ZEE जानकारी: जानें मिशन शक्ति से भारत को क्या हासिल हुआ?

मिशन शक्ति ने भारत को स्पेस पावर के रूप में स्थापित कर दिया है.

ZEE जानकारी: जानें मिशन शक्ति से भारत को क्या हासिल हुआ?

अब ये समझिए कि भारत को मिशन शक्ति से क्या हासिल हुआ है?

मिशन शक्ति ने भारत को स्पेस पावर के रूप में स्थापित कर दिया है. इससे भारत की CNP यानी Comprehensive National power बढ़ जाएगी और इससे दुनिया भर में भारत का रणनीतिक प्रभाव बढ़ेगा. Comprehensive National Power वो पैमाना है जिसके ज़रिए किसी देश को ये पता चलता है कि उसे दूसरे देश से युद्ध करना चाहिए या नहीं. 

इस क़दम के ज़रिये भारत ने ख़ुद को एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में पेश किया है. इससे पता चलता है कि भारत में ख़ुद को एक महाशक्ति बनाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है

भारत ने ये क़दम इसलिये भी उठाया है ताकि भविष्य में अंतरिक्ष में हथियारों की रेस को रोकने वाली किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि का प्रभाव भारत की क्षमताओं पर ना पड़े. इस संधि को PAROS यानी Prevention of Arms Race in Outer Space कहते हैं. अब जब भविष्य में ऐसी कोई संधि होगी तो उसका असर भारत की क्षमताओं पर नहीं पड़ेगा. क्योंकि भारत ने आज ये शक्ति हासिल कर ली है. 

यहां परमाणु शक्ति का उदाहरण देना भी ज़रूरी है. परमाणु हथियारों के मामले में अंतरराष्ट्रीय संधियों की वजह से भारत को कई फ़ायदे नहीं मिले और आज भी भारत NSG यानी Nuclear Suppliers Group का हिस्सा बनने के लिये संघर्ष कर रहा है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत ने शुरुआत में परमाणु शक्ति बनने की कोशिश नहीं की थी.  लेकिन अंतरिक्ष के मामले में भारत ने ज़रा सी भी देर नहीं लगाई. और आज भारत Low Earth Orbit यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में 1200 किलोमीटर की ऊंचाई तक किसी भी सैन्य लक्ष्य को ध्वस्त कर सकता है. 

युद्ध में दुश्मन को ज़रा सा भी मौका देना आत्महत्या करने के समान होता है . भारत की थल सेना, वायु सेना और जल सेना बहुत मजबूत है . लेकिन दुश्मन अंतरिक्ष से भी हमला कर सकता है . ये बात लोगों को आश्चर्यजनक लग सकती है . लेकिन एकदम सही है . 

इंटरनेट से जुड़े लगभग सभी काम उपग्रह की मदद से ही किए जाते हैं . रेडियो और टीवी का प्रसारण सैटेलाइट की मदद से होता है . उपग्रहों की मदद से प्राकृतिक आपदा का अनुमान लगाया जा सकता है . मौसम की जानकारी भी उपग्रहों की मदद से मिलती है . आज आप अपने मोबाइल फोन पर GPS का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसके पीछे भी सैटेलाइट की शक्ति है. खनन उद्योग में भी उपग्रहों की मदद ली जाती है . 

यानी बैंकिंग, शेयर बाज़ार, कृषि, मौसम, सूचना, रेडियो, Television, दूर संचार और सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में कामकाज के लिए हम उपग्रहों की व्यवस्था पर निर्भर हैं. अगर उपग्रह नहीं होंगे तो हमारी आधुनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी.

हमारी जल, थल, और वायु सेना के बहुत सारे उपकरण भी.. उपग्रहों की मदद से ही संचालित होते हैं . अगर ऐसे में कोई दुश्मन देश भारत के किसी सैटेलाइट को नष्ट कर दे तो भारत में उस सैटेलाइट से जुड़ी व्यवस्था खत्म हो सकती है . अगर बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष में मौजूद भारत के सैटेलाइट्स को खत्म कर दिया जाए . तो पूरे भारत में अफरा तफरी फैल सकती है . ऐसी स्थिति में ये बहुत जरूरी है कि अंतरिक्ष में मौजूद भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा की जाए . इसीलिए आज भारत ने अपनी अंतरिक्ष सेना को तैयार करने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है . 

