आत्मा को साथ ले जाने किया टोटका, बच्चों के इलाज के लिए गर्म सलाखों से जलाते हैं यहां
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आत्मा को साथ ले जाने किया टोटका, बच्चों के इलाज के लिए गर्म सलाखों से जलाते हैं यहां

यहां शहर के आसपास के इलाकों में नवजात बच्चों को गर्म सलाखों से जलाया जाता है. उनकी मान्यता है कि ऐसा बच्चों के इलाज के लिए करते हैं.

रतलाम जिला अस्पताल के बाहर पूजा करते मृतक के परिजन

चंद्रशेखर सोलंकी/रतलामः रतलाम शहर में इंसान को मौत के बाद भी शांति नहीं है. जिला अस्पताल से अंधविश्वास के चलते टोने-टोटके की तस्वीर सामने आई है. सरकारी हॉस्पिटल में रविवार सुबह एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. परिजन व्यक्ति की मौत के बाद उसकी आत्मा को अपने साथ ले जाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने टोने-टोटके का सहारा लिया. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो बीते रविवार का बताया गया है. 

आत्मा ले जाने के लिए की पूजा
रतलाम जिला अस्पताल में रविवार सुबह एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजन मृतक के शव को तो अपने साथ ले ही गए. मृतक की आत्मा को भी अपने साथ ले जाने के लिए उन्होंने अस्पताल के बाहर पूजा की. वीडियो में पांच लोग देखे जा रहे हैं, जो मृतक के परिजन है. उन्हें लगा मौत के बाद आत्मा हॉस्पिटल में ही भटकती रहेगी. इसे अपने साथ घर ले जाना पड़ेगा. इसलिए उन्होंने टोने-टोटके की मदद से आत्मा को ले जाने के लिए पूजा की.  

बच्चों को गर्म सलाखों से जलाते हैं
बता दें कि रतलाम अस्पताल से सामने आया ये कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी ग्रामीण इलाकों से इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं. यहां आसपास के जनजाति क्षेत्रों में नवजात बच्चों को इलाज के लिए गर्म सलाखों से जलाया जाता है. उनका मानना है कि इससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं. बच्चों की हालत गंभीर होने से कई बार उनकी मौत भी हो जाती है. इन सब के बावजूद इलाकों में अंधविश्वास कायम है. 

डॉक्टर बोले जागरूकता की आवश्यकता
रतलाम जिला अस्पताल में MCH (मातृ एवं शिशु रोग यूनिट) के डॉ. नावेद कुरेशी से इस बारे में बात की गई. उन्होंने बताया इस तरह के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं. बच्चों को गर्म सलाखों से जलाने के पीछे ग्रामीण कहते हैं कि ऐसा करने से बच्चा स्वस्थ हो जाएगा. लेकिन कई बार इसके विपरीत परिस्थितियां देखने को मिलती है. यहां तक कि मृत व्यक्ति की आत्मा को घर ले जाने के लिए टोना-टोटका किया जाता है.

डॉ. कुरेशी का कहना है ग्रामीणों में कई सालों से इस तरह का अंधविश्वास फैला हुआ है. इससे बचने के लिए ग्रामीणों में जागरूकता लाने की जरूरत है. 

 

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