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ZEE जानकारी: कैसा होगा मोदी मंत्रिमंडल का चेहरा!

गुरुवार को मोदी सरकार की दूसरी पारी शुरू होने जा रही है और सबके मन में यही सवाल है कि आख़िर मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल कैसा होगा.

ZEE जानकारी: कैसा होगा मोदी मंत्रिमंडल का चेहरा!

गुरुवार को नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनकी पहली सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली के नई कैबिनेट में शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है. अब से कुछ देर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली से मिलने उनके घर पहुंचे . कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी उनसे ये अपील करने गए हैं कि वो मंत्रिमंडल में बने रहें .

इसकी वजह ये है कि आज सुबह अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी. इस में उन्होंने अपील की थी कि उन्हें नई कैबिनेट में कोई पद न दिया जाए क्योंकि उनका स्वास्थ्य ख़राब है. उन्हें इलाज के लिए वक़्त दिया जाए. 

जेटली पहली मोदी सरकार में बहुत अहम भूमिका में रहे हैं. सभी प्रमुख मुद्दों पर वो सरकार और पार्टी का पक्ष सामने रखते हैं.
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अरुण जेटली ने दिल्ली में रहकर पार्टी के प्रचार और मीडिया मैनेजमेंट को संभाला.विपक्षी दलों की रणनीति की काट भी वही निकालते हैं. वो अक्सर ब्लॉग के ज़रिए पार्टी के विचार और सरकार का पक्ष भी रखते हैं.
लेकिन, अब ख़राब सेहत की वजह से अरुण जेटली कोई बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं चाहते.

गुरुवार को मोदी सरकार की दूसरी पारी शुरू होने जा रही है और आज सबके मन में यही सवाल है कि आख़िर मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल कैसा होगा. प्रधानमंत्री मोदी ऐतिहासिक बहुमत मिलने के बाद अब अपनी कैबिनेट किस आधार पर चुनेंगे ?

मोदी सरकार के नये चेहरे कौन से होंगे. इसमें देश के किन राज्यों और किन वर्गों को ज़्यादा भूमिका दी जाएगी. आज सब इसी की चर्चा कर रहे हैं. 
एक कप्तान की टीम, उतनी ही मज़बूत होती है जितने कि उसके सदस्य. एक क़ाबिल कप्तान के नेतृत्व में टीम मिलकर perform करती है...तभी उसकी जीत होती है. नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि जितनी बड़ी जीत मिली है, अब उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी है. जनता की उम्मीदें भी इस बार मोदी सरकार से बहुत ज़्यादा हैं. 

कल जब नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे...तो उनके साथ 65 से 70 सांसद भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. ये मंत्री कौन होंगे, किसे किस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी जाएगी, इसे लेकर आज प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच साढ़े तीन घंटे तक बातचीत हुई. कल भी दोनों ने क़रीब 5 घंटे तक मीटिंग की थी. 

वैसे तो आज कई न्यूज़ चैनल और न्यूज़ website आपको ऐसे नेताओं के नाम बता रहे होंगे, जिन्हें मंत्री बनाए जाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन सच यही है कि इसका औपचारिक ऐलान कल ही होगा. इसलिये चाहे नये सांसद हों या फिर देश की जनता, उन्हें इस तरह की fake news से बचने की ज़रूरत है. 25 मई को NDA की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बता दिया था कि अब उन पत्रकारों की दुकान बंद हो चुकी है जो पहले फ़ोन पर मंत्रिमंडल की लिस्ट तैयार कर लेते थे. 

((अब आपको अंदाज़ा हो गया होगा कि बहुत सारे डिज़ाइनर पत्रकार आजकल क्यों परेशान हैं. ))प्रधानमंत्री मोदी का पहला कार्यकाल बड़े फ़ैसलों के लिये जाना जाएगा. चाहे GST हो, नोटबंदी या फिर सर्जिकल स्ट्राइक...उन्होंने हमेशा अपने फ़ैसलों से देश के साथ दुश्मनों को भी चौंकाया है. देश में जब चुनाव चल रहे थे...तब मैंने 8 मई को प्रधानमंत्री का इंटरव्यू किया था. मैंने उनसे पूछा था कि आख़िर उनके फ़ैसले इतने secret क्यों होते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी अपने दूसरे कार्यकाल में क्या करेंगे, इसकी तरफ़ भी इशारा भी वो कर चुके हैं. बस उन्होंने जो बात कही हैं...उसे सिर्फ़ गहराई से समझने की ज़रूरत है.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीट जीतने वाली बीजेपी ने इस बार 303 सीट जीती हैं, जबकि NDA की कुल सीट 353 हैं...यानी सरकार में बीजेपी की पहले से ज़्यादा भागीदारी होगी.

लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि NDA के सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में कम जगह मिलेगी. 25 मई को हुई NDA की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी गठबंधन धर्म निभाने की याद दिला चुके हैं.

पहले कार्यकाल में मोदी सरकार में बीजेपी की तरफ़ से 22 कैबिनेट मंत्री, जबकि NDA के साथी दलों से 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे. राज्य मंत्रियों में बीजेपी की तरफ़ से 32 जबकि सहयोगी दलों से 2 मंत्री थे.

इस बार दक्षिण भारत के 3 राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली. लेकिन इन राज्यों में बीजेपी अपनी ताक़त बढ़ाना चाहती है. बीजेपी चाहेगी कि कम से कम केरल और तमिलनाडु को मंत्रिमंडल में जगह मिले. 

इसलिये तमिलनाडु में बीजेपी के सहयोगी दल AIADMK की तरफ़ से कोई मंत्री बनाया जा सकता है. इसका इशारा NDA के संसदीय दल की बैठक में मिल गया था...जब प्रधानमंत्री के साथ मंच पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री E. Palanisami ((पलनीसामी)) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे. इससे ये संदेश जाता है कि दोनों राज्यों को मोदी कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है. बिहार में NDA ने 39 सीट जीती हैं. 

इसलिये JDU और लोक जनशक्ति पार्टी को भी सीटों के आधार पर मंत्रालय मिल सकते हैं. महाराष्ट्र में इस बार शिवसेना और बीजेपी के गठबंधन ने 48 में से 41 सीट जीती हैं. इसलिये शिवसेना की तरफ़ से इस बार 2 मंत्री बनाये जा सकते हैं...जबकि पिछली बार शिवसेना के पास एक ही मंत्रालय था. पंजाब में अकाली दल को भी एक मंत्रालय मिलने की संभावना है. उत्तर प्रदेश में अपना दल बीजेपी की सहयोगी पार्टी है..और माना जा रहा है कि 2019 में भी उसका एक मंत्रालय का कोटा बना रहेगा.

आज बहुत से लोग ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या नहीं. अमित शाह ने इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जबकि वो राज्यसभा के सदस्य थे. तभी ये सवाल उठने लगा था कि मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने पर क्या वो मंत्री बनेंगे ?

अमित शाह ने पार्टी को जितनी बड़ी जीत दिलाई है उससे उनका कद बहुत बढ़ गया है. अगर वो मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं, तो वो सरकार में अघोषित रूप से नंबर दो होंगे और उनकी भूमिका वही हो सकती है, जो NDA-1 में लालकृष्ण आडवाणी की. वो सरकार में तो रहेंगे ही, संगठन में भी उनका अहम रोल बना रहेगा. 

सरकार में रहते हुए अमित शाह प्रधानमंत्री मोदी की ज़्यादा मदद कर पाएंगे. उनका कार्यभार कुछ हल्का कर सकेंगे. मंत्री बनने पर अमित शाह को रक्षा, वित्त, गृह या विदेश मंत्रालय मिलने की संभावना होगी. क्योंकि यही मंत्री सरकार की सबसे ताक़तवर कैबिनेट कमेटी यानी Cabinet Committe On Security की बैठक में शामिल होते हैं.

अगर अमित शाह मंत्री बनते हैं तो फिर नया सवाल होगा कि बीजेपी अध्यक्ष कौन होगा? लेकिन, अमित शाह कल अगर मंत्री पद की शपथ नहीं लेते हैं, तो बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर उनके पास एक पूरे कार्यकाल अध्यक्ष बने रहने का मौक़ा होगा.