इससे पहले आपने सिर्फ तीन सेनाओं का नाम सुना था... थल सेना, जल सेना और वायु सेना लेकिन अब भारत एक अंतरिक्ष सेना तैयार करने की तरफ बढ़ रहा है . और ये बात आज देश के आम लोगों को भी समझनी चाहिए . तभी उन्हें ये पता चलेगा कि भारत के वैज्ञानिकों ने कितना महान काम किया है . और देश की सरकार ने कितनी ज़बरदस्त इच्छाशक्ति दिखाई है .

दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां ये क्षमता हासिल करने की कोशिश कर रही हैं . लेकिन ये क्षमता हासिल करने में सबसे पहले अमेरिका, Russia और चीन को कामयाबी मिली . 

पिछले कई वर्षों से इसी मामले में चीन और अमेरिका के बीच तनाव की स्थिति है . वर्ष 2007 में चीन ने धरती से 850 किलोमीटर ऊपर मौजूद उपग्रह को नष्ट करने की क्षमता हासिल कर ली थी . दुनिया की जासूसी करने वाले अमेरिका के ज्यादातर उपग्रह इसी ऊंचाई पर काम करते हैं . यही वजह है कि अमेरिका, चीन की इस सफलता से बहुत परेशान हुआ . 

अमेरिका लगातार अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है . पिछले वर्ष जून के महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस संबंध में बड़ा फैसला लिया . उन्होंने अमेरिका के सुरक्षा हितों पर काम करने वाली संस्था Pentagon को ये निर्देश दिया कि वो एक Space Force बनाने की योजना पर काम शुरू करे . अमेरिका की सेना में इसके लिए एक अलग Command बनाई गई है... जिसे U.S. Space Command कहा गया है . अमेरिका की वायु सेना के एक उच्च अधिकारी को इस Space Command के नेतृत्व का ज़िम्मा सौंपा गया है . 
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक U.S. Space Command में 15 हज़ार कर्मचारियों को भर्ती किया जा सकता है . इससे अमेरिका के सुरक्षा खर्च में करीब 14 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि होगी. 
यानी अब भविष्य में लड़ाइयां अलग तरह की होगी . भारत अब तक बड़ी संख्या में सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है . ऐसे में भारत के लिए इनकी सुरक्षा पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है . 

जब घर में कोई खुशी की बात होती है तो परिवार में मिठाइयां बांटी जाती हैं . हमारा देश भी एक परिवार है . लेकिन हमारे देश में जब कोई शुभ समाचार आता है तो हमारे नेता आपस में ही लड़ने लगते हैं . आज भारत के वैज्ञानिकों ने एक नया इतिहास रचा है. लेकिन जैसे ही राष्ट्र के नाम संबोधन करके प्रधानमंत्री ने देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी. उसी वक़्त से इस पूरे मामले पर राजनीति शुरू हो गई . CPM के महासचिव सीताराम येचुरी ने चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखकर प्रधानमंत्री के संबोधन को आचार संहिता का उल्लंघन बताया है . चुनाव आयोग ने इस मामले पर एक कमेटी बना दी है.. जो इसकी जांच करेगी.

इस मामले पर सबसे पहले कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक Tweet किया . उन्होंने लिखा कि 
DRDO ने बहुत अच्छा काम किया . हमें DRDO पर बहुत गर्व है . साथ ही मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को World Theatre Day यानी विश्व रंग मंच दिवस की बहुत शुभकामनाएं देता हूं . 

BSP की अध्यक्ष मायावती ने भी अपने Tweet में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी लाभ के लिए राजनीति कर रहे हैं . चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए . 

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने एक Tweet में लिखा कि एंटी सैटेलाइट कार्यक्रम की शुरुआत यूपीए सरकार के वक्त हुई थी . 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोपों की वर्षा के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की . उन्होंने कहा कि हमारे देश के वैज्ञानिक वर्ष 2012 में ही इस कार्यक्रम की शुरुआत करना चाहते थे लेकिन तब यूपीए की सरकार ने अनुमति नहीं दी थी. 

वर्ष 2012 में DRDO के प्रमुख Dr V K सारस्वत थे . Zee News ने Dr V K सारस्वत से बात करके इस पूरे मामले को समझने की कोशिश की . Dr V K सारस्वत ने हमें बताया कि उनकी मांग के बाद भी यूपीए सरकार ने इस कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाया. 

