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ZEE Jankari: सबसे ज्यादा 'Liberty' वाले अमेरिका में भी लादेन की मौत के सबूत नहीं मांगे गए

सोचने वाली बात ये भी है. कि जब अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था. तब किसी ने भी उससे सबूत नहीं मांगे थे.

ZEE Jankari: सबसे ज्यादा 'Liberty' वाले अमेरिका में भी लादेन की मौत के सबूत नहीं मांगे गए

सोचने वाली बात ये भी है. कि जब अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था. तब किसी ने भी उससे सबूत नहीं मांगे थे. लेकिन भारत के खिलाफ़ सबूत मांगने का एजेंडा भारत ही नहीं पूरी दुनिया में चलाया जा रहा है. अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है..जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. लेकिन आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में इन दोनों देशों की परिस्थितियों में बहुत बड़ा फर्क है. आज इस फर्क को समझना भी ज़रूरी है. 2 मई 2011 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ये घोषणा की थी कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के Abbottabad में मार दिया गया है.

2 मई को ही अमेरिका ने अरब सागर में लादेन के शव को दफन कर दिया था. तब पूरी दुनिया ने अमेरिका के इस दावे को मान दिया था. लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान में घुसकर कार्रवाई की, तो सबूत मांगे जा रहे हैं. अमेरिका में Statue of Liberty है जिसे दुनिया में स्वतंत्रता और मानव अधिकारों का प्रतीक माना जाता है.

लेकिन वहां भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी ने ओसामा बिन लादेन की मौत के सबूत नहीं मांगे. मानव अधिकार से जुड़े मामलों पर अमेरिका की संस्थाओं का रुख, बहुत सख्त होता है. लेकिन वहां किसी संस्था ने ना तो लादेन के मानव अधिकारों की बात नहीं की. और ना ही लादेन की मृत्यु पर कोई शोक सभा की.

12 मई 2011 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस John Paul Stevens ने भी कहा था कि लादेन की हत्या कानूनी रूप से सही है और न्यायपूर्ण है.  उस वक्त राष्ट्रपति ओबामा के किसी विरोधी ने उनसे सबूतों की मांग नहीं की थी .  पूर्व राष्ट्रपति George W Bush ने Abbottabad Operation को बहुत बड़ी उपलब्धि बताया था . 

George W Bush, बराक ओबामा की Democratic Party की विरोधी.. Republican Party के नेता थे . यानी वहां के विपक्ष को ये पता है कि युद्धकाल में राजनीति नहीं करनी चाहिए. आप भी ये सोचते होंगे कि अगर अमेरिका, पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है, तो भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता. 

हर हिंदुस्तानी के दिल में ये ख्वाहिश है कि भारत के वीर और पराक्रमी सैनिक पाकिस्तान के अंदर जाकर एक Covert Operation करें और वहां से Most Wanted आतंकवादी हाफिज़ सईद और मौलाना मसूद अज़हर को पकड़कर भारत ले आएं .  लेकिन ये काम करने के लिए सिर्फ़ भारत की सैन्य क्षमता से काम नहीं चलेगा.  इस तरह के Operation को अंजाम देने के लिए भारत को अपनी खुफिया क्षमताओं का भी इस्तेमाल करना पड़ेगा.  भारत को ये पता लगाना पड़ेगा कि मौलाना मसूद अज़हर इस वक्त पाकिस्तान में किस ज़िले में मौजूद है ? कौन से अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है ?

उसकी सुरक्षा में पाकिस्तान के कितने जवान तैनात हैं ? उन जवानों के पास किस तरह के हथियार हैं ? मौलाना मसूद अज़हर का कोई Duplicate तो पाकिस्तान में नहीं हैं ? भारत को इस तरह की गुप्त सूचनाओं की ज़रूरत होगी. तभी भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल करके आतंकवादियों को पकड़कर भारत में ला सकता है .  

दुख की बात ये है कि आज भारत के पास पाकिस्तान में इस तरह का खुफिया Base मौजूद नहीं है.  जो आतंकवादियों के बारे में Pin Pointed जानकारियां दे सके. भारत की इस कमज़ोरी के लिए ज़िम्मेदार है Gujral Doctrine. ये भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल द्वारा निर्मित विदेश नीति का एक सिद्धांत है...

जिसे Gujral Doctrine कहा जाता है. जून 1996 से अप्रैल 1997 तक देश के प्रधानमंत्री H D देवगौड़ा थे. और उन्होंने इंद्र कुमार गुजराल को भारत का विदेश मंत्री बनाया. एक विदेश मंत्री के रूप में IK गुजराल का लक्ष्य था South Asia की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भारत को Big Brother की तरह स्थापित करना. 

इसके लिए उऩ्होंने सौम्य कूटनीति का सहारा लिया.  उन्होंने सोचा कि अगर भारत, बड़ा दिल दिखाएगा तो सभी देश भारत की जय-जयकार करेंगे.  और वो अपने आप South Asia का Big Brother बन जाएगा. लेकिन ये उनकी बहुत बड़ी भूल साबित हुई. भारत आज भी Gujral Doctrine का खामियाज़ा भुगत रहा है.

  Gujral Doctrine के मुताबिक South Asia का कोई भी देश किसी दूसरे देश के खिलाफ अपनी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा.  South Asia का कोई देश किसी दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और एक-दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का ख्याल रखेंगे .

यही Good Will दिखाने के लिए भारत ने पाकिस्तान में अपना Informal Network या Intelligence Network कमज़ोर कर लिया.  जैसे एक पौधे को पेड़ बनने में कई वर्ष लगते हैं .  उसी तरह दुश्मन देशों में अपने आदमी बनाने के लिए बहुत वर्ष लगाने पड़ते हैं. लेकिन Gujral Doctrine की वजह से भारत की वर्षों की मेहनत बर्बाद हो गई. आज भी भारत इसका खामियाज़ा भुगत रहा है.