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ZEE Jankari: लंदन में EVM हैकिंग के नाम पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश

आप अगर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीरों पर गौर कर रहे होंगे तो ये देख पा रहे होंगे कि तस्वीरों में पीछे स्क्रीन पर एक व्यक्ति चेहरा ढके हुए नज़र आ रहा है. इस व्यक्ति का नाम सैयद शूजा है और ये खुद को अमेरिका का साइबर एक्सपर्ट बता रहा है.

ZEE Jankari: लंदन में EVM हैकिंग के नाम पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. और जब दुनिया की इस सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनाव होते हैं, तो पूरी दुनिया के लोग इन चुनावों को देखते हैं. ताकि वो ये समझ सकें कि निष्पक्ष चुनाव कैसे करवाए जाते हैं, लेकिन आज भारत के लोकतंत्र की निष्पक्ष छवि पर बट्टा लगाने का काम हुआ है. और ये काम London में हुआ है, जहां एक कथित हैकर ने आज बहुत बड़े बड़े दावे किए हैं.

आज London में EVM की हैकिंग के नाम पर... भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है. अमेरिका के एक साइबर एक्सपर्ट ने भारत में चुनावों में इस्तेमाल होने वाली EVMs की हैकिंग का दावा किया है. इस आदमी का नाम है सैयद शूजा.. और इसने कहा है कि भारत में 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान EVM हैक हुई थीं. ये भी दावा किया गया कि भारत में कई चुनावों के दौरान EVM हैक की गईं. आप अगर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीरों पर गौर कर रहे होंगे तो ये देख पा रहे होंगे कि तस्वीरों में पीछे स्क्रीन पर एक व्यक्ति चेहरा ढके हुए नज़र आ रहा है. इस व्यक्ति का नाम सैयद शूजा है और ये खुद को अमेरिका का साइबर एक्सपर्ट बता रहा है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैयद शूजा अमेरिका से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बड़े बड़े दावे कर रहा था. इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सैयद शूजा ने अपना मुंह ढका हुआ था. यानी वो अपनी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखना चाहता है.

ये प्रेस कॉन्फ्रेंस इंडियन जर्नलिस्ट असोसिएशन की तरफ से आयोजित की गई थी. लेकिन अब हम आपको जो दिखाने जा रहे हैं, उस देखकर आप हैरान रह जाएंगे. ये तस्वीरें इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं. और इन तस्वीरों में आपको कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल नज़र आ रहे हैं. अब सवाल ये है कि कपिल सिब्बल वहां इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों गए? हालांकि कांग्रेस पार्टी का दावा है कि कपिल सिब्बल को जर्नलिस्ट एसोसिएशन की तरफ से बुलावा आया था. ये भी कहा जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आयोजित करने वालों ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को भी सम्मेलन में बुलाया था...इसके अलावा कांग्रेस, बीजेपी समेत कई दलों के नेताओं को भी न्योता दिया था. कांग्रेस अब ये कह रही है कि कपिल सिब्बल निजी तौर पर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में गए हैं.

सवाल ये भी है कि जब भारत का चुनाव आयोग ईवीएम पर सवाल उठाने वाली पार्टियों को चैलेंज करता है, तब ये पार्टियां चुनाव आयोग के दफ्तर में नहीं पहुंचती हैं. लेकिन जब कोई हैकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए आरोप लगाता है तो कांग्रेस उन दावों को सच मान लेती हैं. और बाकायदा उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी पार्टी के इतने बड़े नेता को भी भेज देती है. अब आप समझ सकते हैं कि ये सब क्यों और कैसे हो रहा है?

भारत के चुनाव आयोग ने भी इन आरोपों का संज्ञान लिया है और ये कहा है कि भारत में EVM से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया है कि वो इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई के पहलुओं पर विचार कर रहा है. अब उन सवालों पर आते हैं, जो इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उठ रहे हैं. पहला सवाल तो इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की टाइमिंग है, क्योंकि भारत में लोकसभा चुनाव होने में 100 दिनों से भी कम का समय बचा है. और विपक्षी पार्टियां लगातार EVM की निष्पक्षता पर सवाल उठाती रहती हैं.

आज इस हैकर ने अपने दावों को सही ठहराने के लिए बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे का नाम भी लिया. ये कहा कि गोपीनाथ मुंडे को EVM हैक किए जाने की जानकारी थी, इसीलिए उनकी हत्या की गई. इस पर भी सवाल उठते हैं. क्योंकि एक ऐसे व्यक्ति का नाम लिया गया, जो अपना बचाव करने के लिए अब इस दुनिया में ही मौजूद नहीं हैं. ये दावा किया कि 2014 में हैकिंग की वजह से कांग्रेस 201 सीट हारी थी. ये भी दावा किया कि गौरी लंकेश हैकिंग की इस खबर को छापने वाली थीं, इसलिए उनकी हत्या की गई.

आज हमने इस व्यक्ति के बारे में पता करने की कोशिश की. हमने ये जानने की कोशिश की आखिर ये सैयद शूजा नाम का व्यक्ति कौन है, ये कहां का रहने वाला है? वो ये सब क्यों कर रहा है? उसका बैकग्राउंड क्या है? लेकिन हमें पुख्ता तौर पर कुछ भी पता नहीं चल पाया. इसीलिए हम आपसे ये कहेंगे कि इस व्यक्ति पर आंख बंद करके विश्वास नहीं किया जा सकता.

समस्या इस बात की है कि इस हैकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हमारे देश के आज डिज़ाइनर मीडिया ने पूरी तरह भरोसा कर लिया. जैसा कि हर बार होता है. ये वो लोग हैं, जो सर्जिकल स्ट्राइक पर तो सबूत मांगते हैं, लेकिन जब कोई हैकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ईवीएम हैक करने का दावा करता है, तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं.

