एक्सीडेन्ट में टूटी हड्डियां तो शरीर को ही बना लिया कंप्यूटर

अमेरिका की एक महिला के साथ दुर्घटना हो गई. जिसमें उनकी कई हड्डियां टूट गई. लेकिन उन्होंने हार नही मानी और खुद ही चलता फिरता कंप्यूटर बन गईं. अब वह अपने सारे काम आसानी से कर लेती हैं. 

एक्सीडेन्ट में टूटी हड्डियां तो शरीर को ही बना लिया कंप्यूटर

नई दिल्ली: अमेरिका के लिवरपूल में रहने वाली 31 साल की विंटर मेराज को  अब ''बायोनिक वुमन'' के नाम से जाना जाता है. क्योंकि वो अपने आप में चलता फिरता कंप्यूटर हैं. जो अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद सारे काम बिना किसी की मदद लिए निपटा लेती हैं. 

भीषण दुर्घटना में चूर हो गई थी हड्डियां
विंटर मेराज एक कार हादसे में घायल हो गई थीं. जिसके बाद उनकी पीठ टखने और घुटने की हड्डियां चूर चूर हो गई थीं. जान बचाने के लिए उन्हें कई बड़े ऑपरेशनों से गुजरना पड़ा. जिसकी वजह से विंटर कई सालों तक बिस्तर पर रहीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 

शरीर को ही बना लिया कंप्यूटर 
दुर्घटना के बाद विंटर को कई सालों तक दूसरों पर आश्रित होना पड़ा. जिसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि वह आगे की जिंदगी दूसरों पर निर्भर होकर नहीं बिताएंगी. 

इसीलिए उन्होंने प्रत्यारोपण के जरिए अपने शरीर में कई तरह की माइक्रोचिप्स लगवा ली. अब वो बिना किसी और की मदद लिए ईमेल भेज सकती हैं. अपने घर का दरवाजा खोल और बंद कर लेती हैं. 

किसी पर निर्भर नहीं रहती हैं विंटर
विंटर ने अपनी बांहों में LED लाइट्स और उंगलियों में मैग्नेट (चुंबक) लगवा लिया है जिसकी मदद से वो घर और दफ्तर के सभी काम निपटा लेती हैं.

उनके बाएं हाथ में लगी माइक्रोचिप घर का मुख्य दरवाजा खोलने के काम आती है. साथ ही इसी के जरिए वह अपने काम की जगह पर सिक्योरिटी कार्ड का भी इस्तेमाल करती हैं. उनके शरीर में लगे माइक्रोचिप से दफ्तर के स्वचालित दरवाजे खुल जाते हैं और कर्मचारियों की भी पहचान हो जाती है.

विंटर के दाएं हाथ में बिजनेस कार्ड के कंप्यूटराइज्ड वर्जन स्टोर किए गए हैं. जिन्हें वह लोगों के फोन पर भेज सकती हैं. 

उनके दाएं हाथ की चिप में व्यवसाय से जुड़ी हर जानकारी है. स्मार्टफोन के जरिए एक इंस्टैन्ट स्कैन की मदद से काम कर रहे किसी भी व्यक्ति की उन्हें जानकारी मिल जाती है.

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