6 साल बाद कोर्ट ने माना विदेशी महिला से हुआ था 'डिजिटल रेप', जानिए क्या है मामला

अदालत ने एक अमेरिकी नागरिक के डिजिटल बलात्कार के मामले में एक शख्स को दोषी करार दिया है. 

6 साल बाद कोर्ट ने माना विदेशी महिला से हुआ था 'डिजिटल रेप', जानिए क्या है मामला
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने एक अमेरिकी नागरिक के डिजिटल बलात्कार के मामले में एक शख्स को दोषी करार दिया है. अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान को अविश्वसनीय नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह इस मामले में गवाही देने के लिए अमेरिका से यहां आई थी. जब कोई अपनी ऊंगली या ऊंगलियों से किसी का बलात्कार करता है तो उसे डिजिटल बलात्कार कहा जाता है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश इला रावत ने कहा कि महिला का भारत में कोई हित नहीं रह गया था, क्योंकि बलात्कार की घटना के बाद उसकी शादी टूट गई थी.

उन्होंने कहा कि कुछ विसंगतियों के बावजूद महिला के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता. शिकायत के मुताबिक, 24 जून 2013 की तड़के अमेरिका और रूस के दो विदेशी नागरिकों का उनके मकान मालिक के बेटे ने यौन उत्पीड़न किया था. यह घटना उस वक्त हुई जब वे अपने कमरे में सो रहे थे.

अमेरिकी नागरिक के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. आरोपी ने दावा किया था कि महिला के पति और उसके बीच विवाद था और इसी वजह से यह केस दर्ज किया गया. अदालत ने कहा कि पुलिस रूसी नागरिक से जुड़े दूसरे केस में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत आरोप साबित करने में नाकाम रही, क्योंकि वह अदालत में गवाही के लिए रूसी नागरिक को पेश नहीं कर सकी.

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मेरी राय में शिकायतकर्ता (महिला) और अभियोजन की तरफ से अपने बयान दर्ज कराने वाले अन्य गवाहों की गवाही के आधार पर यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि आरोपी 24 जून 2013 को तड़के 4:00 से 4:30 बजे के बीच उस कमरे में दाखिल हुआ था जिसमें शिकायतकर्ता अपने पति के साथ सो रही थी और फिर आरोपी ने उसकी योनि में अपनी ऊंगली डाली.’’

फैसले में अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी का उक्त कृत्य आईपीसी की धारा 375 में बलात्कार की संशोधित परिभाषा के दायरे में आएगा और बलात्कार माना जाएगा.’’ यह धारा तीन फरवरी 2013 को प्रभावी हुई. अदालत ने कहा कि इसे देखते हुए आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के ततह बलात्कार या डिजिटल बलात्कार का दोषी करार दिया जाता है. अदालत ने आरोपी की यह दलील नहीं मानी कि चूंकि फॉरेंसिक नतीजा नकारात्मक है, इसलिए साबित होता है कि वह दोषी नहीं है .