close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान, कड़ी कार्रवाई की मांग

हर साल निजी स्कूलों की जांच के बाद रिपोर्ट शिक्षा विभाग तक पहुंचती है. लेकिन आज तक किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के प्रदेश भर के अभिभावक परेशान है.

राजस्थान: निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान, कड़ी कार्रवाई की मांग
मानमानी के बावजूद आज तक स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है.

जयपुर: प्रदेश में पिछले 5 सालों की अगर बात की जाए तो निजी स्कूलों की मनमानी सरकारी आदेशों से भी ऊपर हो चुकी है. हर साल निजी स्कूल फीस में भारी वृद्धि करती है और इसकी शिकायतें सरकार तक पहुंचती है. लेकिन ये शिकायतें सिर्फ कागजों में ही दफन होकर रह जाती है. अब दिल्ली सरकार ने एक फैसला कर ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसके तहत निजी स्कूलों पर लगाम लगाते हुए बढ़ी हुई फीस वापस करने के आदेश तो दिए हैं. साथ ही नियमों के आधार पर फीस वृद्धि करने के भी आदेश लागू कर दिया है. जिसके बाद अब प्रदेश में भी दिल्ली सरकार जैसे फैसले लेने की मांग उठने लगी है.

दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों जांच में एक स्कूल को दोषी पाया और उसके बाद उस स्कूल को करीब 3 करोड़ रुपये की राशि वापस अभिभावकों को लौटाने के आदेश दिया. उस आदेश के बाद अब राजस्थान में भी सरकार द्वारा इसी प्रकार के कड़े फैसले लेने की मांग उठने लगी है. राजस्थान में पिछले 5 सालों से लगातार फीस वृद्धि सहित अन्य मदों में बढ़ाई गई राशि को कम करने साथ ही स्कूलों पर लगाम लगाने की मांग उठती रही है. हर साल निजी स्कूलों की जांच के बाद रिपोर्ट शिक्षा विभाग तक पहुंचती है. लेकिन आज तक किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के प्रदेश भर के अभिभावक परेशान है.

अभिभावक शेर सिंह का कहना है कि हर साल सैंकड़ों स्कूलों की शिकायत शिक्षा विभाग के पास पहुंचती है. हर साल शिक्षा विभाग इन शिकायतों की जांच के लिए कमेटियों का भी गठन होता है. ये कमेटियां अपनी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप भी देती है. लेकिन उसके बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. ऐसे में प्रदेश की निजी स्कूलों के हौसले बुलंद हो रहे हैं. 

वहीं अभिभावक दिलीप सिंह का कहना है कि दिल्ली सरकार ने एक आदर्श उदाहरण पेश किया है, लेकिन उसके बाद भी राजस्थान सरकार इससे कुछ सीख नहीं ले रहा है. शिक्षा विभाग के अधिकारी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात करता है. वहीं शिक्षा मंत्री हर बार अभिभावकों को राहत की कोरा आश्वासन ही देते हैं. अगर राजस्थान में सरकार किसी एक स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करता है तो सभी निजी स्कूलों पर लगाम लग सकती है.

अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी समस्या है की अपनी आमदनी की एक बड़ी राशि स्कूलों की फीस में भरनी पड़ रही है. अगर पिछले 5 सालों की बात की जाए तो निजी स्कूलों की फीड डबल से भी ज्यादा बढ़ चुकी है. अभिभावक दीपक जैन का कहना है कि पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री कार्यालय में एक शिकायत की गई थी. जिसके बाद पीएमओ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई करने को लेकर पत्र लिखा था, लेकिन 14 महीनों का समय बीत जाने के बाद भी आज तक स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. ऐसे में निजी स्कूलों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं.

बहरहाल, दिल्ली सरकार ने अभिभावकों के हित में फैसला लिया और ये पूरे देश में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन राजस्थान के सैंकड़ों अभिभावकों को आज भी इस तरह के फैसला का इंतजार है, जो निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगा सके.