने पत्रकारों से कहा कि रूस क्षेत्र में सत्ता के संतुलन को नहीं बदल रहा है और न ही रूस ने अमेरिका से उलट किसी भी नागरिक को धमकी दी है. उन्होंने ट्रंप के बुधवार के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘‘रूस को वेनेजुएला से जाना होगा’’.

साथ ही उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो के उन बयानों का भी जिक्र किया जिसमें पोंपियो ने कहा था कि अमेरिका की मादुरो के साथ बातचीत की योजना नहीं है और उनका देश वेनेजुएला पर रूस और क्यूबा के प्रभुत्व को खत्म करना चाहता है. जखारोवा ने कहा, ‘‘न तो रूस और न ही वेनेजुएला अमेरिका के प्रांत हैं.’’

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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर ‘‘तख्तापलट की कोशिश’’ का आरोप लगाया, वहीं पोंपियो ने चेतावनी दी कि रूसी तनाव को कम करने के लिये अमेरिका मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है. इससे पहले बृहस्पतिवार को मास्को में वेनेजुएला के सैन्य अताशे ने कहा कि सैन्य एवं तकनीकी सहयोग पर एक समझौते के तहत रूसी सेना फिलहाल वेनेजुएला में हैं और उन्होंने कोई सैन्य अभियान शुरू नहीं किया.

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