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काले कोट से नहीं साहब, 'वर्दी पहनने से डर लग रहा है'

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट परिसर में पुलिस और वकीलों के बीच हुई भिड़ंत का मामला बढ़ता जा रहा है. किरण बेदी का पोस्टर हाथों में लेकर दिल्ली पुलिस के जवानों ने अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया.

काले कोट से नहीं साहब, 'वर्दी पहनने से डर लग रहा है'

नई दिल्ली: अपने साथी पुलिसकर्मियों की पिटाई से नाराज दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवान पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए. पुलिसकर्मियों ने अपने हाथ में बैनर थाम रखे थे. पुलिसकर्मियों के साथ उनके परिजन भी मौजूद थे. पुलिसकर्मियों का आरोप है कि उनके साथ मारपीट की जा रही है. और उन्हीं के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो रहा है. पुलिस वालों का कहना है कि दिल्ली में उन्हें वर्दी पहनने में डर लग रहा है. उनकी कोई सुनने वाला नहीं है.

पुलिसवालों के प्रदर्शन की वजह

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनके साथ ज्यादती हो रही है, जो बिल्कुल गलत है. जवानों ने कहा कि पुलिसवालों के साथ भी सही तरह से व्यवहार होना चाहिए और कानून के मुताबिक समान रूप से सजा मिलनी चाहिए. पुलिसकर्मियों का आरोप है कि पिछले तीन दिनों से वकील लगातार पुलिस और आम लोगों के खिलाफ गलत बर्ताव कर रहे हैं और सीनियर कुछ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

नाराज पुलिसकर्मियों को शांत कराने के लिए कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उनके बीच आए. लेकिन पुलिसकर्मी मानने को तैयार नहीं थे. पुलिसकर्मियों की नाराजगी को देखते हुए खुद पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को आगे आना पड़ा. पुलिस कमिश्नर ने पुलिसवालों से काम पर लौटने को कहा है. लेकिन पुलिस कमिश्नर की अपील के बाद भी पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन जारी रखा.

हाथों में किरण बेदी का पोस्टर

पुलिसकर्मी सस्पेंड पुलिसकर्मियों की बहाली और दोषी वकीलों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. नाराज पुलिसकर्मियों के हाथ में एक बैनर भी दिखा. जिसमें किरण बेदी की फोटो थी. और उसपर लिखा था, we want strong family boss

गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट

इस बीच तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है. रिपोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बारे में जानकारी दी गई है. पुलिसवालों के खिलाफ लिए गए एक्शन को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को नाटक करार दिया.

इस बीच तीस हजारी कोर्ट में वकीलों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ एक विवादास्पद पोस्टर भी चिपका दिया. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट की घटना के बाद वकीलों का हंगामा सोमवार को भी जारी रहा. साकेत कोर्ट के पास वकीलों ने बाइक से पेट्रोलिंग कर रहे एक पुलिसवाले की पिटाई कर दी.

उस घटना से आक्रोशित वकीलों ने राह चलते लोगों को भी नहीं बख्शा. कड़कड़डूमा कोर्ट के पास एक बाइक सवार वकीलों के प्रदर्शन में फंस गया. जिसके बाद वकीलों ने युवक की डंडे से पिटाई कर दी. युवक को अपनी बाइक छोड़कर वहां से भागना पड़ा.

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क्या है पूरा घटनाक्रम?

दरअसल शनिवार को तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी. कोर्ट में एक वकील Lock Up के सामने अपनी गाड़ी Park कर रहा था. Lock Up के सामने कैदियों को लाने, ले जानी वाली बसें खड़ी होती है. जैसे ही वकील गाड़ी खड़ी करने के बाद उतरा. वहां खड़े पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी हटाने को कहा, लेकिन वकील साहब गाड़ी हटाने को तैयार नहीं हुए. धीरे-धीरे वहां भीड़ जुटने लगी. पुलिसकर्मियों और वकील के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गई. जिसके बाद पुलिस वाले वकील को पकड़ कर Lock Up में ले जाने लगे. घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में वकील जमा हो गए. इस बीच कोर्ट परिसर में दो वकील को गोली लगने की खबरें आग की तरह फैल गई. जिसके बाद वकील बेकाबू हो गये, हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की. जिससे बाद वकीलों ने कैदियों को ले जाने वाली 8 बसों में तोड़फोड़ की. पुलिस की एक Gypsy और 12 मोटरसाइकिलों में भी आग लगा दी. मामला इतना बढ़ गया कि रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद से संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई की और न्यायिक जांच के आदेश दिये. दो ASI को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया और जांच पूरी होने तक दो पुलिस अफसरों के ट्रांसफर के भी आदेश दिये. लेकिन वकीलों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा, इधर पुलिसवालों ने भी सोमवार की घटना से नाराज हैं. क़ानून के जानकार और 'क़ानून के रक्षक आमने - सामने हो गये हैं.

इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकीलों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी वकील हिंसक घटनाओं में शामिल पाया गया. तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. काउंसिल ने हिंसा में शामिल वकीलों के नाम मंगाए हैं. काउंसिल ने कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह मामले से खुद को पूरी तरह अलग कर लेगी. तीस हजारी कोर्ट की घटना के बाद पुलिसकर्मियों को वकील निशाना बना रहे हैं. जिसके खिलाफ पुलिसवालों ने भी मोर्चा खोल दिया है.