‘भारत रत्न’ को स्वीकार करने के लिए कोई न्योता ही नहीं भेजा गया : तेज हजारिका

उन्होंने लिखा, ‘‘कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं अपने पिता के लिए ‘भारत रत्न’ स्वीकार करूंगा कि नहीं. मैं यहां आधिकारिक तौर पर जवाब दे रहा हूं कि मुझे अब तक कोई आमंत्रण ही नहीं मिला

‘भारत रत्न’ को स्वीकार करने के लिए कोई न्योता ही नहीं भेजा गया : तेज हजारिका
सौमेर ने कहा, ‘‘तेज ने आज अपने फेसबुक पोस्ट के मुद्दे पर मुझसे संपर्क नहीं किया है. (फाइल फोटो)

गुवाहाटीः नागरिकता संशोधन विधेयक के मुद्दे पर दिवंगत असमिया गायक-संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने कहा है कि केन्द्र की भाजपा सरकार की नीति से उनके पिता का घोषित रुख कमजोर होगा. अमेरिका में रहने वाले तेज ने कहा कि उन्हें अपने पिता को दिए गए ‘भारत रत्न’ को स्वीकार करने के लिए कोई न्योता ही नहीं भेजा गया है तो अस्वीकार करने जैसी कोई बात ही नहीं है. पिछले महीने नरेंद्र मोदी सरकार ने भूपेन हजारिका को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा की थी.

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किसी राजनीतिक पार्टी का नाम लिए बगैर तेज ने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘मेरा मानना है कि मेरे पिता के नाम और शब्दों का इस्तेमाल कर सार्वजनिक प्रशंसा बटोरी जा रही है जबकि नागरिकता को लेकर दर्दनाक तरीके से अलोकप्रिय विधेयक पारित करने की योजनाएं हैं, जिससे असल में उनका (हजारिका का) घोषित रुख कमजोर पड़ रहा है. भूपेन दा दिल से जिन चीजों पर यकीन करते थे, यह उसके ठीक उलट होगा.’’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में जिस तरह कदम बढ़ा रही है, उससे ऐसी राष्ट्रीय मान्यता देने की अहमियत कम होती है. 

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तेज ने कहा, ‘‘अपने मुरीदों, जिनमें बहुत बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के लोग शामिल हैं, और भारत की जनजातीय आबादी सहित भारत की विशाल विविधता की खातिर उन्होंने उस चीज का समर्थन कभी नहीं किया होता, जो स्पष्ट तौर पर बहुसंख्यक की इच्छा और लाभ के खिलाफ जबरन एक कानून थोपने का ऐसा प्रयास लगता है जो घोर असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और अभारतीय है.’’ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक जल्द से जल्द पारित कराना चाह रही है. इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान किए जाने का प्रावधान है. 

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संसद के शीतकालीन सत्र में बीते आठ जनवरी को लोकसभा में यह विधेयक पारित हो चुका है और अभी राज्यसभा में लंबित है. इस विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. कई संगठनों और पार्टियों का दावा है कि इस विधेयक के पारित होने से क्षेत्र की जनांकिकी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. तेज ने कहा, ‘‘जिस तरीके से अभी कोशिश की जा रही है, उस तरह से अभी या भविष्य में इस विधेयक के किसी भी रूप को स्वीकार करने से क्षेत्र में जीवन की गुणवत्ता, भाषा, पहचान और शक्ति संतुलन प्रभावित करने का न केवल दुखद और अवांछित असर होगा बल्कि धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक भारतीय गणराज्य के सद्भाव, आंतरिक अखंडता और एकता को करारा झटका देना मेरे पिता के रुख को भी कमजोर करेगा.’’ 

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उन्होंने लिखा, ‘‘कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं अपने पिता के लिए ‘भारत रत्न’ स्वीकार करूंगा कि नहीं. मैं यहां आधिकारिक तौर पर जवाब दे रहा हूं कि (अ) मुझे अब तक कोई आमंत्रण ही नहीं मिला तो अस्वीकार करने के लिए कुछ है नहीं. (ब) केंद्र इस मामले में जिस तरह कदम बढ़ा रहा है, उससे ऐसी राष्ट्रीय मान्यता देने की अहमियत कम होती है.’ तेज ने कहा, ‘‘भारत रत्न और लंबे-लंबे पुल जरूरी तो हैं, लेकिन इनसे भारत के नागरिकों की शांति एवं समद्धि को बढ़ावा नहीं मिलने वाला. सिर्फ लोकप्रिय कानून और नेतृत्व की दूरदर्शिता ही ऐसा कर सकेगी.’’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में देश के सबसे लंबे रेल रोड पुल - बोगीबील पुल - का हाल में उद्घाटन किया था. 

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तेज से संपर्क करने की पीटीआई की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं. इस बीच, भूपेन हजारिका के भाई एवं जानेमाने गायक सौमेर हजारिका और उनके छोटे भाई जयंत हजारिका की पत्नी मनीषा हजारिका ने मीडिया को बताया कि परिवार ने न तो ‘भारत रत्न’ खारिज किया है और न ही मरणोपरांत सम्मान देने के लिए केंद्र की आलोचना की है. सौमेर ने कहा, ‘‘तेज ने आज अपने फेसबुक पोस्ट के मुद्दे पर मुझसे संपर्क नहीं किया है. भूपेनदा के परिवार के तौर पर हमने उन्हें दिए गए भारत रत्न अवॉर्ड का स्वागत किया है.