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मध्य प्रदेश में कर्जमाफी भी नहीं आई काम, 29 में से 1 सीट पर सिमटी कांग्रेस

प्रदेश में कांग्रेस के ना तो किसान कर्जमाफी के वादे काम आए और ना ही बिजली बिल में कटौती के दावे. 2014 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें अपने नाम करने वाली कांग्रेस से इस बार एक और सीट छिन गई.

मध्य प्रदेश में कर्जमाफी भी नहीं आई काम, 29 में से 1 सीट पर सिमटी कांग्रेस
फोटो साभारः ani

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 में 'नमो अगेन' का नारा फिर बुलंद हुआ है. दूसरे राज्यों सहित मध्य प्रदेश में भी मोदी के नाम की आंधी कोने-कोने तक पहुंच गई है. मध्य प्रदेश में 2018 के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिस मजबूती के साथ ऊपर आई थी, लोकसभा चुनाव में उसी तेजी के साथ वापस भी गई है.

प्रदेश में 29 में से 29 सीटें बटोरने का दावा कर रही कांग्रेस प्रदेश में 1 सीट पर ही सिमट कर रह गई है. प्रदेश में कांग्रेस के ना तो किसान कर्जमाफी के वादे काम आए और ना ही बिजली बिल में कटौती के दावे. 2014 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें अपने नाम करने वाली कांग्रेस से इस बार एक और सीट छिन गई. वह भी ऐसी, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. 

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गुना लोकसभा सीट एक ऐसी सीट है जिस पर शुरुआत से ही सिंधिया राजघराने का कब्जा रहा था और इस राजघराने के वर्तमान महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से ही हैं, ऐसे में इस बार मोदी का जादू कुछ इस तरह चला, कि सिंधिया राजघराने का मैजिक इसके सामने फीका पड़ गया. वहीं छिंदवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ उनकी लाज बचाने में कामयाब रहे. हालांकि, कमलनाथ सहित पूरी कांग्रेस को इस बात का अंदाजा शायद ही रहा होगा, कि मध्यप्रदेश सहित देशभर में उन्हें इतनी बुरी हार का सामना करने पड़ेगा.

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बता दें मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट पर भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है जहां राहुल गांधी ने किसान कर्जमाफी की घोषणा की थी. मध्य प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों में से सीधी में बीजेपी की रीति पाठक, सागर से बीजेपी के राजबहादुर सिंह, राजगढ़ से रोडमल नागर, भोपाल से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विदिशा से रमाकांत भार्गव, बैतूल से दुर्गादास, भिंड से संध्या राय, गुना से केपी यादव, टीकमगढ़ से वीरेंद्र कुमार, दमोह से प्रहलाद पटेल, शहडोल से हिमाद्री जैन, खजुराहो से वीडी शर्मा, होशंगाबाद से राव उदय प्रताप सिंह, रीवा से जनार्दन मिश्रा, सतना से गनेश सिंह आगे चल काफी आगे चल रहे हैं. जिनका जीतना निश्चित बताया जा रहा है.