ZEE जानकारी: CAA पर मुहिम, बुद्धिजीवियों ने किया जनमत की ताकत का समर्थन

ज़ी न्यूज़ की इस मुहिम को पूरे देश से समर्थन मिल रहा है.

ZEE जानकारी: CAA पर मुहिम, बुद्धिजीवियों ने किया जनमत की ताकत का समर्थन

ज़ी न्यूज़ की इस मुहिम को पूरे देश से समर्थन मिल रहा है. आम लोग ही नहीं देश के तमाम बुद्धीजीवी जनमत की इस ताकत का समर्थन कर रहे हैं. आज हमने कुछ पूर्व जजों, कुलपतियों, अध्यापकों, इतिहासकारों से इस बारे में बात की. आपको भी इनकी बातें सुननी चाहिए क्योंकि इनमें से भी कई लोगों ने Missed Call देकर अपनी राय दर्ज कराई है.

Zee News के नंबरों पर Call करके जिन लोगों ने अपनी राय दर्ज कराई है. वो किसी ना किसी परिवार के सदस्य ज़रूर होंगे और अगर हम ये मान लें कि एक परिवार में औसतन चार से पांच सदस्य भी होते हैं तो आप इसे 4 से 5 करोड़ भारतीयों की राय मान सकते हैं. देश विरोधी गैंग को ये जानकर बहुत दुख होगा दुनिया के 193 देशों की जनसंख्या 5 करोड़ से कम है. हमें अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग Call कर चुके हैं. लेकिन सच ये है कि भारत के कई करोड़ लोगों के पास अभी भी ये नंबर्स नहीं पहुंच पाए होंगे. कई लोग Zee News देख नहीं पा रहे होंगे तो देश के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बार बार बंद की जा रही है. यानी अगर हालात सामान्य होते तो In Missed Calls की संख्या और भी ज्यादा होती.

हमारे देश में औसतन 10 में से 6 लोग ही अपने मत-अधिकार का इस्तेमाल करते हैं. यानी अपने मत की ताकत का इस्तेमाल ना करना करीब 40 प्रतिशत भारतीयों की आदत में शुमार है, इसलिए आप मानकर चलिए कि बहुत सारे ऐसे लोग जो नए नागरिकता कानून के समर्थन में हैं अब भी हमें Missed Call नहीं दे रहे होंगे. और अगर ये लोग भी हमारे अभियान के साथ जुड़ गए तो फिर टुकड़े टुकड़े गैंग के पास कोई तर्क नहीं बचेगा. जनता के मत की ताकत क्या होती है. इसे राजनेताओं से बेहतर कौन समझ सकता है, इसलिए आज हमने देश के राजनेताओं से भी इस बारे में बात की और Zee News को मिले एक करोड़ लोगों के समर्थन की बात सुनकर राजनेताओं ने क्या प्रतिक्रिया दी.

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जनमत संग्रह जनता की राय जानने के लिए किया जाता है. भारत के लोगों की राय जानने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं या फिर International Agencies की ज़रूरत नहीं है. हालांकि हमारे ही देश के कुछ लोगों को लगता है. नए कानून पर United Nations द्वारा जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए. लेकिन आज हमने इन लोगों का ये भ्रम भी तोड़ दिया है. एक करोड़ लोगों ने बिना किसी दबाव के अपनी राय ज़ाहिर की है और ये दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल जनमत संग्रह है.

भारत के हर फैसले पर United Nations को बीच में लाने की पैरवी करने वालों को आज ये भी जान लेना चाहिए कि एक करोड़ लोगों की राय को खारिज करना संयुक्त राष्ट्र के लिए भी आसान नहीं है.
 
2016 में ब्रिटेन को यूरोप से अलग करने के पक्ष में एक करोड़ 74 लाख लोगो ने वोट डाला था. इसे Brexit के नाम से जाता है. अब आप सोचिए कि अगर एक करोड़ 74 लाख लोग अपने देश को यूरोप से अलग करने का फैसला ले सकते हैं तो फिर भारत के 1 करोड़ शांति-पसंद लोग नए कानून पर अपनी बात क्यों नहीं कह सकते.

भारत में कई बार लोकप्रियता का पैमाना इस बात से तय होता है कि Twitter जैसे सोशल मीडिया Platform पर किसी नेता या सेलिब्रिटी के कितने फॉलोवर्स हैं. अगर हमारी मुहिम का कोई Twitter Account होता...तो लोकप्रियता के पैमाने पर ये एक करोड़ लोग कई बड़ी हस्तियों को पीछे छोड़ चुके होते. टुकड़े टुकड़े गैंग को ये जानकर अफसोस होगा कि Twitter पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को Follow करने वालों की संख्या भी अभी सिर्फ 1 करोड़ 8 लाख है. यानी Zee News की ये मुहिम लोकप्रयिता के मामले में टुकड़े टुकड़े गैंग के मार्ग दर्शक..पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को भी पीछे छोड़ने वाली है.

हमारे इस अभियान को सिर्फ देश के आम लोगों का ही नहीं बल्कि Celebreties का समर्थन भी हासिल हुआ है. इसलिए आज हमने ऐसी कुछ हस्तियों से भी बात की है जो नए नागरिकता कानून पर Zee News के जनमत संग्रह का स्वागत कर रहे हैं.