झारखंड चुनाव: चौथे चरण में शहरी सीटों पर फैमिली फाइट, 62.46 फीसदी पड़े वोट

झारखंड में चौथे चरण के लिए वोटिंग हुई. चौथे चरण की 15 सीटों पर मतदान खत्म होने तक तकरीबन 62.46 फीसदी वोट पड़े. झारखंड में चौथे चरण में ज्यादातर सीटों पर फैमिली फाइट देखी जा रही है. यानी कि एक ही परिवार के लोग एक दूसरे से चुनावी मुकाबले में हैं. झरिया उन सब में सबसे प्रमुख सीट है जिसपर सबकी नजर है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 16, 2019, 08:11 PM IST
    • झरिया में पत्नियां बचाने उतरी हैं पति की नाक
    • शहरी सीटों पर ज्यादा जीती है भाजपा, इस बार क्या होगा ?
    • कई सीटों पर सीधा तो कई पर त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबला
    • भगवा झंडे का काम बिगाड़ सकती है पुरानी सहयोगी दल
    • एकमात्र सीट जिस पर झारखंड में जीत सकी वामपंथी पार्टी
    • झारखंड में चौथे चरण में 62 फीसदी मतदान
झारखंड चुनाव: चौथे चरण में शहरी सीटों पर फैमिली फाइट, 62.46 फीसदी पड़े वोट

रांची: झारखंड में चौथे चरण की 15 सीटों पर वोटिंग में ज्यादातर सीटें शहरी हैं. 15 में से 10 सीटें शहरी हैं और क्योंकि भाजपा पिछली बार की सत्ताधारी पार्टी है तो ज्यादातर सीटों पर भगवा झंडे का ही कब्जा था. इस बार चुनावी मुकाबले की सूरत कुछ अलग है. यहां शाम 5 बजे तक 62.46 फीसदी वोट पड़े हैं.

चौथे चरण में कुछ सीटें ऐसी भी हैं जो पारिवारिक लड़ाई का जबरदस्त नजारा पेश करने वाली हैं. झरिया विधानसभा सीट इनमें से सबसे चर्चित सीट हैं जहां एक ही परिवार की दो औरतें अपने शौहर का और पार्टी के झंडे की नाक बचाने उतरी हैं. 

झरिया में पत्नियां बचाने उतरी हैं पति की नाक

झरिया विधानसभा सीट की कहानी ही कुछ अलग है. यह सीट भाजपा के सीटिंग विधायक संजीव सिंह के परिवार की बदौलत भगवा झंडे की पारंपरिक सीट रही है. भाजपा विधायक संजीव सिंह पर अदालत ने चुनाव लड़ने से रोक लगा दी है. कारण कि उनपर अपने ही भाई नीरज सिंह की हत्या का मामला चल रहा है.

दिलचस्प बात यह है कि दिवंगत नीरज सिंह का बदला लेने के लिए उनकी पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह जब चुनावी मैदान में उतरीं वह भी कांग्रेस के बैनर तले तो भाजपा ने संजीव सिंह की कमी पूरी करने के लिए उनकी पत्नी रागिनी सिंह को उतार दिया. मुकाबला एक ही परिवार के बीच कांटे की टक्कर वाला हो गया है. लेकिन जनता किसके सर जीत का सेहरा बांधती है वह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा. 

शहरी सीटों पर ज्यादा जीती है भाजपा, इस बार क्या होगा ?

इसके अलावा बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, देवघर, बाघमरा, जमुआ और मधुपुर शहरी विधानसभा सीटों पर भी भाजपा जहां भगवा झंडे को लहराने का अथक प्रयास कर रही है वहीं झामुमो के नेतृत्व वाली महागठबंधन इस दफा कई सीटों पर सत्ताधारी पार्टी को जबरदस्त मुकाबला दे रही है.

भाजपा ने पिछली बार अकेले दम पर 11 और आजसू के सहयोग से 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं एक सीट झाविमो के पाले में चली गई थी लेकिन जीत के तुरंत बाद चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी ने पाला बदला और भाजपा में शामिल हो गए. इन में से 1 सीट झामुमो और 1 मासस को मिली थी. 

कई सीटों पर सीधा तो कई पर त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबला 

अब दंगल का कुछ अलग ही सीन है. राजनीतिक पंडितों के विश्लेषण में यह मालूम हुआ कि भाजपा को इन 15 सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए 6 सीटों पर तो सीधे मुकाबला कर मुंह में हाथ डालकर जाती हुई सीटें पानी होंगी. 9 सीटों पर लड़ाई त्रिकोणीय है. जहां जीत का अंतर काफी कम हो सकता है और मुकाबला गलाकाट प्रतिस्पर्धा  वाला है.

दरअसल, माना यह जा रहा है कि कई सीटों पर भाजपा के दोनों पुराने साथी पार्टी का काम बिगाड़ सकते हैं. बाबूलाल मरांडी की झाविमो और सुदेश महतो की आजसू पर सबकी नजरें हैं. दोनों ही पार्टियां झारखंड में हरियाणा के जजपा वाला खेल दिखा सकती है. सीधे शब्दों में कहें तो चुनाव परिणाम के अंत में यह देखने मिल सकता है कि किसी पार्टी को बहुमत न मिले और अंत में आजसू और झाविमो किंगमेकर पार्टियां बने. 

भगवा झंडे का काम बिगाड़ सकती है पुरानी सहयोगी दल

टुंडी विधानसभा सीट पर तो मुकबला चतुष्कोणीय है. पिछली बार यह सीट आजसू के राजकिशोर महतो ने जीती थी. इस बार यहां झाविमो प्रत्याशी के अलावा फिर से भाजपा प्रत्याशी और झामुमो के उम्मीदवार चुनावी रण को दिलचस्प बना रहे हैं. पिछली बार झारखंड विधानसभा में बोकारो की सीट काफी चर्चित रही जहां भाजपा उम्मीदवार बिरंची नारायण ने कांग्रेस के समरेश सिंह को  बड़े अंतर से हराया था.

जीत का अंतर 72,000 से भी अधिक था. इस बार समरेश सिंह की जगह उनकी बहू श्वेता सिंह कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन का झंडा लिए उतरी हैं. देखना यह है कि क्या है वह बिरंची नारायण को चुनौती दे पाती हैं या पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा विधायक समरेश सिंह को धूल चटाने में सफल होंगे. 

एकमात्र सीट जिस पर झारखंड में जीत सकी वामपंथी पार्टी

निरसा पिछली बार एकमात्र ऐसी सीट थी जहां मार्क्सवादी पार्टी के उम्मीदवार अरूप सिंह ने जीत दर्ज की थी वह भी सिर्फ 1035 वोटों से. भाजपा प्रत्याशी अपर्णा सेन गुप्ता पिछली बार कड़े मुकाबले में जीत के करीब आ कर भी हार गईं.

इस बार भाजपा इस सीट पर अपना दबदबा कायम करना चाहती थी लेकिन भाजपा के तमाम सहयोगियों ने भगवा झंडे की नींव को ही कमजोर कर दिया है. आजसू, झाविमों के अलावा जदयू ने भी उम्मीदवार को समर्थन दे कर काम बिगाड़ने वाला पैंतरा खेल दिया है. 

चौथे चरण में 15 सीटों पर 221 प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में प्रचार-प्रसार करने के बाद जनता के भरोसे अपनी किस्मत का फैसला छोड़ चुके हैं. अब आज जनता उस पर अपना मत दे रही है कि उसे कौन सा प्रतिनिधि चाहिए. 

कहां कितने प्रतिशत हुई वोटिंग

पांचवे चरण में भी अच्छी हुई वोटिंग. सबसे ज्यादा वोटें चंदनकियारी में पड़ीं और सबसे कम वोट बोकरो में. 

मधुपुर 72.90, देवघर 63.40, बगोदर 62.82, जमुआ 59.09, गांडेय 69.17, गिरिडीह 60.64, डुमरी 68.89, बोकारो 50.64, चंदनकियारी 74.50, सिंदरी 69.50, निरसा 67.60, धनबाद 52.6, झरिया 51.76, टुंडी 67.21, बाघमारा 61.95

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