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इस राज्य में होती है चौकीदार देव की पूजा, रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु करते हैं दर्शन

इस मंदिर में बिराजमान देव को स्थानीय और दूसरे राज्यों के आदिवासी समाज के लोग देवदर वाणीया कलियाभूत मामा चौकीदार के नाम से बुलाते है. 

इस राज्य में होती है चौकीदार देव की पूजा, रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु करते हैं दर्शन
लोगों मानना है कि यहां दर्शन करने के बाद उनका पूरा साल अच्छा निकलता है और फसल भी काफी अच्छी होती है.

जयेश दोशी, अहमदाबाद: पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मैं भी चौकीदार अभियान के अंतर्गत एक मुहीम शुरू की गई और बीजेपी के समर्थकों द्वारा अपने आपको मैं भी चौकीदार हूं कहकर संबोधित करने लगे. चौकीदार के नारे के बीच आज हम आपको गुजरात के नर्मदा जिले में स्थापित एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम ही चौकीदार मंदिर है.

आदिवासी लोग करते हैं चौकीदार मंदिर में पूजा
नर्मदा जिले के डेडियापाडा तालुका में सातपुडा पर्वत की गिरमाला के बीच चौकीदार देव का मंदिर है. इस मंदिर में बिराजमान देव को स्थानीय और दूसरे राज्यों के आदिवासी समाज के लोग देवदर वाणीया कलियाभूत मामा चौकीदार के नाम से बुलाते है. यहां मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात समेत कई राज्यों के श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं. 

तीन राज्यों में है अलग-अलग नाम
तीनो राज्यों के आदिवासी समाज के लोग इस देव मंदिर को अलग-अलग नाम से बुलाते हैं. महाराष्ट्र के आदिवासी इस देव को देवदर वाणीया कहते है. MP के आदिवासी श्रद्धालु कलियाभूत मामा के नाम से बुलाते है और गुजरात के श्रद्धालु चौकीदार के नाम से संबोधित करते हैं. इस देव मंदिर का नाम आदिवासियों के लिए अलग-अलग नाम से से जना जाता हो लेकिन यहां आने वाले भक्तों की आस्था इस मंदिर में एक जैसी है. 

शिवरात्रि के पांचवें दिन लगता है मेला
जानकारी के मुताबिक, इस मंदिर की स्थापना इस स्थान पर इसलिए की गई थी, क्योंकि देवमोगरा में आदिवासियों की कुलदेवी पांडोरी माता का मंदिर है. पांडोरी माता आदिवासियों की कुल देवी है और यहां हर शिवरात्रि के पांचवे दिन मेला भी लगता है. यहां रोज हजारो की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है. आदिवासी समाज के लोग पांडुरी माता के दर्शन और पूजा अर्चना करने के बाद ही हर कोई शुभ काम और खेती शुरुआत करते है.

फसल और घर में आती है खुशहाली
आदिवासी जाति के लोगों मानना है कि यहां दर्शन करने के बाद उनका पूरा साल अच्छा निकलता है और फसल भी काफी अच्छी होती है. लेकिन यहां श्रद्धालु पांडुरी  माता के दर्शन करने से पहले चौकीदार देव दर्शन करते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है की देवी पूजा अर्चना करने से पहले चौकीदार देव को प्रसन्न करना जरुरी होता है. और चौकीदार देव की पूजा करने के बाद ही माता की पूजा की जाती है. चौकीदार देव के दर्शन करने के बाद ही पांडुरी माता के दर्शन का रास्ता खुलता है. अगर चौकीदार देव की पूजा किये बिना माताजी के दर्शन कर लिए जाये तो पूजा पूरी नहीं मानी जाती है. आदिवासी समाज चौकीदार देव को अपना रक्षक मानता है. माता के मंदिर में दर्शन करने से पहले लोग चौकीदार देवता की पूजा अर्चना खास तौर पर करते है.