हमें DRDO के पूर्व प्रमुख Dr V K सारस्वत का वर्ष 2012 का एक इंटरव्यू मिला . हमने 7 वर्ष पुराने इस इंटरव्यू को सुना तो हमें ये पता चला कि उनकी बातचीत में एक मजबूरी नज़र आ रही है . लेकिन आज 2019 में उनके चेहरे पर आत्मविश्वास था और भारत के अंतरिक्ष की महाशक्ति के रूप में स्थापित होने की खुशी थी .

सिर्फ DRDO के पूर्व प्रमुख ही नहीं. ISRO के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने भी कहा है, कि राजनीतिक इच्छाशक्ति ना होने की वजह से भारत anti-satellite missile वाला सपना पूरा नहीं कर पाया. उनके मुताबिक वर्ष 2007 में जब चीन ने ये टेस्ट किया था. उस वक्त भारत के पास भी anti-satellite missile capability थी. लेकिन, तब देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति की भारी कमी थी. यहां आपको याद दिला दें, कि वर्ष 2007 में भारत में UPA की सरकार थी. 

वैसे हमारे देश में जिस प्रकार की स्थिति बनी हुई है, उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है, कि अंतरिक्ष में हुई Space स्ट्राइक के सबूत मांगने वाले भी बहुत जल्द Active हो जाएंगे. इसे समझने के लिए आज हमने आप सभी के लिए बुद्धिजीवियों, नेताओं और डिज़ाइनर पत्रकारों की मनोदशा समझाने वाला एक Table बनाया है.
 
2016 में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में घुसकर आतंकवादी कैम्पस को तबाह किया गया. उन्हें उनके इलाके में घुसकर मारा गया. लेकिन हमारे देश में इस सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे गए. 

26 फरवरी 2019 को बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने हवाई हमले किए. जैश के अड्डे बर्बाद हुए, कई आतंकवादी मारे गए. पाकिस्तान को भारत की ताकत का अंदाज़ा हो गया. लेकिन दूसरी तरफ हमारे ही देश के भीतर इस हमले के भी सबूत मांगे गए.

और अब Space Strike करके भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में खुद को स्थापित कर लिया है. ये देश के स्वाभिमान से जुड़ी हुई घटना है. लेकिन, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, कि सबूत मांगने वाला गैंग फिर से सक्रिय हो जाए. और इसके भी सबूत मांगने लगे.

इन तीनों ही मौकों पर देशहित की बात नहीं की गई. बल्कि सिर्फ और सिर्फ राजनीति की गई. और जब राजनीति, देश से ऊपर उठ जाए, तो दुश्मन देश उसका फायदा उठाते हैं. इस बार भी वैसा ही हुआ है. क्योंकि, भारत के ऐतिहासिक कदम के बाद चीन और पाकिस्तान ने अपने-अपने तरीके से इसे अंतरिक्ष के लिए ख़तरा बताया है. पाकिस्तान ने अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विश्व समुदाय से अपील की है. 

आज विपक्षी दलों की तरफ से ये सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इस परीक्षण को चुनाव के पहले क्यों किया गया ? 

इसका जवाब आज विदेश मंत्रालय की तरफ से दिया गया है . विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये परीक्षण तभी किए गए हैं जब इनकी सफलता सुनिश्चित हो गई . भारत वर्ष 2014 से ही अंतरिक्ष में अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए तेज़ी से कदम उठा रहा है . और सबसे बड़ी बात ये है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कोई भी काम, कभी भी किया जा सकता है . क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है . अगर देश रहेगा तभी लोकतंत्र रहेगा . तभी संविधान रहेगा . तभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होगी और तभी विपक्ष के पास सरकार की आलोचना का अधिकार होगा . 

अंग्रेज़ों ने क़रीब 200 वर्षों तक भारत को गुलाम बनाकर रखा. सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत से उसका सब कुछ छीन लिया गया. लेकिन 'वक्त' बहुत बलवान होता है. और इसे समय का फेर ही कहेंगे, कि Space Technology की दुनिया में वही अंग्रेज़, अब भारत के 'गुलाम' बन गए हैं. आप ये भी कह सकते हैं, कि ब्रिटेन सहित दुनिया के सभी बड़े देश, किफायती और असरदार अंतरिक्ष अभियानों के लिए भारत पर आश्रित हो रहे हैं.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई थी. और तब से भारत 103 Spacecraft Missions को Launch कर चुका है.

