बड़ा सवाल: 'भारत माता की जय' से भय किसको, जो PAK के साथ उन्हें देश क्यों करे बर्दाश्त

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ABVP के एक समारोह में कहा कि भारत में रहना है तो भारत माता जय कहना ही होगा.

बड़ा सवाल: 'भारत माता की जय' से भय किसको, जो PAK के साथ उन्हें देश क्यों करे बर्दाश्त
धर्मेद्र प्रधान का सवाल उन लोगों के लिए है जो नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ देशविरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं

नई दिल्ली: NPR यानी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का विरोध कर रहे लोगों पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने निशाना साधा है. धर्मेंद्र प्रधान ने सवाल किया कि क्या देश को धर्मशाला बन जाने दिया जाए. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक समारोह में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में रहना है तो भारत माता जय कहना ही होगा. धर्मेद्र प्रधान का सवाल उन लोगों के लिए है जो नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ देशविरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं या फिर उनका समर्थन कर रहे हैं. 

हालांकि विपक्ष को भारत माता की जय वाली धर्मेद्र प्रधान की बात चुभ गई है. उनका कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान से भारत माता पर सीख की जरूरत नहीं. सवाल यही है कि 'भारत माता की जय' से किसको 'भय'? जो पाकिस्तान के साथ उन्हें देश क्यों करे बर्दाश्त? घुसपैठियों को बसाएंगे, भारत को 'धर्मशाला' बनाएंगे?  

'भारत माता की जय' से किसको 'भय'?  
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि भारत में रहना है तो भारत माता जिंदाबाद बोलना चाहिए. अठावले ने कहा कि मेरठ में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे तभी एसपी सिटी ने धमकाया. उधर, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि जो देश विरोधी नारेबाज़ी करते हैं, उन्हें समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. बीजेपी महासचिव भूपेंद्र यादव का कहना है कि JNU में भारत माता के टुकड़े के नारे लगाए गए मगर इनको शर्म नहीं आई. 

कहां-कहां भारत माता की जय?
वेद में साफ लिखा है - 'माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:'. वाल्मीकि रामायण में भारत माता की जय का जिक्र है. उसमें लिखा है: 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'. किरन चन्द्र बन्दोपाध्याय ने 1873 में भारत माता नाटक खेला गया था. बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के आनंद मठ में 1882 में वंदे मातरम् का उल्लेख है. रवीद्रनाथ टैगोर ने भारतमाता को देवी के रूप में चित्रित किया. शिव प्रसाद गुप्त ने 1936 में बनारस में भारत माता का मंदिर बनवाया. महात्मा गांधी ने इस मंदिर का उद्घाटन किया था. 

घुसपैठियों और शरणार्थियों में क्या फर्क है?   
घुसपैठिये: अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले नागरिक है. निजी फायदे के लिए दूसरे देश में प्रवेश करते हैं. छिपकर रहते हैं, सरकार को जानकारी नहीं देते. 
शरणार्थी: सरकार की इजाजत से दूसरे देश में प्रवेश करते हैं. उत्पीड़न की वजह से पलायन के लिए मजबूर होते हैं. शरणार्थी कैंप में रहते हैं, सरकार को जानकारी होती है. 

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अब घुसपैठियों का 'देश निकाला'! 
अनुमान के मुताबिक देश में 2 करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी हैं. अवैध बांग्लादेशियों में से 30 लाख से ज्यादा पश्चिम बंगाल में हैं. 15 से 20 लाख अवैध बांग्लादेशी असम में हैं. 1985 में राजीव गांधी के पीएम रहते घुसपैठियों का मुद्दा उठा. 2010 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत असम के 2 जिलों में NRC अपडेशन की प्रक्रिया. 1991 में असम में मुस्लिम जनसंख्या 28.42% थी. 2001 की जनगणना में असम में मुस्लिम आबादी 30.92% हो गई. 2011 की जनगणना में असम में मुस्लिम आबादी 34.22% पहुंच गई.