क्या आप भी घर के बुजुर्गों को दुत्कारते हैं? तो अब जेल में चक्की पीसने को रहें तैयार

घर के बुजुर्ग का अपमान करने पर 3 से 6 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है.

क्या आप भी घर के बुजुर्गों को दुत्कारते हैं? तो अब जेल में चक्की पीसने को रहें तैयार
बदलते दौर में परिवार में बुजुर्गों के हालात खराब होते जा रहे हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण के लिए केंद्र सरकार बिल लाई है. इसमें रिश्तों की परिभाषा तय कर दी है. ये रिश्ते माता-पिता और बुजुर्गों की देखभाल के लिए जिम्मेदार होंगे. सामाजिक अधिकारिता और न्याय मंत्री थावरचंद गेहलोत ने सदन में यह विधेयक पेश किया है.

विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई बेटा-बेटी, दामाद-बहू, दत्तक या जैविक पुत्र-पुत्री अपने माता-पिता या घर के बुजुर्ग का अपमान करते हैं या उन्हें छोड़ देते हैं या उनसे अपशब्द कहते हैं या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं तो उन्हें 3 से लेकर 6 महीने तक की जेल की सजा या 10,000 रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकता है.

ध्यान देने वाली बात है कि दामाद और बहू को भी इसमें लाया गया है. इसका मतलब यह है कि अगर घर में सास-ससुर हों तो उनको भी सम्मान देना होगा. दामाद या बहु को भी बेटा-बेटी माना है.

माता-पिता और घर के बुजुर्गों के लिए उनकी देखभाल और भरण-पोषण या मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उन्हीं रिश्तों की रहेगी. मेंटेनेंस का मतलब है- खाना, कपड़े, हाउसिंग, सुरक्षा, दवाई समेत उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य यह सारी चीज मेंटेनेंस के अंतर्गत आएंगे.

अभिभावक की परिभाषा में माता-पिता के अलावा सास-ससुर, दादा-दादी, नाना-नानी यह लोग भी आएंगे चाहे वह सीनियर सिटीजन हो या ना हो. अगर बुजुर्ग का कोई बेटा-बेटी ना हो तो उसके भरण-पोषण देखभाल की जिम्मेदारी उसके रिश्तेदार पर होगी. अगर प्रॉपर्टी ज्यादा लोगों में बंट रही है तो उन सभी लोगों को बुजुर्ग के प्रति एक साथ मिलकर जिम्मेदारी होगी.

बुजुर्ग मेंटेनेंस नहीं मिलने की स्थिति में ट्रिब्यूनल जा सकते हैं. अगर वह खुद यह काम नहीं करना चाहें तो किसी प्रतिनिधि के द्वारा यह काम करवा सकते हैं.

गुजारा भत्ता के लिए जो 10000 के लिए लिमिट थी उसे बढ़ाने के लिए ट्रिब्यूनल आदेश दे सकता है, यानी 10000 की अधिकतम लिमिट खत्म हो गई है.

इस तरह के मामलों में ट्रिब्यूनल 3 महीने के अंदर मामले को खत्म करेगा. 80 साल के ऊपर के बुजुर्गों के लिए 2 महीने के भीतर ही मामला खत्म किया जाएगा. सरकार या संस्था बुजुर्गों के लिए डे केयर होम खोलेगी जो कि मल्टीसर्विस होगा.

राज्य सरकारें बुजुर्गों के लिए व्यापक प्लान बनाएंगी. इस प्लान के तहत बुजुर्गों की संपत्ति प्रॉपर्टी के संरक्षण की जिम्मेदारी होगी. सीनियर सिटीजन 60 साल के ऊपर ही माना जाएगा. हर एक राज्य में हेल्पलाइन खुलेंगे. स्पेशल पुलिस यूनिट रहेंगी जो सीनियर सिटीजन के लिए काम करेंगी.

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