"ये वर्चुअल रैली सियासत नहीं, आत्मनिर्भर भारत के लिये"! पढ़ें, शाह की 10 बड़ी बातें

बिहार में भारतीय जनता पार्टी की 75 वर्चुअल रैलियों की शुरुआत अमित शाह की जनसंवाद रैली से हुई. इस दौरान शाह ने कहा कि ये रैली सियासत नहीं, आत्मनिर्भर भारत के लिये. आपको अमित शाह की 10 बड़ी बातों से रूबरू करवाते हैं.

"ये वर्चुअल रैली सियासत नहीं, आत्मनिर्भर भारत के लिये"! पढ़ें, शाह की 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने देश में पहली बार वर्चुअल रैली का आगाज कर दिया है. बिहार चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने आज इस रैली के जरिए चुनावी शंखनाद कर दी है. बीजेपी की 75 वर्चुअल रैलियों की शुरुआत अमित शाह की बिहार जनसंवाद रैली से हुई. 

अमित शाह के चुनावी रैली की 10 बड़ी बातें

गृहमंत्री अमित शाह ने इस रैली को लेकर कहा कि ये रैली सियासत नहीं, आत्मनिर्भर भारत के लिये है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति के इतिहास में पहली वर्चुअल रैली में उपस्थित बिहार के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों आप सभी का मैं भाजपा की ओर से स्वागत करता हूं. आपको अमित शाह के संबोधन की 10 बड़ी बातों से रूबरू करवाते हैं.

1). इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का गला घोटने की कोशिश की: अमित शाह

"आजादी के बाद जब कांग्रेस पार्टी की नेता श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास किया तब बिहार की जनता ने ही जेपी आंदोलन करके फिर से एक बार लोकतंत्र को स्थापित करने का काम किया."

"बिहार की धरती ने ही पहली बार दुनिया को लोकतंत्र का अनुभव कराया. जहां महान मगध साम्राज्य की नींव डाली गई. इस भूमि ने हमेशा भारत का नेतृत्व किया है."

2). रैली का चुनावी संबंध नहीं, भाजपा को लोकतंत्र में भरोसा: अमित शाह

"इस रैली का चुनाव से कोई संबंध नहीं है. भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है. कोरोना संकट में हम जन संपर्क के अपने संस्कार को भुला नहीं सकते. मैं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जी को बधाई देता हूं कि 75 वर्चुअल रैली के माध्यम से उन्होंने जनता से जुड़ने का मौका दिया है."

"आज जब मैं वर्चुअल रैली के माध्यम से आपसे संवाद कर रहा हूं तब कुछ लोगों ने अभी थाली बजाकर इस रैली का स्वागत किया है. मुझे अच्छा लगा कि देर-सवेर मोदी जी की अपील को उन्होंने माना."

3). जनता को जोड़ने के लिए एक वर्चुअल रैली का आयोजन: अमित शाह

"ये राजनीतिक दल के गुणगान गाने की रैली नहीं है. ये रैली जनता को कोरोना के खिलाफ जंग में जोड़ने और उनके हौसले बुलंद करने के लिए है.

"जो वक्रदृष्टा लोग इसमें भी राजनीति देखते हैं, उन्हें मैं कहता हूं कि किसने उन्हें रोका है, दिल्ली में बैठकर मौज करने की जगह, दिल्ली से लेकर पटना और दरभंगा की जनता को जोड़ने के लिए एक वर्चुअल रैली ही कर लेते."

4). 'इससे पहले की सरकारों ने पूर्वी भारत के विकास से मुंह मोड़ था'

"2014 में मोदी जी ने कहा था कि भारत का विकास जो अब तक चला उसमें पश्चिमी भारत और पूर्वी भारत के विकास में बहुत बड़ा अंतर है."

"आजादी के समय जीडीपी के अंदर पूर्वी भारत का योगदान बहुत ज्यादा होता था, परंतु आजादी के बाद से जिस प्रकार से सरकारें चली उन्होंने पूर्वी भारत के विकास से मुंह मोड़ लिया था और परिणाम ये आया कि पूर्वी भारत पिछड़ता गया."

5). करोड़ों गरीबों के जीवन में प्रकाश लाने की कोशिश: अमित शाह

"मोदी जी ने छह साल के अंदर करोड़ों गरीबों के जीवन में प्रकाश लाने का एक प्रयास किया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा अगर किसी को हुआ है तो वो मेरे पूर्वी भारत के लोगों को हुआ है."

