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आरामबाग लोकसभा सीट : 47 साल की सत्ता दोबारा टीएमसी से छिनने में कामयाब हो पाएगी काम्युनिस्ट पार्टी!

2009 के लोकसभा चुनावों तक यह सीट सीपीएम के खाते में जाती रही है. हालांकि इन चुनावों में ही इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस की धमक दिखाई दे थी, जो 2014 में भी रही और नतीजा ये रहा कि 47 साल बाद सीपीएम का एकाधिकार खत्म हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने भारी मतों से जीत दर्ज की.

आरामबाग लोकसभा सीट : 47 साल की सत्ता दोबारा टीएमसी से छिनने में कामयाब हो पाएगी काम्युनिस्ट पार्टी!
फाइल फोटो.

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की आरामबाग लोकसभा सीट को कम्युनिस्टों का गढ़ कहा जाता है. 47 साल का कम्युनिस्ट पार्टी के जीत दर्ज करने के बाद अब यह सीट तृणमूल कांग्रेस के खाते में है. आरामबाग जिले को एक पिछला जिला माना जाता है. आधुनिक भारत में य़हां की 70 फीसदी जनता आज भी कृषि पर आधारित है. खास बात ये है कि बैकवर्ड ग्रांट फंड के तहत मिलने वाली सहायता यहां आज भी दी जाती है. 

आरामबाग अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है जो पश्चिम बंगाल के हुगली और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में है. जनगणना के अनुसार यहां की कुल आबादी 2222338 है. इसमें से 92.51 फीसदी ग्रामीण है जबकि 7.49 फीसदी शहरी. अनुसूचित जाति और जनजाति का रेश्यो यहां पर 30.68 और 3.34 फीसदी है. 2017 की वोटर लिस्ट के मुताबिक यहां पर 1696922 वोटर हैं.

पिछले चुनावों में CPM और TMC की टक्कर
2009 के लोकसभा चुनावों तक यह सीट सीपीएम के खाते में जाती रही है. हालांकि इन चुनावों में ही इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस की धमक दिखाई दे थी, जो 2014 में भी रही और नतीजा ये रहा कि 47 साल बाद सीपीएम का एकाधिकार खत्म हुआ और तृणमूल कांग्रेस ने भारी मतों से जीत दर्ज की. 2014 में यहां पर 85.15 फीसदी वोटिंग हुई थी. जबकि 2009 में यह 84.58 फीसदी थी. यहां AITC को 54.98 फीसदी, CPM को 29.51 फीसदी, बीजेपी को 11.64 फीसदी और कांग्रेस को 2.05 फीसदी वोट मिले थे.

2014 की तरह एक बार फिर इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम की टक्कर देखने को मिल सकती है, हालांकि इस बार बीजेपी भी बराबर की टक्कर दे रही हैं. हालांकि अब परिणाम क्या होेंगे इसका पता तो नतीजों के दिन ही चलेगा.