'बीजेपी की आंधी' भी नहीं ढहा पाई ओवैसी का किला, हैदाराबाद सीट पर ली निर्णायक बढ़त

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की मतगणना के पांच घंटों के रुझानों में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है. 

'बीजेपी की आंधी' भी नहीं ढहा पाई ओवैसी का किला, हैदाराबाद सीट पर ली निर्णायक बढ़त
इस सीट में चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान हुआ था

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की मतगणना के पांच घंटों के रुझानों में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है. एनडीए 346 सीटों पर जबकि यूपीए 94 सीट पर आगे चल रहा है. अभी तक के जो रुझान सामने आए हैं, उनसे ऐसा लग रहा है कि देश में 'मोदी' की सुनाई आई है. हिंदी पट्टी में बीजेपी के क्लीन स्वीप कर दिया है. हालांकि दक्षिण में बीजेपी का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं है. तेलंगाना की हैदराबाद सीट से चुनाव लड़ रहे MIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी का किला 'मोदी की आंधी' नहीं ढहा पाई है. ओवैसी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी प्रत्याशी भगवंत राव से 94 वोट से आगे चल रहे हैं.

इस सीट में चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान हुआ था. हैदराबाद की सीट पर ओवैसी परिवार का 1984 से कब्जा है. ओवैसी 2004 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 2014 के आम चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. भगवंत राव पर करीब दो लाख वोटों से जीत दर्ज की थी. हैदराबाद लोकसभा सीट पर अब तक कुल 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से नौवीं बार AIMIM जीत दर्ज कर सकती है.
 

हैदराबाद सीट का कुछ ऐसा है इतिहास
हैदराबाद सीट पर ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी चुनाव लड़ते थे. सांसद के तौर पर उन्होंने लगातार 6 कार्यकाल पूरे करने के बाद साल 2004 में अपने बड़े बेटे असदुद्दीन के लिए यह सीट छोड़ दी. इस सीट पर कांग्रेस ने अंतिम बार 1984 में जीत पाई थी. इसके बाद से आज तक पिछले 30 साल से कोई और पार्टी नहीं जीत सकी है. 1927 में मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (MIM) पार्टी की स्थापना की गई थी. 1949 में मजलिस को भंग किया गया. बाद में 1958 में अब्दुल वाहिद ओवैसी (असदुद्दीन ओवैसी के दादा) ने मजलिस का नए तरीके से गठन करके पार्टी को नया नाम (AIMIM) दिया.