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ZEE जानकारी: पेरिस का ऐतिहासिक गिरजाघर नोट्रे-डेम आग लगने से तबाह

ये आग क़रीब साढ़े 8 सौ साल पुराने फ्रांस के एक चर्च में लगी थी. जिसका नाम है, Notre-Dame Cathedral . इस चर्च को फ्रांस में Our Lady कहकर संबोधित किया जाता है.

ZEE जानकारी: पेरिस का ऐतिहासिक गिरजाघर नोट्रे-डेम आग लगने से तबाह

अब एक ऐसी आग की बात करते हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लिया. 

ये आग क़रीब साढ़े 8 सौ साल पुराने फ्रांस के एक चर्च में लगी थी. जिसका नाम है, Notre-Dame Cathedral . इस चर्च को फ्रांस में Our Lady कहकर संबोधित किया जाता है. लेकिन, कल, ये चर्च आग की लपटों में झुलस रहा था. और पूरी दुनिया में इसकी तबाही का मातम मनाया जा रहा था. इसके पीछे की एक बड़ी वजह ये है, कि Notre-Dame Cathedral को UNESCO ने World Heritage Site घोषित किया हुआ है. और Catholic समुदाय के करोड़ों लोगों की भावनाएं, इससे जुड़ी हुई हैं.

हालांकि, आग लगने की इस घटना के दौरान कई प्रकार की ग़लतफहमियां भी फैलाई गईं. और इसके लिए Video Sharing Website, You tube ज़िम्मेदार थी. क्योंकि, जिस वक्त You tube पर पेरिस में लगी इस आग के Videos का लाइव प्रसारण किया जा रहा था, उस वक्त उसे Artificial Intelligence के ज़रिए अमेरिका में 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों से जोड़ दिया गया. यानी इस दुर्घटना के दौरान Google का AI या तकनीकी दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर रहा था. ये क्यों और कैसे हुआ, ये जानना भी आपके लिए दिलचस्प होगा. लेकिन उससे पहले आपको Notre-Dame Cathedral के महत्व को समझना होगा. क्योंकि, कल लगी आग का इस चर्च के इतिहास से बहुत गहरा नाता है. 

इसके निर्माण की शुरुआत वर्ष 1163 में हुई थी. और सन 1345 में इसे पूरा कर लिया गया.

इस चर्च को Medieval Gothic Architecture का रत्न कहा जाता है.

लेकिन वर्ष 1790 के आसपास जब French Revolution हुआ, तो इसे काफी नुकसान पहुंचा.

फिर सन 1844 से लेकर 1864 के बीच इसकी मरम्मत की गई. 
इसके बाद इस इमारत ने दो विश्व युद्ध भी देखे, लेकिन कोई इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाया. अफसोस की बात ये है, कि दो विश्व युद्ध झेलने वाली इमारत में, शांतिकाल के दौरान आग लग गई. और उसका एक बहुत ही कीमती हिस्सा जलकर राख हो गया. 

आग लगने की वजह क्या थी...ये अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन कहा जा रहा है, कि जिस वक्त आग लगी, उस वक्त चर्च में Renovation का काम चल रहा था. इस चर्च में लकड़ी का काम ज्यादा था. इसलिए आग की लपटें काफी तेज़ी से फैलीं.

हालांकि, 15 घंटों की कड़ी मेहनत के बाद किसी तरह आग पर काबू पा लिया गया. राहत की बात ये है, कि इसके मुख्य ढांचे को बचा लिया गया है. इस चर्च का महत्व बहुत ज़्यादा है. पेरिस में Notre-Dame Cathedral ही एकमात्र ऐसी इमारत है जो Eiffel Tower को टक्कर दे सकती है. शायद इसीलिए, हर वर्ष करीब एक करोड़ 30 लाख लोग, इस चर्च में आते हैं.

अब आपको ये बताते हैं, कि पेरिस के चर्च में लगी आग को... Google ने कैसे गलती से 9/11 के आतंकी हमले वाली अफवाह से जोड़ दिया?

आग लगने के बाद बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक चर्च के आसपास के इलाकों में आकर घटना को देखने लगे. इस बीच कुछ लोगों ने इस आग को देखने के लिए Youtube का भी सहारा लिया. लेकिन Youtube का Artificial Intelligence.. Confuse हो गया और उसने लोगों को सही जानकारी नहीं दी. Youtube के Algorithm ने चर्च में आग के वीडियो से संबंधित जो जानकारी दी, वो 9/11 के हमले से जुड़ी हुई थी. चर्च का Tower गिरने की तस्वीरें दुनिया भर में तेज़ी से Viral हो गईं. 

Youtube पर मौजूद अलग-अलग चैनल्स पर जो वीडियो दिखाए जा रहे थे, उनमें 2001 के आतंकी हमलों के बाद New York के World Trade Center के गिरने से जुड़ी जानकारियां थीं. देखते-देखते Youtube अफवाहों का केंद्र बन गया. क्योंकि, चर्च का टॉवर बिल्कुल उसी अंदाज में गिरा, जिस तरह से World Trade Center का Tower गिरा था. इसके बाद Youtube के Tools दोनों घटनाओं को एक जैसी घटना मानने लगे. और ऐसी जानकारियां Share होने लगीं, जो आतंकवादी हमले से जुड़ी थीं. Youtube पर जब इस घटना का लाइव प्रसारण हो रहा था, तो उसे 9/11 Conspiracy Theory Video कहा जा रहा था.

हालांकि, जब Google द्वारा संचालित Youtube को अपनी ग़लती का अहसास हुआ, तो उसने कहा, कि उसके Algorithm से गलती हो गई.

Youtube ने पिछले साल अपने Videos के साथ एक Text Box Feature की शुरुआत की थी. ताकि Artificial Intelligence की मदद से Youtube पर प्रसारित होने वाले Videos से संबंधित सूचनाएं डाली जा सके. लेकिन इस मामले में Google के AI ने गलती कर दी. उसने 9/11 के हमलों से जुड़ी सूचनाएं, Notre-Dame cathedral की आग से जोड़कर दिखानी शुरु कर दी. जिससे देखने वाले को ये भ्रम हुआ, कि चर्च में लगी आग का Video, 9/11 की Conspiracy Theory से जुड़ा Video है.

हालांकि, बाद में Google ने अपनी ग़लती मान ली. इससे ये पता चलता है, कि Artificial Intelligence भी Fool Proof नहीं है. उससे भी गलती हो सकती है. इसलिए ऐसी तकनीक पर आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता. आज भी Artificial दिमाग, इंसान के Original दिमाग के सामने ठहर नहीं सकता.