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'ऑपरेशन गुड़िया' ने किया था वेश्यावृत्ति के गिरोह का पर्दाफाश, मासूमों को दिया नया जीवन

ऑपरेशन गुड़िया उन बच्चियों को लेकर किया गया था जिनको लड़कियों के सौदागर किडनैप कर उन्हें वेश्यावृत्ति के अंधे कुएं में धकेल देते थे. 

'ऑपरेशन गुड़िया' ने किया था वेश्यावृत्ति के गिरोह का पर्दाफाश, मासूमों को दिया नया जीवन
जिस आधार पर हमने यह तहकीकात शुरू की थी वो सभी तथ्य पुलिस जांच में सत्य साबित हुए हैं.

मनवीर सिंह/अजमेर: समाज में पनप रहे बच्चियों के प्रति घिनौने अपराध पर प्रहार करती जी मीडिया की विशेष रिपोर्ट 'ऑपरेशन गुड़िया' के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे है. ऑपरेशन गुड़िया में जिन तथ्यों का खुलासा जी मीडिया के द्वारा किया गया उन सभी तथ्यों पर अब पुलिस जांच में मुहर लग चुकी है. इस मामले में एक दर्जन से ज्यादा गिरफ्तारियों के साथ ही पुलिस को एक बड़ी सफलता उन बच्चियों की बरामदगी के रूप में भी मिली है. जिन्हें बचपन के सौदागर उनकी मां के आंचल से छीन कर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने के लिए ले आये थे. ऑपरेशन गुड़िया की सफलता पर ही केन्द्रित रिपोर्ट ऑपरेशन गुड़िया पार्ट टू में आज एक बार फिर कुछ ऐसे सवाल समाज के सामने है जिनका जवाब आज भी नहीं मिल पाया है. 

हालांकि ऑपरेशन गुड़िया पार्ट टू की शुरुआत करने से पहले अपको बताते हैं कि ऑपरेशन गुड़िया क्या था. बता दें कि ऑपरेशन गुड़िया उन बच्चियों को लेकर किया गया था जिनको लड़कियों के सौदागर किडनैप कर उन्हें वेश्यावृत्ति के अंधे कुएं में धकेल देते थे. ऑपरेशन गुड़िया को लेकर हमारा दावा है कि जिन तथ्यों और सवालों के आधार पर हमने यह तहकीकात शुरू की थी वो सभी तथ्य पुलिस जांच में सत्य साबित हुए हैं. 

वहीं, अब जी मीडिया ने ऑपरेशन गुड़िया पार्ट टू की शुरुआत की है जिसे के माध्यम से हम केवल इतना बताना चाहते है कि जी मीडिया ने इस ऑपरेशन के माध्यम से जिन तथ्यों का खुलासा किया था वो तमाम तथ्य पुलिस जांच में साबित भी हुई हैं. हालांकि राजस्थान के साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र से मासूम बेटियों का अपहरण करने वाला गिरोह सक्रिय हैं. 

पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश का एक गिरोह मासूम बच्चियों के अपहरण की वारदात को अंजाम देता था और बाद में बिचौलियों के माध्यम से यह बच्चिया कंजर समाज के अपराधियों को बेच दी जाती थी. पुलिस ने इस गिरोह का खुलासा करते हुए बच्चियों को बेचने में मदद करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जबकि बच्चियों को खरीदने वाले दस आरोपियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया है.  

वहीं, मासूम बच्चियों को उनकी मां के आंचल से छीन कर राजस्थान के विभिन्न इलाको में रखा जाता था. उन्हें दवाएं दे कर वक्त से पहले जवान किया जाता था ताकि उन्हें वैश्यावृति के दलदल में धकेला जा सके. पुलिस जांच में इस बात के भी प्रमाण मिले हैं. जिन बच्चियों को भीलवाड़ा पुलिस ने इस गिरोह के चुंगल से मुक्त करवाया है. उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्हें दवाएं दे के वक्त से पहले जवान किया जाता था. इस बात को बरामद की गयी बच्चियों ने जी मीडिया के कैमरे के सामने भी स्वीकार किया. 

जी मीडिया ने खुलासा किया था कि बचपन के यह सौदागर कम उम्र में ही अपहरण कर लायी गयी बच्चियों से वैश्यावृति करवाते थे. इनकार करने पर इन्हें यातनाओं का शिकार होना पड़ता था. पुलिस जांच में यह तथ्य भी पूरी तरह साबित हुआ है कि आरोपी इन बच्चियों को कंजर समाज के अलग अलग जगहों पर रख कर वैश्यावृति करवाते थे. पुलिस के मुताबिक यहां उनके साथ वैहशियाना हरकते की जाती थी साथ ही यदि कोई बच्ची मना करती थी तो उस पर जुल्म किए जाते थे. 

गौरतलब है कि जी मीडिया ने खुलासा किया था कि आरोपी इन बच्चियों को स्टाम्प पेपर के माध्यम से खरीदा और बेचा करते थे. यहां तक कि जी मीडिया ने इसके प्रमाण के रूप में बाकायदा वो स्टाम्प पेपर भी सार्वजनिक किए थे. यह तथ्य भी पुलिस जांच में सही पाया गया. पुलिस ने जांच के बाद में माना कि मासूम बच्चियों का अपहरण करने वाले उन्हें बीचौलियो के माध्यम से चालीस हजार से एक लाख रूपये तक की कीमत में बेचा करते थे. इन बच्चियों का बेचान बाद में वैश्यावृति का अड्डा चलाने वालो के बीच भी हुआ करता था जन्हा इनकी कीमते दो से ढाई लाख रूपये तक तय की जाती थी. यह खरीद और बेचान बाकायदा स्टाम्प पेपर पर हुआ करता था.