बड़ा भूकंप आया तो बर्बाद हो जाएगी दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली में शुक्रवार को भूकंप के झटके महसूस किये गए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूकंप के झटके के भी भी दिल्ली के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं.   

बड़ा भूकंप आया तो बर्बाद हो जाएगी दिल्ली

नई दिल्ली: भूकंप के झटके कभी भी दिल्ली के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं. क्योंकि यहां की जमीन के नीचे तीन फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं. 

ये हैं सबसे ज्यादा खतरनाक इलाके 
दिल्ली में ज्यादा नुकसान की आशंका वाले इलाके कुछ इस प्रकार है यमुना तट के करीबी इलाके, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर. इन इलाकों में घनी आबादी बसी हुई है. लेकिन इन इलाकों की धरती के नीचे तीन फाल्‍ट लाइनें मौजूद हैं.

लेकिन सबसे बुरा ये है कि इतने खतरनाक फॉल्ट लाइनों पर बसे होने के बावजूद यहां सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर अंधाधुंध अवैध निर्माण लगातार जारी हैं. यहां बिल्डिंगें बनाने में ना तो नेशनल बिल्डिंग कोड का ध्यान रखा जाता है और ना ही न ही स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियरिंग का ध्यान रखा जाता है.  

दिल्ली से सटे फरीदाबाद और गुरुग्राम (गुड़गांव) भी ऐसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में आते हैं. 

राजधानी दिल्ली है सिस्मिक जोन-4 में 
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को सिस्मिक जोन-4 में रखा गया है. ये वो इलाका है जहां 8 रिक्टर स्केल तक का भूकंप कभी भी आ सकता है. जो कि बेहद जानलेवा साबित हो सकता है. 

दुनिया में भूकंप की आशंका वाले क्षेत्रों को 5 सिस्मिक जोन में बांटा गया है. इसमे से दिल्ली सिस्मिक जोन-4 में है. यानी सबसे खतनाक इलाकों में दूसरे नंबर पर. जमीन के भीतर के संरचना पर होने वाले अध्‍ययन को सिस्‍मिक माइक्रोजोनेशन कहते हैं. मिट्टी की संवेदनशीलता जांच कर इसे भूकंपीय खतरे के लिहाज से नौ अलग अलग जोन में बांटा जाता है.

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इसलिए दिल्ली में बेहद ज्यादा खतरा
दिल्ली में 27 जुलाई, 1960 को 5.6 की तीव्रता का बड़ा भूकंप आया था.  हालांकि उस समय ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था. क्योंकि तब दिल्ली की आबादी कम थी. 

लेकिन 80 और 90 के दशक के बाद से दिल्ली की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है. जिसकी वजह से अब दिल्ली की आबादी दो करोड़ के आसपास पहुंच गई हैृ. 

ऐसे में बढ़ती आबादी के लिए घरों की मांग करते हुए दिल्ली में बड़ी तेजी से अवैध और असुरक्षित घर बना दिए गए हैं. एक रिपोर्ट में दिल्ली की 80 फीसद इमारतों को असुरक्षित माना गया है. दिल्ली की 70-80% इमारतें भूकंप का औसत से बड़ा झटका झेल ही नहीं सकती हैं. 

दिल्ली और एनसीआर की यही स्थिति उसे बेहद खतरनाक बना देती है. क्योंकि यहां आबादी का घनत्व बेहद ज्यादा है. अगर कभी भी बड़े रिक्टर स्केल का भूकंप आया तो दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आएगा.