लोकसभा चुनाव 2019: फिरोजाबाद सीट, जहां एक कुनबे के दो शख्सियतों के बीच में होगी चुनावी जंग

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन और शिवपाल यादव के सपा से अलग होने से 2019 का लोकसभा चुनाव यहां दिलचस्प हो गया है. 

लोकसभा चुनाव 2019: फिरोजाबाद सीट, जहां एक कुनबे के दो शख्सियतों के बीच में होगी चुनावी जंग
अखिलेश यादव के चचेरे भाई अक्षय यादव यहां से सांसद हैं..

नई दिल्ली: कांच की चूड़ियों के लिए दुनिया भर में फिरोजाबाद 'सुहाग नगरी' के नाम से प्रसिद्ध है. इसके साथ ही ये सीट सपा का गढ़ मानी जाती है. साल 2014 में अखिलेश यादव के चचेरे भाई अक्षय यादव ने यहां से चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभी तक पहुंचे. इस बार यहां चुनावी संग्राम और भी रोचक होने वाला है कि क्योंकि शिवपाल यादव ने नई पार्टी के गठन के बाद ये ऐलान किया था कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव यहीं से लड़ेगे. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन और शिवपाल यादव के सपा से अलग होने से 2019 का लोकसभा चुनाव यहां दिलचस्प हो गया है. 

2014 का ये था समीकरण
साल 2014 में बीजेपी और सपा के बीच इस सीट पर कांटे की टक्कर थी. साल 2014 में समाजवादी पार्टी के अक्षय यादव बीजेपी को मात देकर वह पहली बार संसद तक पहुंचे. अक्षय यादव को 48.4 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को 38 प्रतिशत वोट मिले थे. 

ये है राजनीतिक इतिहास
साल 1957 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी. साल 1967 में सोशलिस्ट पार्टी ने यहां से चुनाव जीता. 1971 में पहली बार कांग्रेस ने यहां पर जीती. 1977 से 1989 तक यहां कांग्रेस ने लगातार चार बार जीत दर्ज की. लेकिन साल 1991 के बाद लगातार तीन बार यहां बीजेपी ने कांग्रेस को करारी चुनावी पटखनी दी और बीजेपी के प्रभु दयाल कठेरिया ने यहां जीत की हैट्रिक लगाई. साल 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने बड़ी जीत हासिल की. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2009 से इस सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, हालांकि चुनाव के बाद उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया था. साल 2014 में समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव ने यहां से बड़ी जीत हासिल की.