निर्भया केस: दोषी पवन कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की याचिका, कहा-घटना के वक्त नाबालिग था

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले के गुनाहगार पवन कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर दावा किया है कि दिसंबर 2012 में घटना के वक्त वह नाबलिग था. जांच अधिकारी की ओर से उम्र की जांच के लिए मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया था, उसे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट कर तहत संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए.

निर्भया केस: दोषी पवन कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की याचिका, कहा-घटना के वक्त नाबालिग था
फांसी से बचने के लिए दोषी पवन कुमार ने की एक और कोशिश.

नई दिल्ली: निर्भया सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले के गुनाहगार पवन कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर दावा किया है कि दिसंबर 2012 में घटना के वक्त वह नाबलिग था. जांच अधिकारी की ओर से उम्र की जांच के लिए मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया था, उसे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट कर तहत संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट गुरुवार (19 दिसंबर) को सुनवाई करेगा.

निर्भया मामले में अगली सुनवाई 7 जनवरी को
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता की मां से कहा, 'हम जानते हैं कि किसी की मृत्यु हुई है, लेकिन उन्हें (दोषियों को) कुछ कानूनी अधिकार हैं.' अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने सात जनवरी के लिए मामले को स्थगित कर दिया. उन्होंने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दोषियों को नए सिरे से नोटिस जारी कर उनके कानूनी उपायों का उपयोग करने का समय प्रदान करें.

सुनवाई की लंबी तारीख दिए जाने के बाद पीड़िता की मां आशा देवी निराश हो गईं. न्यायाधीश ने आशा से कहा, 'मुझे आपके साथ पूरी सहानुभूति है. मैं जानता हूं कि किसी की मृत्यु हो गई है, लेकिन उनके अधिकार भी हैं. हम यहां आपकी बात सुनने के लिए हैं, लेकिन कानून से भी बंधे हैं.' सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ मौत के वारंट जारी करने के लिए एक आवेदन दायर किया.

इससे पहले दिन में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी अक्षय कुमार सिंह द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति आर. भानुमति की शीर्ष अदालत की एक खंडपीठ ने पुनर्विचार याचिका को योग्यता के आधार पर खारिज कर दिया.

निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की समीक्षा याचिका खारिज की
इससे पहले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले में मृत्युदंड की सजा पाए चार में से एक दोषी अक्षय की समीक्षा याचिका बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी. न्यायमूर्ति आर. भानुमति की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अक्षय की समीक्षा याचिका अन्य दोषियों की याचिकाओं के समान थी, जिन्हें शीर्ष अदालत 2018 में ही रद्द कर चुकी है. कोर्ट ने कहा, 'सजा की समीक्षा में हमें कोई आधार नहीं दिखा.'

न्यायमूर्ति भानुमति ने कहा कि पीठ ने उस तर्क पर उचित विचार किया, जिसमें यायिकाकर्ताओं ने सबूत इकट्ठे करने की मांग की थी, और इसकी अनुमति नहीं दी गई. कोर्ट ने कहा, 'इन तर्को पर पहले विचार किया जा चुका है. इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. इन सभी पर ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचार हो चुका है.'

न्यायमूर्ति भानुमति ने कहा कि कोर्ट ने समीक्षा के लिए नियत नियमों के मापदंडों के अंतर्गत मामले की समीक्षा की और वह अब मामले पर दोबारा सुनवाई नहीं कर रही है. अन्य तीन दोषियों की याचिकाओं को खारिज करने का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा, 'उसके (दोषी) द्वारा जांच में कमियों और तर्को को पहले खारिज किया जा चुका है.'

अक्षय के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनका मुवक्किल राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करना चाहता है. उन्होंने इसके लिए तीन सप्ताह का समय मांगा. केंद्र सरकार के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इसके लिए नियत समय सिर्फ एक सप्ताह है. शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका के लिए समयसीमा पर आदेश देने से इंकार कर दिया. कोर्ट ने कहा, 'इस संबंध में हम अपने विचार नहीं बता रहे हैं, और दोषी कानून के अनुसार दिए गए समय के भीतर दया याचिका दायर कर सकते हैं.'

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