अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीनों मध्यस्थों का इस राज्य से संबंध

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील दशकों पुराने रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का सर्वमान्य समाधान खोजने के लिए शुक्रवार को पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति गठित कर दी.  

अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीनों मध्यस्थों का इस राज्य से संबंध

चेन्नई: अयोध्या विवाद को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए तीन मध्यस्थों के बीच एक साझा बात है कि उन तीनों का नाता तमिलनाडु से है. सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील दशकों पुराने राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का सर्वमान्य समाधान खोजने के लिए शुक्रवार को पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति गठित कर दी. समिति के अन्य सदस्यों में आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और प्रख्यात मध्यस्थ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल हैं. 

कलीफुल्ला शिवगंगा जिले में करैकुडी के रहने वाले हैं जबकि रवि शंकर का जन्म तंजावुर जिले में कुंभकोणम के समीप पापनासम में हुआ था और पांचू का ताल्लुक चेन्नई से है. कलीफुल्ला ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने से पहले तमिलनाडु से अपना कानूनी करियर शुरू किया था. उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई में सुधारों के लिए ऐतिहासिक फैसला दिया था. साल 1975 में वकील बनने के बाद कलीफुल्ला ने कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उपक्रमों, राष्ट्रीयकृत और सूचीबद्ध बैंकों की पैरवी की. वह साल 2000 में मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हुए. वहां 11 साल के कार्यकाल के बाद उन्हें जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया जहां से वह एक साल बाद शीर्ष न्यायालय पहुंचे. साल 2016 में उनके विदाई समारोह में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने ऐतिहासिक फैसले के लिए उनकी प्रशंसा की थी.

जस्टिस ठाकुर ने कहा था, "बीसीसीआई मामले पर फैसला देते हुए मुझे लगा कि मैं एक पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान के साथ बैठा हूं. कलीफुल्ला की समझ इस स्तर तक बेहतर थी. उन्हें बीसीसीआई के कामकाज की काफी समझ थी. मेरी तथा खेल की मदद करने में मैं दिल से उनका आभारी हूं." 

कलीफुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को हल करने के लिए हर कदम 'मैत्रीपूर्ण ढंग से' उठाएगी. मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता पांचू मध्यस्थता अभियान में अहम पथप्रदर्शक हैं. न्यायालय से जुड़े देश के पहले मध्यस्थता केंद्र द मेडिएशन चैम्बर्स के संस्थापक पांचू ने मध्यस्थता पर कई किताबें लिखी हैं. पांचू ने असम और नगालैंड के बीच सीमा विवाद समेत कई मामलों में मध्यस्थता की है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यस्थ नियुक्त किए जाने पर पांचू ने कहा, "माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुझे बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगा." 

श्री श्री रविशंकर के बेंगलुरू स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अनुसार, उनका जन्म पापनासम में विसालक्षी रतनम और आर एस वेंकट के घर हुआ. हालांकि वह अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में बेंगलुरू आए गए और उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज से विज्ञान विषय में स्नातक किया. आध्यात्मिक गुरू कुछ समय से इस विवाद में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं. समिति में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि हर किसी को लंबे झगड़े को सुलझाने के लिए एक साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने ट्वीट किया, "हर किसी का आदर करते हुए, सपनों को साकार करने, लंबे समय से चल रहे विवादों को खुशी से हल करने और समाज में सौहार्द्रता बनाए रखने के लिए हम सभी को इन लक्ष्यों की ओर एक साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए."