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बिहार: कांग्रेस में उठे बागी तेवर, पूर्व मंत्री बोले-प्रभारी खा गए पार्टी

पार्टी के अध्यक्ष मदन मोहन झा ने बिहार में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेवारी तय करने के लिए समीक्षा करने की बात कही है. जबकि पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगाया है.

बिहार: कांग्रेस में उठे बागी तेवर, पूर्व मंत्री बोले-प्रभारी खा गए पार्टी

पटना: बिहार कांग्रेस में एकला चलो की अवाज बुलंद होने लगी है. पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस की मजबूती के लिए लालू-राबड़ी से अलग राह लेने की सलाह आलाकमान को दी है. वहीं पार्टी के अध्यक्ष मदन मोहन झा ने बिहार में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेवारी तय करने के लिए समीक्षा करने की बात कही है. जबकि पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगाया है.

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद महागठबंधन को लेकर कांग्रेस में महाभारत तेज हो चुकी है. बिहार में कांग्रेस की खराब स्थिति के लिए कांग्रेसी नेताओं ने लालू-राबड़ी की संगत को जिम्मेवार ठहराया है. पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा ने आलाकमान को गठबंधन की राजनीति से अलग होने की सलाह दी है. अनिल शर्मा ने कहा है कि कांग्रेस समरस समाज की राजनीति करती है. लेकिन उनके सहयोगी जातिगत घृणा की राजनीति करते हैं. गठबंधन समान सोच समान विचारधारा के बीच होती है. लेकिन यहां तो सोच ही अलग है.

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2009 की बात
2009 में भी लालू प्रसाद ने सोनिया गांधी की हैसियत पर सवाल खड़े करते हुए गठबंधन से खुद को अलग कर लिया था. उस चुनाव में कांग्रेस को दो सीटें आई थीं. वोट प्रतिशत बढ़ कर 14 हो गया था. इसलिए कांग्रेस को अब गठबंधन से अलग होकर राजनीति करनी चाहिए. इधर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष चंदन बागची ने भी कांग्रेस को एकला चलो की रणनीति अपनाने की सलाह दी है. चंदन बागची ने कहा है कि साल 2000 में अध्यक्ष होने के नाते मैंने लालू-राबड़ी के साथ गठबंधन का विरोध किया था. लेकिन कांग्रेस के कुछ दिल्ली के नेताओं ने मुझे डांट लगाई थी. अगर उस वक्त कांग्रेस अपने पैरों पर खड़ी हो जाती तो आज कांग्रेस की ये स्थिति नहीं होती.

कांग्रेस प्रभारी को ठहराया जिम्‍मेदार
बिहार में कांग्रेस के बुरे प्रदर्शन के लिए पार्टी के विधायक पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल को जिम्मेवार ठहराया है. मस्तान ने कहा है कि पार्टी में हमारी स्थिति मजदूर जैसी है. कोई हम लोगों से सलाह नहीं लेता. यहां तक कि अध्यक्ष मदन मोहन झा भी सलाह नहीं लेते. बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल को सदाकत आश्रम में मार पड़ी उसके बाद भी उन्हें नहीं हटाया गया. मैंने अध्यक्ष राहुल गांधी से कहा था कि गोहिल पार्टी को खा जाएगा. लेकिन मेरी एक नहीं सुनी गयी. हमें किसनगंज की जिम्मेवारी दी गई थी वहां हम जीते.

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इधर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा बिहार में कांग्रेस की हार के लिए अभी जिम्मेवारी तय नहीं कर पाए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि हार की जिम्मेवारी तय करने के लिए हमलोग समीक्षा बैठक करेंगे. हमारे घटक दल की हार के लिए समीक्षा करेंगे. तभी जाकर किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है.

कुल मिलाकर कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं ने बिहार में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए आरजेडी और गठबंधन की राजनीति को जिम्मेवार ठहरा दिया है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि बिहार के कांग्रेसी नेताओं की आवाज को आलाकमान किस हद तक स्वीकार कर पाता है.