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लोजपा में फूट पर बोले रामविलास पासवान, 'अच्छी बात है, उन्हें जाने दीजिये'

लोजपा अध्यक्ष और केन्द्रीय खाद्य एंव उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने पार्टी में फूट पर कहा कि 'उन्हें जाने दीजिए.' 

लोजपा में फूट पर बोले रामविलास पासवान, 'अच्छी बात है, उन्हें जाने दीजिये'
लोजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 में छह सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे और सभी सीटों पर जीत हासिल की.

पटना: लोजपा के दो महासचिव सत्यानंद शर्मा और अनिल कुमार पासवान, कोषाध्यक्ष रमेशचंद्र कपूर के नेतृत्व में विद्रोह कर रहे इन नेताओं ने गुरुवार को लोजपा (सेक्युलर) बनाने का ऐलान कर दिया था. इन लोगों का आरोप है कि लोजपा ने अमीर और बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए और पार्टी पर कब्जा बनाए रखने वाले परिवार के हितों को बढ़ाने तक सीमित कर लिया है.  असंतुष्ट नेताओं ने आरोप लगाया कि नेतृत्व ने पार्टी को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' में तब्दील कर दिया है. बागी नेताओं ने पासवान पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए. अब इस मामले पर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने प्रतिक्रिया दी है.

लोजपा अध्यक्ष और केन्द्रीय खाद्य एंव उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अच्छी बात है, उन्हें जाने दीजिए." उन्होंने अलग हुए गुट के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि लोजपा के भीतर भ्रष्टाचार व्याप्त है. पासवान ने कहा कि पार्टी ने चुनाव में शर्मा के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ किया, लेकिन वह जीत नहीं सके. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैं सभी के प्रति बहुत सम्मान रखता हूं. वह (शर्मा) दो बार हारे. पिछली बार मेरी पार्टी के सभी लोगों ने मुझसे किसी और को टिकट देने के लिए कहा था." 

उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा कि वह गरीब व्यक्ति हैं, उन्हें चुनाव लड़ने दीजिए और हम देखेंगे. हमने अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किया, लेकिन वह हार गए. अब वह चले गए हैं, यह अच्छी बात है. उन्हें जाने दीजिये." पासवान ने कहा कि वह पहली बार भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सुन रहे हैं. उन्होंने कहा, आप मेरी पासबुक और बैंक बैलेंस देख लीजिये. मेरे पास कुछ नहीं है. मेरे पास दिल्ली या पटना में घर नहीं है." 

गौरतलब है कि लोजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 में छह सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे और सभी सीटों पर जीत हासिल की. रामविलास पासवान के परिवार के लोग ही चुनाव लड़ रहे थे. पासवान ने अपने परंपरागत सीट हाजीपुर से भी अपने भाई को टिकट दिया था. जबकि जमुई सीट पर बेटे चिराग पासवान को टिकट दिया गया.  इससे पार्टी नेताओं में असंतोष देखने को मिला था. चुनाव बाद पार्टी में फूट पड़ गई.