ZEE जानकारी: हिममानव 'येति' के अस्तित्व को लेकर एक फिर क्यों छिड़ी है बहस?

पिछले कई दशकों में येति को देखने के बड़े बड़े दावे होते रहे हैं. लेकिन आजतक इसकी प्रमाणिकता, साबित नहीं हो पाई है. आज भी येति को एक कल्पना या अफ़वाह के रूप में देखा जाता है. 

ZEE जानकारी: हिममानव 'येति' के अस्तित्व को लेकर एक फिर क्यों छिड़ी है बहस?

अब हम येति यानी हिम-मानव की मौजूदगी के दावों का गहरा DNA टेस्ट करेंगे. भारतीय सेना के पर्वतारोही दल ने नेपाल के माउंट मकालू पर्वत पर येति यानी दो पैरों पर चलने वाले हिममानव जैसे जीव के पैरों के निशान देखे हैं. ये आज की ऐसी ख़बर है जिसपर पूरी दुनिया की नज़र बनी हुई है. 

ऐसा दावा किया जाता है कि येति वो प्राणी है जो हिमालय या बर्फ़ में पाया जाता है. वो लंबा चौड़ा होता है, उसके शरीर पर बाल होते है और वो किसी गोरिल्ले की तरह दो पैरों पर चलता है. 

पिछले कई दशकों में येति को देखने के बड़े बड़े दावे होते रहे हैं. लेकिन आजतक इसकी प्रमाणिकता, साबित नहीं हो पाई है. आज भी येति को एक कल्पना या अफ़वाह के रूप में देखा जाता है. लेकिन कल रात को भारतीय सेना ने येति जैसे जीव के पैरों के निशानों की तस्वीरें Tweet कर दीं. और अब पूरी दुनिया में इन तस्वीरों की चर्चा हो रही है. 

भारतीय सेना का दावा है कि नेपाल में माउंट मकालू पर्वत पर गये भारतीय सेना के पर्वतारोही दल ने बेस कैंप के पास येति जैसे प्राणी के पैरों के.. बड़े निशान देखे हैं. ये 32 इंच लंबे और 15 इंच चौड़े पैर के निशान हैं. 9 अप्रैल को सेना के दल ने मकालू बेस कैंप के पास ये तस्वीरें ली हैं. येति को पहले भी मकालू बरुन नेशनल पार्क के आसपास देखे जाने का दावा किया गया है.

भारतीय सेना के इस पर्वतारोही दल ने 27 मार्च को माउंट मकालू पर चढ़ाई के लिये अभियान शुरू किया था. 9 अप्रैल को जब ये दल क़रीब 15 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर अपने बेस कैंप में था. तब उसे अपने आसपास बर्फ़ में ये निशान देखने को मिले. येति के अस्तित्व को लेकर ये तस्वीरें इसलिये महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज तक किसी भी देश की सरकारी संस्था ने इस तरह का दावा नहीं किया है. अभी तक सिर्फ़ पर्वतारोही या वैज्ञानिकों की तरफ़ से येति के होने या ना होने के दावे किये गये हैं.

माउंट मकालू दुनिया की पांचवीं सबसे ऊंची चोटी है. इसकी ऊंचाई 8 हज़ार 485 मीटर है. ये काठमांडू से 180 किलोमीटर दूर.. पूर्व दिशा में है. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से इसकी दूरी 40 किलोमीटर है. 9 अप्रैल को भारतीय सेना का दल इसके बेस कैंप - लांगमले खरका में था. 

ये वो इलाक़ा है जहां किसी भी प्राणी का ज़िंदा रहना आसान नहीं है. लेकिन इसे लेकर कई दंतकथाएं हैं, कई कहानिया हैं. नेपाल में इस काल्पनिक प्राणी को पवित्र और शुभ माना जाता है. यहां तक कि नेपाल में एक विमान कंपनी का नाम भी येति एयरलाइंस है.

भारतीय सेना की तरफ़ से जारी की गईं इन तस्वीरों ने येति के अस्तित्व पर एक नई बहस छेड़ दी है. भारतीय सेना के पर्वतारोही दल में कई अनुभवी अफ़सर हैं. इस दल का नेतृत्व मेजर मनोज जोशी कर रहे हैं. इस दल में 4 अफसर, 2 Junior Commissioned Officers और 11 जवान शामिल हैं. ये दल मई के आखिरी हफ्ते तक अपने अभियान से लौटेगा. जो तस्वीरें मिली हैं उनमें इस दल के सदस्य, अज्ञात जीव के पैरों के निशान की नाप लेते हुए नज़र आ रहे हैं. सेना के दल ने इस पूरे Investigation की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है.

आज येति... google पर सबसे ज़्यादा ट्रेंड करने वाला विषय बन चुका है. इसलिये हमें लगता है कि आज DNA में येति के काल्पनिक अस्तित्व को वैज्ञानिक तथ्यों पर परखना बहुत ज़रूरी है. येति आज का विषय नहीं है...ये सदियों पुरानी दंतकथाओं का हिस्सा है. पिछले क़रीब 100 वर्षों से इस विषय पर शोध जारी है. वर्ष 1920 के बाद से कई पर्वतारोही दलों ने येति की पहेली को सुलझाने के लिये नेपाल की ऊंची चोटियों पर जाना शुरू किया था. इसके बाद 1967 में अमेरिका से आई एक वीडियो क्लिप ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया.

1967 में अमेरिका के Roger Patterson और Robert गिमलिन.. ने ये वीडियो बनाया था. इस वीडियो में Big Foot यानी येति को दिखाया गया था. इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था . Patterson और Gimlin ने ये दावा किया था कि अमेरिका के California में उन्होंने एक महा-मानव को देखा, जो 2 पैरों पर चलता है. कहा गया कि इसकी कई विशेषताएं इंसानों से मिलती हैं, इसके बाद लंबे समय तक इस वीडियो की प्रमाणिकता को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों के बीच बहस होती रही और बाद में इस Video को Fake यानी नकली माना गया था. 

अपने रिसर्च के दौरान हमें पता चला कि Hollywood से लेकर Bollywood तक येति जैसे हिम मानव पर 100 से ज्यादा फिल्में बनाई जा चुकी हैं. येति पर कई किताबे में भी लिखी जा चुकी हैं, कई Journals में लेख छप चुके हैं. लेकिन आज तक कोई भी येति के होने का पुख़्ता सबूत नहीं दे पाया है. येति को देखने के कई दावे किये गये लेकिन वो दावे वैज्ञानिक कसौटियों पर सही साबित नहीं हो पाये. कई बार पर्वतारोहियों ने येति के अंग लाने का दावा किया. लेकिन DNA टेस्ट में पता चला कि वो अंग भालू या कुत्ते के थे.

1953 में पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाले न्यूजीलैंड के पर्वतारोही Edmund hillary ने 1960 में दावा किया था कि वो ऐसे ही एक अभियान के दौरान येति की खाल लेकर आए हैं. बाद में जांच में पता चला कि वो एक पहाड़ी बकरे की खाल है. वर्ष 2017 में कई देशों के शोधकर्ताओं ने येति से जुड़े सबूतों का अध्य्यन किया था. और वो इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि वो सैंपल येति के नहीं बल्कि भालू के थे.