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चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका

बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दाखिल की गई है. 

चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका
वकील शिव कुमार त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

नई दिल्ली/पटना: बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दाखिल की गई है. वकील शिव कुमार त्रिपाठी ने याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि एक मेडिकल एक्सपर्ट की टीम का गठन किया जाए जो चमकी बुखार फैलने के पीछे की वजह की जांचकर तीन महीनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सोंपे. 

मेडिकल एक्सपर्ट की टीम इस बात की भी जांच करे कि आखिरी किसकी लापरवाही से 100 से ज्यादा बच्चों की जान गई. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और बिहार सरकार को आदेश दे कि चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को तत्काल हर संभव मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए. चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों का उपचार मुफ्त कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और बिहार सरकार को आदेश दे कि चमकी बुखार से प्रभावित जगहों पर तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम और दवाइयां पहुंचाई जाए.

पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
बिहार में ‘एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) से अब तक 117 बच्चों की मौत के बीच इस बीमारी को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने के लिए बिहार सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग को लेकर बुधवार को पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई. मुजफ्फरपुर जिला निवासी और अधिवक्ता सुधीर ओझा ने उक्त याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य और बाल कल्याण विभागों के प्रधान सचिवों और अधिकारियों के अलावा मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को उत्तरदाता के रूप में शामिल किया है.

याचिकाकर्ता ने ‘चमकी बुखार’ की रोकथाम में अपने कर्तव्य के निर्वहन में शिथिलता के दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने के लिए प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश देने का भी अनुरोध किया है. उन्होंने अदालत से "बीमारी को रोकने के लिए विशेष चिकित्सा दल गठित किए जाने के साथ इसके मूल कारण का पता लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया है."