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100 किलो की इराकी महिला की Knee-रिप्लेसमेन्ट सर्जरी हुई सफल

 राजीव कुमार शर्मा ने कहा, "घुटने के जोड़ों की खराब विकृति और कमजोर हड्डियों के कारण मरीज बीते 15-20 वर्षो से घुटने में दर्द से जूझ रही थी.

100 किलो की इराकी महिला की Knee-रिप्लेसमेन्ट सर्जरी हुई सफल
अब महिला के दोनों पैर सीधे हैं और नी ज्वाइंट सही तरीके से काम कर रहे हैं.(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्लीः दिल्ली के विमहांस नयति सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 100 किलो के वजन वाली एक इराकी महिला की सफलतापूर्वक दुर्लभ टोटल नी रिप्लेसमेन्ट (टीकेआर) सर्जरी हुई. डॉक्टर्स ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी. जानकारी के अनुसार बगदाद की रहने वाली 65 वर्षीय महिला का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) 44.5 था और वह चलने फिरने में  गंभीर कमर दर्द से जूझ रही थी. अस्पताल के डॉक्टर्स अनुसार महिला एडवांस ऑस्टियोआर्थराइटिस (स्टेज 4) से पीड़ित थी, जिसमें मरीज को अपने ज्वाइंट चलाते वक्त दर्द व असहजता महसूस होती है और दैनिक गतिविधियों में इससे दिक्कतें आती हैं.

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विमहांस नयति सुपर स्पेशलिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ ओथोर्पेडिक्स, स्पोर्ट्स मेडीसिन एंड अथ्रेप्लास्टी के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार शर्मा ने कहा, "घुटने के जोड़ों की खराब विकृति, संयुक्त शिथिलता और कमजोर हड्डियों के कारण मरीज बीते 15-20 वर्षो से घुटने में दर्द से जूझ रही थी. इस मामले में अत्याधिक भार होने के कारण महिला की बैक और घुटनों पर ज्यादा दबाव पड़ रहा था, जिससे ज्वाइंट कार्टिलेज तेजी से खराब हो रही थी. वह पांच मिनट से ज्यादा न तो चल सकती थीं और न ही खड़ी रह सकती थी."

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चिकित्सा विशेषज्ञों ने पाया कि प्रत्येक बीएमआई इकाई के बढ़ने पर कार्टिलेज में 11 फीसदी की तेज कमी की संभावना थी. मरीज में मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे लक्षण भी थे. जानकारी में बताया गया कि मरीज की सर्जरी कई चरणों में की गई. डॉ. शर्मा ने कहा, "क्योंकि मरीज क्लास-3 (उच्च जोखिम) मोटापा श्रेणी में थी, उनके मोटापे ने इसे एक दुर्लभ मामला बना दिया. इतने अधिक बीएमआई के साथ रोगी की टोटल नी आथ्रेप्लास्टी करना लगभग असंभव है क्योंकि वह नियमित परिस्थितियों में किसी भी सुरक्षित सर्जिकल प्रक्रिया को सहन नहीं कर पाता है. इसके अलावा कमजोर हड्डियों ने प्रत्यारोपण की स्थिरता को असहनीय बना दिया."

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इस सर्जरी के लाभ को लंबे समय तक सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक मोबाइल बेयरिंग ज्वाइंट का प्रयोग किया है, जो 20 से 25 वर्षो तक चल सकता है. उन्होंने कहा, "इसके अलावा मरीज के बुरी तरह से फैले नी ज्वाइंट अस्थिबंध को ठीक करने और नी ज्वाइंट को संतुलित करने के लिए एक विशेष तकनीक की आवश्यकता थी. हमने ज्वाइंट एनाटॉमी और लिंब अलाइनमेंट को फिर से लगाया. अब, उनके दोनों पैर सीधे हैं और नी ज्वाइंट सही तरीके से काम कर रहे हैं. अब वह आसानी से चल-फिर रही हैं."