वैसे लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ईवीएम का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है. आपको याद होगा कि इससे पहले जब भी बीजेपी कोई चुनाव जीतती थी तो विपक्षी पार्टियां ईवीएम हैक होने का आरोप लगाती थीं, लेकिन दिसंबर के महीने में कांग्रेस देश के तीन बड़े राज्यों में चुनाव जीती. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान. इन तीन राज्यों के चुनाव जीतने के बाद विपक्ष चुप हो गया था.

हालांकि जब ये नतीजे आने वाले थे तो उससे कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया था और EVM पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया -
Congress party workers, it’s time to be vigilant. In MP, EVMs behaved strangely after polling: Some stole a school bus and vanished for 2 days. Others slipped away & were found drinking in a hotel.
In Modi’s India, the EVMs have mysterious powers.
Stay alert!

अब सवाल ये है कि क्या भारत को बैलट पेपर के युग में वापस चले जाना चाहिए ? क्या भारत को EVM का त्याग कर देना चाहिए? इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए हमें EVM और बैलट पेपर का तकनीकी विश्लेषण करना होगा.

सबसे पहले EVM की सुरक्षा का विश्लेषण करते हैं. जब EVM का निर्माण होता है..तो किसी को ये नहीं पता होता कि Ballot Units पर किस पार्टी के उम्मीदवार को कहां जगह मिलेगी. जब उम्मीदवारों की सूची फाइनल हो जाती है..तभी Ballot Units पर प्रत्याशियों के नाम सामने आते हैं. इन EVMs को एक Strong Room में रखा जाता है, जहां तक पहुंचना आसान नहीं है.

पहले चरण में EVM की जांच Electronics Corporation of India Limited के Engineers करते हैं, इस प्रक्रिया में किसी और को शामिल नहीं किया जाता है. किसी भी चुनाव में इन मशीनों को किसी Order यानी क्रमांक में नहीं भेजा जाता है. कोई भी मशीन किसी भी बूथ पर भेजी जा सकती है.

EVM को लगाने का काम, उम्मीदवारों या उनके Polling Agents की निगरानी में होता है. EVM की Control Unit और Ballot Unit का एक Unique Identification Number नंबर होता है। ये UID उम्मीदवारों को भी दिया जाता है. किसी भी Booth पर वोटिंग शुरू होने से पहले, Presiding Officer एक Mock Poll कराता है. ये Mock Polling सभी उम्मीदवारों या उनके Agents के सामने की जाती है ( ताकि सभी को यकीन हो जाए, कि मशीनें ठीक काम कर रही हैं)

वोटिंग खत्म होने के बाद इन मशीनों को उम्मीदवारों के Polling Agents के सामने ही Seal कर दिया जाता है. Polling Agents चाहें तो मशीनों पर अपने हस्ताक्षर भी कर सकते हैं. इसके बाद Polling Party मशीनों को एक निश्चित स्थान पर ले जाती है. उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि चाहें, तो मशीनों को ले जा रहे वाहन के पीछे-पीछे भी जा सकते हैं.

इसके बाद Returning Officer इन मशीनों को Strong Room में रख देता है और उम्मीदवार चाहें तो Strong Room के ताले पर अपनी अपनी मोहर भी लगा सकते हैं. उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि चाहें तो चौबीसों घंटे Strong Room पर नज़र रख सकते हैं. वोटों की गिनती वाले दिन Strong Room की सील उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों के सामने ही तोड़ी जाती है. हर मतदान केद्र में एक Register होता है जिसमें मतदाताओं के Details होते हैं. Polling Agents और उम्मीदवार इन Details का मिलान EVM में डाले गए वोटों की संख्या से कर सकते हैं.

EVM लगाए जाने, Strong Room को सील किए जाने और Strong Room को खोले जाने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई जाती है. यानी ये एक मज़बूत वोटिंग व्यवस्था है..जिसमें छेड़छाड़ लगभग नामुमकिन है. इसके अलावा EVM में दो ऐसी विशेष बातें होती है, जिसकी वजह से उसे Hack करना मुमकिन नहीं है.

EVM किसी भी दूसरी Machine से Connect नहीं होती है और ये इंटरनेट से भी जुड़ी नहीं होती. इसलिए Electronic तरीके से इसे हैक नहीं किया जा सकता. उसमें ऐसा कोई सर्किट नहीं होता जिसकी मदद से उसे Bluetooth या Wi-Fi से इसे Connect किया जा सके. EVM पर सवाल उठाने वाले लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुके हैं. और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला लिय़ा था. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने VVPAT यानी Voter-Verified Paper Audit Trail को पारदर्शी चुनावों के लिए ज़रूरी माना था.

आपको बता दें कि VVPAT के ज़रिए मतदाता को ये पता चलता है कि उसने जिस प्रत्याशी के नाम का बटन दबाया है, वोट उसी को गया है. VVPAT एक Printer जैसी मशीन होती है. जब भी कोई वोटर EVM मशीन पर किसी उम्मीदवार को वोट देता है तो VVPAT यूनिट से एक पर्ची निकलती है ये एक तरह से आपके वोट का Print Out होता है, जिसे वोटर कुछ सेकेंड्स तक देख सकता है. इस पर्ची पर उम्मीदवार का नाम और उसकी पार्टी का चुनाव चिह्न होता है, जिसे देखकर मतदाता को इस बात की तसल्ली हो जाती है कि उसका वोट सही जगह गया है.

ज़रूरत पड़ने पर इन पर्चियों की संख्या को वोटों की संख्या से मिलाया जा सकता है. 2019 के लोकसभा चुनावों में VVPAT का इस्तेमाल भी होगा, लेकिन इसके बावजूद विपक्षी दलों को EVM पर भरोसा नहीं है.