अमित शाह 2014 में तब अध्यक्ष बने थे, जब राजनाथ सिंह ने इस्तीफ़ा दिया था. इस तरह उन्होंने राजनाथ सिंह का बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया था. इसके बाद 2015 में अमित शाह पूरे 3 साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बने. उनका ये कार्यकाल 2018 में पूरा हो गया था. लेकिन, अमित शाह को लोकसभा चुनाव तक अध्यक्ष बने रहने को कहा गया था.

बीजेपी का संविधान कहता है कि कोई भी व्यक्ति 3-3 साल के दो कार्यकाल तक पार्टी का अध्यक्ष रह सकता है. इस तरह से अमित शाह के पास अभी 3 साल का एक पूरा कार्यकाल बचा हुआ है.

अक्सर आप को मीडिया बताता है कि ये ख़बर सूत्रों के हवाले से है. लेकिन, इस बार सूत्रों को भी ख़बर नहीं है कि अमित शाह मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या नहीं

जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तब उन्होंने सबका साथ, सबका विकास का नारा दिया था. इस बार उन्होंने इस नारे में एक और शब्द जोड़ा है, सबका विश्वास. इसलिये उनके नये कैबिनेट में पूरे भारत की तस्वीर देखने को मिल सकती है. इस बार प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं के साथ नौजवानों को अहमियत दे सकते हैं. 

((बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस बार चुनाव नहीं लड़े. इसके ज़रिये बीजपी ने ये संदेश दिया कि वो युवाओं को आगे रखना चाहती है. 

17वीं लोकसभा में 12 प्रतिशत ऐसे सांसद चुनकर पहुंचे हैं जिनकी उम्र 40 साल से कम है, जबकि पिछली बार 40 से कम उम्र वाले सांसद सिर्फ़ 8 प्रतिशत ही थे. इसका मतलब ये है कि देश, अनुभव के साथ संसद में युवा जोश भी चाहता है.

मोदी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है. इस बार बीजेपी की 41 महिला सांसद चुनकर आई हैं. इनमें 8 सांसद उत्तर प्रदेश, 6 गुजरात और 5 महिला सांसद महाराष्ट्र से हैं. वहीं SC-ST सांसदों को भी कैबिनेट में ज़्यादा जगह मिल सकती है. पूर्वोत्तर भारत, जिस पर हमेशा से बीजेपी ने ज़्यादा ध्यान दिया है, वहां से भी ज़्यादा मंत्री बनाये जा सकते हैं. 

मोदी सरकार की कैबिनेट में किस-किस को मौका मिलेगा...ये जल्द ही पता चल जाएगा. इस बीच दुनिया को ये ज़रुर पता चल गया है, कि U Turn लेने के मामले में कौन सबसे माहिर है ?

कुछ दिन पहले TIME मैगज़ीन के Cover page पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "India's Divider In Chief" बताया गया था. लेकिन, BJP को मिले प्रचंड बहुमत ने TIME मैगज़ीन का हृदय परिवर्तन कर दिया है. और अब इसी TIME मैगज़ीन में एक लेख छपा है, जिसका शीर्षक है...Modi Has United India Like No Prime Minister in Decades...यानी नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार भारत को जोड़ने का काम किया है, वैसा दशकों में किसी दूसरे प्रधानमंत्री ने नहीं किया.((

Time के इस U Turn को तकनीकी भाषा में Post Truth कहते हैं. भारत सहित पूरी दुनिया इस वक्त Post Truth के युग में है. 
यानी भारत में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का चलन बढ़ा है. अलग-अलग व्यक्ति, नेता, संस्थाएं और सरकारें बार बार गलत तथ्यों के आधार पर बयान बाज़ी करते हैं. झूठ को इतनी बार दोहराया जाता है कि वो सच लगने लगता है. लोगों को ये विश्वास दिलाया जाता है कि जो कुछ कहा जा रहा है और किया जा रहा है वही सच है. और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा इस झूठ को सच बनाने में अपना पूरा योगदान देता है. गलत तथ्यों पर आधारित Articles, गलत News Reporting और शब्दों के खेल के ज़रिए लोगों को गुमराह किया जाता है. किसी खबर को एजेंडा चलाने वाली Websites पर Publish करके या News Channels पर दिखा कर Post Truth यानी सच के बाद का एक पूरा युग खड़ा किया जा रहा है. आपको इससे सावधान रहना चाहिए. क्योंकि TIME बदल गया है.))