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हरियाणा में 'लाल' और 'हुड्डा' परिवारों की हुई हार, 10 की 10 सीटें मोदी के पास

2019 के लोकसभा आम चुनाव ने हरियाणा की राजनीति में नया अध्याय लिखने का काम किया है. यहां लोकसभा की 10 सीटें थी, पिछली बार 7 सीटे बीजेपी को आई थी, लेकिन इस बार 10 की 10 बीजेपी को आई. खास बात यह रही कि हरियाणा के 2 बड़े 'लाल' परिवारों के सदस्यों को भी हार का सामना करना पड़ा. 

हरियाणा में 'लाल' और 'हुड्डा' परिवारों की हुई हार, 10 की 10 सीटें मोदी के पास
लोकसभा की 10 सीटें थी, पिछली बार 7 सीटे बीजेपी को आई थी, लेकिन इस बार 10 की 10 बीजेपी को आई.

हिसार: 2019 के लोकसभा आम चुनाव ने हरियाणा की राजनीति में नया अध्याय लिखने का काम किया है. लोकसभा की 10 सीटें थी, पिछली बार 7 सीटे बीजेपी को आई थी, लेकिन इस बार 10 की 10 बीजेपी को आई. खास बात यह रही कि हरियाणा के 2 बड़े 'लाल' परिवारों के सदस्यों को भी हार का सामना करना पड़ा. 

ये लाल परिवार हरियाणा की राजनीति में अपना अहम वजूद रखते हैं.. पहला परिवार है हिसार लोकसभा से पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल का परिवार, स्वर्गीय भजन लाल की तीसरी पीढ़ी यानी कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई यहां से मैदान में थे. बिश्नोई को बीजेपी नेता एवं केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंदर सिंह के बेटे बृजेन्द्र सिंह ने हराया है. दूसरा परिवार है पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल की तीसरी पीढ़ी यानी कि उनकी पोती श्रुति चौधरी. श्रुति भिवानी से कांग्रेस की उम्मीदवार थी, यहां से बीजेपी के धर्मबीर सिंह ने उन्हें मात दी. 

धर्मबीर मौजूदा सांसद भी है. श्रुति की माता किरण चौधरी हरियाणा कांग्रेस की लीडर है, वो भिवानी से विधायक है. ऐसे ही भव्य बिश्नोई के पिता कुलदीप बिश्नोई आदमपुर से तो भव्य की माता रेणुका बिश्नोई हांसी से विधायक है. इसके अलावा जिस हुड्डा परिवार की हम बात कर रहे है, वो है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह का परिवार. भूपेंद्र सिंह और उनके बेटे दीपेंदर सिंह हुड्डा दोनों कांग्रेस से उम्मीदवार थे, दोनों को ही हार का सामना करना पड़ा. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह को हरा कर सोनीपत से बीजेपी के रमेश कौशिक ने सीट जीती, तो वहीं रोहतक की अगर बात की जाए तो वहां से बीजेपी के ही अरविंद शर्मा जीते. हालाकिं रोहतक सीट में दोनों के जीत अंतराल के मार्जन की बात की जाए तो वो बेहद कम है. 

कौन कहां से जीता
हरियाणा में हिसार, रोहतक, सोनीपत और भिवानी के अलावा सीटों की बात की जाए तो फरीदाबाद से कृष्ण पाल गुर्जर, गुरुग्राम से राव इंद्रजीत सिंह, अम्बाला से रत्न लाल कटारिया, सिरसा से सुनीता दुग्गल, कुरुक्षेत्र से नायाब सिंह सैनी और करनाल से संजय भाटिया जीते है. ये सभी बीजेपी के ही नेता है. 

नई पार्टी बनाने वाले दोनों भाई भी हारे
लोकसभा के चुनाव में कई धुरंधर भी हारे है. हिसार लोकसभा की ही बात कर लें, तो यहां से भाजपा प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह ने 603289 वोट लेकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जजपा प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला (289221 वोट) को 314068 वोटों के अंतर से पराजित किया. रिटर्निंग अधिकारी अशोक कुमार मीणा एवं सामान्य चुनाव पर्यवेक्षक  जी सी वरुषबेन्द्रा मूर्ती ने बृजेन्द्र सिंह को विजय प्रमाण पत्र हिसार में प्रदान किया. दुष्यन्त ने हाल ही में जननायक जनता पार्टी बनाई थी.

दुष्यन्त 2014 में हिसार से इनेलो से सांसद बने थे, लेकिन परिवारिक विवाद के बाद इनेलो की कमान अभय सिंह के पास आ गई, जबकि दुष्यन्त और उनके भाई दिग्विजय ने अपने पिता अजय सिंह को साथ लेकर हरियाणा में नई राजनीति पार्टी बना दी. जेजेपी कि तरफ से दिग्विजय चौटाला ने जींद विधानसभा का उपचुनाव लड़ा वहां भी हार हुई और अब लोकसभा के चुनाव में दिग्विजय ने सोनीपत से चुनाव लड़ा. वहां भी दिग्विजय हार गए. इसके अलावा दिग्गजों की बात करे तो हरियाणा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर सिरसा से, कैप्टन अजय सिंह गुरुग्राम से, कुमारी शैलजा अम्बाला से, कुलदीप शर्मा करनाल से चुनावी मैदान में थे. इन्हें भी हार का सामना करना पड़ा.
 
4 महीने में विधानसभा के चुनाव की उम्मीद
हरियाणा में आने वाले 4 महीने में विधानसभा के चुनाव होने की उम्मीद है. लेकिन अब जिस हिसाब से मोदी लहर में सवार होकर बीजेपी ने 10 की 10 सीटें जीती है, उसके बाद से लग रहा है कि ये चुनाव पहले भी हो सकते है. हालांकि लोकसभा के चुनाव से पहले बीजेपी नेतागण इस बात को नकारते आये थे और कहते थे कि विधानसभा के चुनाव समय पर होंगे. हिसार लोकसभा से विजयी हुए बृजेन्द्र सिंह का कहना था कि जनता ने राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए सरकार चुनी है. उन्होंने इस दौरान कांग्रेस की स्थिति पर भी निशाने साधे.