"आवास, बिजली, बैंक खाते, स्वास्थ्य सेवाएं, गैस सिलेंडर, शौचालय, ये सब तो मोदी सरकार 2014-2019 तक के कार्यकाल में ही दे चुकी थी. 2019 में मोदी जी ने जल शक्ति मंत्रालय गठित करके देश के 25 करोड़ लोगों के घर में नल से शुद्ध जल पहुंचाने की योजना शुरू की."

6). कांग्रेस ने गरीब किसानों का कर्ज माफ नहीं किया: अमित शाह

"राहुल गांधी हमेशा कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ करो. 10 साल उनकी सरकार रही थी, तो वो दावा करते हैं कि करीब 3 करोड़ किसानों का 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया."

"नरेन्द्र मोदी जी ने किसान सम्मान निधि के माध्यम से 9.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में 72,000 करोड़ रुपये हर साल डालने की व्यवस्था की"

"आरसीईपी की चर्चा कांग्रेस शुरु करके गई थी. इसकी वजह से छोटे किसान, मछुवारे, छोटे कारोबारी, छोटे उद्योग ये सब तबाह हो जाते. मोदी जी ने छोटे किसानों, छोटे व्यापारियों के हित में दृढ़ता से फैसला लेते हुए आरसीईपी समझौते से भारत को अलग कर लिया"

7). 'जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में लिखा जाएगा'

"जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कि देश के एक नेता की अपील पर कोई पुलिस बल प्रयोग किए बगैर पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया."

"चाहे उन्होंने थाली और घंटी बजाने को कहा, चाहे दीया जलाने को कहा, चाहे सेना के जवानों द्वारा आकाश से कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की बात हो, ये सब मोदी जी की अपील ही थी"

"कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा कहा, मगर जो कह रहे हैं उनको ये मालूम नहीं है कि ये राजनीतिक प्रोपेगेंडा नहीं है बल्कि ये देश को एक बनाने की मुहिम है."

8). 130 करोड़ जनता मोदी जी के साथ इस जंग में खड़ी है: अमित शाह

"देश की 130 करोड़ जनता मोदी जी के साथ कोरोना की लड़ाई में चट्टान की तरह खड़ी है. देश का कोई भी कोना हो, उसके विकास की नींव में बिहार के व्यक्ति के पसीने की महक है. जो लोग उन्हें अपमानित करते हैं वो प्रवासी मजदूरों के जज्बे को नहीं समझते हैं."

9). प्रवासियों के साथ मजबूती से खड़ी रही है सरकार: अमित शाह

"कोरोना महामारी के बाद नरेन्द्र मोदी जी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि सभी जगह प्रवासी मजदूरों को सम्मान से रखा जाए और उनके लिए 11 हजार करोड़ रुपये राज्यों को दिए."

"मैं आज इस मंच से कहना चाहता हूं कि देश का कोई भी हिस्सा चाहे मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु हो, जो विकसित है इसकी नींव में जाएंगे तो मेरे बिहार के प्रवासी मजदूर के पसीने की महक आती है."

"बिहार के व्यक्ति का पसीना इस देश के विकास की नींव में है. करीब 1.25 करोड़ प्रवासी मजदूरों को हजारों ट्रेनों के माध्यम से उनके घरों तक पहुंचाया. उनके लिए भोजन की व्यवस्था की गई, पीने के पानी की व्यवस्था की गई. उनके गृह राज्यों में क्वारंटाइन की व्यवस्था की गई."

10). 'एक देश-एक राशन कार्ड' का निर्णय लिया गया: अमित शाह

"नरेन्द्र मोदी जी ने अभी-अभी गत कैबिनेट में 'एक देश-एक राशन कार्ड' का निर्णय लिया गया. बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा के मजदूर देश के कई हिस्सों में काम करते हैं. इससे अब श्रमिक भाई-बहन अपने हिस्से का राशन, देश में कहीं पर भी हों वहां से ले सकेंगे."

"नीतीश जी और सुशील जी दोनों प्रसिद्धि करने में थोड़े से कच्चे हैं. वो रोड पर खड़े होकर थाली नहीं बजाते हैं, वो चुपचाप सहायता के लिए काम करने वाले लोग हैं. नीतीश जी और सुशील जी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने बहुत अच्छे से ये लड़ाई लड़ी है."

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