पूरे देश को प्रदर्शन और आंदोलन का तरीका सिखा गया राजस्थान का 'शांतिमार्च'

एनआरसी और सीएए के विरोध में देश में बवाल मचा हुआ है. हिंसा और आगजनी की घटनाएं हो रही हैं लेकिन इन सबके बीच रविवार को जयपुर में एक बेहद सुखद तस्वीर नजर आई. 

पूरे देश को प्रदर्शन और आंदोलन का तरीका सिखा गया राजस्थान का 'शांतिमार्च'
एक लाख से अधिक की भीड़ जयपुर की सड़कों पर मौन जुलूस में शामिल हुई.

जयपुर: एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के खिलाफ रविवार को जयपुर में हुए ऐतिहासिक शांति मार्च की गूंज पूरे देश दुनिया में सुनाई दे रही है. एक लाख से अधिक की भीड़ जयपुर की सड़कों पर जुटी और कोई हिंसक प्रदर्शन नजर नहीं आया. 

यह प्रदर्शन बताता है कि लोकतंत्र में विरोध करने का तरीका क्या होता है. देश भर में हिंसक प्रदर्शनों के बीच कल का शांति मार्च एक नजीर पेश कर गया और इस शांति मार्च को कामयाब बनाने में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अहम टीम का विशेष योगदान रहा. 

एनआरसी और सीएए के विरोध में देश में बवाल मचा हुआ है. हिंसा और आगजनी की घटनाएं हो रही हैं लेकिन इन सबके बीच रविवार को जयपुर में एक बेहद सुखद तस्वीर नजर आई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आह्वान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटी के लोगों ने जयपुर में शांति मार्च का आयोजन किया. एक लाख से अधिक की भीड़ जयपुर की सड़कों पर मौन जुलूस में शामिल हुई. सभा का आयोजन हुआ. संविधान के सिद्धांतों को दोहराया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कानून को वापस लेने की मांग की गई लेकिन सबसे खास बात यह रही कि पूरा आयोजन बेहद व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से हुआ. 

इतनी बड़ी तादाद में प्रदेशभर के नागरिक जयपुर में जुटे लेकिन उसके बावजूद एक पत्थर भी नहीं उछाला गया. किसी के खिलाफ नारेबाजी नहीं हुई. यह सब बताता है कि लोकतंत्र में प्रदर्शन और आंदोलन का तरीका क्या होता है. देश भर में जयपुर का शांति मार्च एक नजीर पेश करके गया है और इस पूरे आयोजन को इस व्यवस्थित तौर पर अंजाम देने में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खास टीम का अहम योगदान रहा, जिन्होंने पिछले 3 दिनों में दिन-रात कड़ी मेहनत करके इस शांति मार्च को अमली जामा पहनाया.

हाथों में नजर आया तिरंगा
जयपुर में कार्यक्रम अपने तय समय से 1 घंटा देरी से जरूर शुरू हुआ लेकिन उसमें किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था नजर नहीं आई. बड़ी तादाद में जब लोग जेएलएन मार्ग से होते हुए गांधी सर्किल पहुंचे तो उनके हाथों में तिरंगे झंडे के साथ-साथ संविधान की शपथ और सीएए एनआरसी के विरोध के अलावा किसी पार्टी का झंडा नहीं था. हाथों में तिरंगा झंडा, दिल में संविधान की शपथ होने के चलते कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी नागरिक वेद व्यवस्थित तरीके से वापस रवाना हुए, जिससे शहर के नागरिकों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नजर नहीं आई.