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अयोध्‍या: स्वामी की पूजा के अधिकार संबंधी याचिका पर सुनवाई की मांग, CJI बोले- कल आइए

सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने कहा कि उनकी याचिका पर पिछले एक साल से सुनवाई नहीं हुई है.

अयोध्‍या: स्वामी की पूजा के अधिकार संबंधी याचिका पर सुनवाई की मांग, CJI बोले- कल आइए

नई दिल्‍ली: बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने अयोध्‍या मामले में पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर दायर अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से की. उन्‍होंने कहा कि उनकी याचिका पर पिछले एक साल से सुनवाई नहीं हुई है. इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई बोले कि राम मंदिर मामले में कल सुनवाई होगी. वह केस कल की सूची में है. आप कल कोर्ट में मौजूद रहें.

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 26 फरवरी को सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की पांच जजों की संविधान पीठ 26 फरवरी को 10:30 बजे मामले की सुनवाई शुरू करेगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठभेजने से इंकार कर दिया था. मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया था. इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला था. टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए.जिस जगह रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए.इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.

अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी थी. इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी. कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे.उसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.