उन्नाव रेप व अपहरण मामला: कुलदीप सिंह सेंगर को आज सुनाई जा सकती है सजा
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उन्नाव रेप व अपहरण मामला: कुलदीप सिंह सेंगर को आज सुनाई जा सकती है सजा

पिछली सुनवाई में सीबीआई ने कहा था कि जिन धाराओं के तहत कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को दोषी करार दिया गया है, उसमें कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है. ऐसे सेंगर को कड़ी से कड़ी सजा दी जाने की जरूरत है, जिससे की समाज में कड़ा संदेश जा सके.

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ दायर केस में निचली अदालत सुना सकती है सजा.

नई दिल्ली: उन्नाव रेप और अपहरण मामले (Unnao rape case) में दोषी करार दिए गए कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के खिलाफ सजा का ऐलान शुक्रवार (20 दिसंबर) को हो सकता है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में सजा पर बहस शुक्रवार को होगी. दरअसल, पिछली सुनवाई में सीबीआई ने कहा था कि जिन धाराओं के तहत कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को दोषी करार दिया गया है, उसमें कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है. ऐसे सेंगर को कड़ी से कड़ी सजा दी जाने की जरूरत है, जिससे की समाज में कड़ा संदेश जा सके.

वहीं कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के वकील की दलील थी कि कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को इन धाराओं में जो न्यूनतम सजा दी जाए, क्योंकि जेल में उनका आचरण काफी अच्छा रहा है. इतना ही नहीं पिछले 31 साल से वह सार्वजनिक जीवन में हैं और कभी उसके ऊपर किसी तरह का आरोप नहीं लगा. यहां तक कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) ने कई विकास के काम करवाएं और अपने इलाके का निरंतर विकास किया है. 

पीड़िता के वकील ने पीड़िता के लिए उचित मुआवजा देने की मांग भी की थी, जिसका सेंगर के वकील ने विरोध किया था. इसके बाद अदालत ने कहा था कि मामले में कितना उचित मुआवजा हो सकता है यह दोनों पक्षों की आर्थिक हालात को देखते हुए तय किया जा सकता है. लिहाजा, पीड़िता के आर्थिक हालात कैसे हैं इस बारे में पीड़िता के वकील से जानकारी मांगी गई थी. वहीं सेंगर के आर्थिक हालात कैसी हैं, इस बारे में सेंगर के वकील शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में कोर्ट को जानकारी देंगे.

आपको बता दें कि कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को रेप (IPC की धारा 376) और पोस्को एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मौजूद केस में वह सारी मजबूरियां और लाचारियां हैं जो दूरदराज में रहने वाली ग्रामीण महिलाओं के सामने अक्सर आती हैं. इन सब से जूझकर लड़कियां और महिलाएं अपना जीवन डर और शर्म से अपना नारकीय जीवन काटती हैं. कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार से इस जांच मैं पुरुषवादी सोच हावी रही है और इसी वजह से लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा और शोषण में जांच के दौरान संवेदनशीलता और मानवीय नजरिये का अभाव दिखता है.

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