Global Satellite Market में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है. 

फिलहाल ये Industry 20 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा की है.

दुनिया के बाकी देशों के मुक़ाबले भारत की Satellite Launching 10 गुना सस्ती है.

ISRO, आज दुनिया की 6 बड़ी Agencies में से एक है. 

Satellite Launching के मामले में भारत का Success रेट..94 प्रतिशत है. 

भारत का PSLV तेज़ी से दुनिया के दूसरे देशों की पहली पसंद बनता जा रहा है...

वर्ष 1980 तक अंतरिक्ष के बाज़ार में अमेरिका का 100 प्रतिशत कब्ज़ा था, जो अब घटकर 60 प्रतिशत रह गया है...

भारत में जब अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी , तब रॉकेट साइकिल पर रखकर और उपग्रह बैलगाड़ी पर रखकर एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाए जाते थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इतनी लंबी छलांग लगाई है, कि अब बड़े बड़े देश अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत का सहयोग चाहते हैं. पश्चिमी देश आज भी भारत को Snake Charmers यानी संपेरों का देश कहते हैं. जबकि असलियत ये है कि भारत Space Charmer यानी अंतरिक्ष में बड़े बडे चमत्कार दिखाने वाला देश बन गया है. और इसमें भारत के वैज्ञानिकों की काबिलियत और मेहनत का सबसे बड़ा योगदान है. लेकिन ये काबलियत दुनिया कई देशों को बहुत चुभ रही है . 

कुछ वर्ष पहले अमेरिका के मशहूर अख़बार The New York Times में एक Cartoon छापा गया था जिसमें भारत को एक गरीब और देहाती देश बताकर उसका मज़ाक उड़ाया गया था . अंतरिक्ष में अब तक अमेरिका का दबदबा है वो अपने आपको Elite Space Club का स्थाई सदस्य मानता है लेकिन अब इस Space Club में भारत की Entry हो चुकी है जिसे वो सहन नहीं कर पा रहा है . इस Cartoon में अमेरिका का सामंती स्वभाव और भारत की दयनीय स्थिति दिखाने की कोशिश की गई थी .

आज एक बार फिर New York Times भारत के मिशन शक्ति को देखकर बहुत बेचैन है . उसने अपनी ये बेचैनी एक Tweet के ज़रिये दुनिया के सामने ज़ाहिर की है . New York Times ने भारत के मिशन शक्ति पर सवाल उठाते हुए.. If Confirmed जैसी शब्दावली का इस्तेमाल किया है . इसका मतलब है ये है कि इस अखबार ने भारत के मिशन शक्ति के प्रति शक पैदा करने की कोशिश की है . हमें लगता है कि इस अखबार के पत्रकार शायद ये भूल गये हैं कि शक्ति पर किसी का एकाधिकार नहीं होता.... वो क़ाबिल और मेहनती व्यक्ति के हाथों में कभी भी जा सकती है 

यहां आपको भारत की आज़ादी के सवाल पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की टिप्पणी को भी याद करना चाहिए. जब भारत की आज़ादी पर ब्रिटेन में चर्चाएं चल रही थीं. तब चर्चिल ने कहा था

"अगर भारत को आज़ादी दी जाती है, तो ताकत दुष्टों और बदमाशों के हाथ में चली जाएगी . भारत के नेताओं में क्षमता नहीं है . वो बहुत मीठा बोलने वाले हैं लेकिन मूर्ख हैं . वो सत्ता के लिए आपस में लड़ेंगे और भारत, इन्हीं राजनीतिक झगड़ों में गुम हो जाएगा . एक दिन आएगा जब भारत में हवा और पानी पर भी कर लगाया जाएगा. "

आज अगर चर्चिल ज़िंदा होते, तो भारत की कामयाबी देखकर बहुत हैरान होते. आज का सबसे बड़ा सत्य ये है कि भारत अपनी सारी विषमताओं के बावजूद, ब्रिटेन से आगे निकल चुका है. ये एक बहुत बड़ी कामयाबी है.