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Rajasthan News: राज्य के जल जीवन मिशन में पैसों की तंगी के चलते छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स बंद हो गए है. पीएचईडी में करीब 85 प्रतिशत मेजर प्रोजेक्ट्स के बंद होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें 5 हजार करोड़ के प्रमुख प्रोजेक्ट्स ठप हो गए. PHED की एक रिपोर्ट के मुताबिक 9,341 करोड़ के पेमेंट अटके हुए है, जिस कारण अधिकतर कॉन्ट्रेक्टर्स ने काम पर ब्रेक लगा दिया है, लेकिन प्रमुख सचिव भास्कर ए सावंत ने धीमी गति से काम करने वाले कॉन्ट्रेक्टर्स पर कार्रवाई निर्देश दिए है. लेकिन दूसरी तरफ कॉन्ट्रेक्टर्स ने आदेश से खफा होकर काम रोक दिया है. क्योंकि उनका करोड़ों का पेमेंट अटका हुआ है. जिस कारण प्रोजेक्ट्स में लगी लेबर तक को भुगतान नहीं कर पा रहे. ऐसे में जलदाय विभाग और कॉन्ट्रेक्टर्स के बीच पेमेंट पर विवाद गर्मा गया है. कुछ दिन पहले मेजर प्रोजेक्ट्स से जुडे कॉन्ट्रेक्टर्स ने प्रमुख सचिव से मुलाकात की थी, लेकिन विवाद नहीं सुलझा पाए.
9 हजार करोड़ अटके, इसलिए फंसा पेंच
जेजेएम की रिपोर्ट में जलदाय विभाग ने ये माना है कि शुरुआती सालों में राज्य सरकार द्वारा मैचिंग हिस्सा राशि पर्याप्त और समय पर नहीं दिए से इस मिशन पर प्रतिकूल प्रभाव पडा है. राज्य के जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब तक 22,873 करोड़ खर्च हो चुका है, लेकिन अभी 9,341 करोड़ के पेमेंट अटका हुआ है.
पेमेंट कब आया, कब नहीं आया
(दिसंबर - 2023 तक)
पेमेंट नहीं होने से प्रतिकूल प्रभाव
इस मिशन के जरिए 1 करोड़ 8 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के लिए 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य था. लेकिन मार्च तक ये मिशन पूरा नहीं हो पाया.11 लाख 74 हजार कनेक्शन ये मिशन शुरू होने से पहले ही लगे थे. मिशन में 92.11 लाख ग्रामीण परिवारों को लाभान्वित किया जाना था, लेकिन अब तक महज 53 लाख 26 हजार कनेक्शन ही हो पाए. विभाग ने अपनी ही रिपोर्ट में माना है कि समय पर पेमेंट नहीं होने से प्रतिकूल प्रभाव पडा. ऐसे में अब दिवाली का सीजन आ गया है. काम बंद के बीच त्यौहार पर विवाद बढ़ गया है.
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