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विवाद के बाद इस देश ने शुरू किया सैन्य अभ्यास, 131 पोत, 57 विमान और 33 हेलीकॉप्टर को मैदान में उतारा

एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार तड़के शुरू हुए अभ्यास में 131 पोत, 57 विमान और 33 हेलीकॉप्टर हिस्सा ले रहे हैं. 

विवाद के बाद इस देश ने शुरू किया सैन्य अभ्यास, 131 पोत, 57 विमान और 33 हेलीकॉप्टर को मैदान में उतारा
फोटो साभारः Reuters

अंकारा: तुर्की की सेना ने सोमवार को व्यापक स्तर पर एक नौसेन्य अभ्यास शुरू किया.  यह अभ्यास ऐसे समय में शुरू किया गया है जब साइप्रस के तट पर गैस की खोज की उसकी योजनाओं के कारण तनाव कायम है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने ‘एएफपी‘ का बताया कि सोमवार तड़के शुरू हुए अभ्यास में 131 पोत, 57 विमान और 33 हेलीकॉप्टर हिस्सा ले रहे हैं. उसने कहा कि यह 25 मई तक चलेगा, जो भूमध्यसागर, एजियन और काले सागर में किया जाएगा. गौरतलब है कि तुर्की ने मई में घोषणा की थी कि वह सितंबर तक गैस की तलाश के लिये साइप्रस के पास के इलाके में खुदाई का काम करेगा.

यूरोपीय संघ का कहना है कि इससे वह साइप्रस के विशेष आर्थिक क्षेत्र का अतिक्रमण करेगा, जबकि अमेरिका ने इस कदम को "अत्यधिक उकसावे वाला" बताया. 

तुर्की: यूरोप और अरब देशों के बीच उलझा यह देश 
तुर्की आज दुनिया का ऐसा देश है जो इस्लाम बहुल देश होने के बावजूद एक आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. यहां के ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं लेकिन इसके बाद भी यहां की शासन व्यवस्था में इस्लाम या धार्मिक दखल नहीं है. आज यह देश कट्टर इस्लामी देशों, खासकर अरब देशों का विरोध झेल रहा है, लेकिन फिर भी आज तुर्की अपनी खास संस्कृति को बचाए रखते हुए दुनिया में अपना वजूद मजबूती से कायम रखे हुए है. इन दिनों तुर्की को अमेरिका की नाराजगी झेलनी पड़ रही है. आंतरिक राजनैतिक संघर्ष बरसों से जारी है. आर्थिक स्थिति चिंताजनक है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ-साथ तुर्की को भी अमेरिका की जीएसपी सूची से हटाने की वकालत की है. 

पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच स्थित यह देश भौगोलिक रूप से दोनों ही महाद्वीप में आता है. इनमें से ज्यादातर इलाका एशिया में आता है. तुर्की की आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ टर्की यानि तुर्क गणराज्य है. कभी ओटोमन साम्राज्य का केंद्र बिंदु रहे तुर्की को कामाल अतातुर्क ने 1920 के दशक में आधुनिक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनाया. इस क्षेत्र में यूरोप और पश्चिम एशिया दोनों का ही प्रभाव रहा यही वजह से काफी समय से यह क्षेत्र संघर्ष में उलझा रहा. ईसाईयों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष के बीच य़ह देश हमेशा ही पिसा है. भू-रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र बहुत अहम है. यूरोप और एशिया के लिए लंबे समय तक यह एक दूसरे का प्रवेश द्वार रहा है.