लोकसभा चुनाव 2019: MP में तेज हुए बागियों के सुर, इन सीटों पर बढ़ीं भाजपा की मुश्किलें

दोनों पार्टीयों के बागियों ने विधानसभा में भी राजनैतिक गणित को बिगाड़ा था ओर इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पडा था. 

लोकसभा चुनाव 2019: MP में तेज हुए बागियों के सुर, इन सीटों पर बढ़ीं भाजपा की मुश्किलें
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

अजय शर्मा/भोपालः मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के लिए कई सीटों पर बगावतियों ने परेशानी खडी कर दी है. अगर दोनों दलों ने बगावतियों से होने वाले नुकसान का डैमेज कंट्रोल नहीं किया बगावतियों को नहीं थामा तो पूरा चुनावी गणित बिगड़ जायेगा. दोनों दलों के बड़े नेता भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि कई सीटों पर बगावती उनके सामने चुनौती हैं, लेकिन वक्त रहते उन्हें मना लिया जायेगा. बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय मानते हैं कि कई सीटों पर इस तरह के हालात हैं, और पार्टी के बडे नेता स्थानीय नेताओं को मनाने में जुटे हैं.वहीं कांग्रेस के मीडिया सेल के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने बगावत की बात से किनारा करते हुए बीजेपी की बगावत पर सवाल उठाये हैं. इसके पहले दोनों पार्टीयों के बागियों ने विधानसभा में भी राजनैतिक गणित को बिगाड़ा था ओर इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पडा था. 

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ग्वालियर चम्बल में बागी तेवर
बीजेपी की सबसे मजबूत सीट में से एक माने जाने वाली ग्वालियर लोकसभा पर भी इस बार संकट के बादल हैं. हालात ये हैं कि ग्वालियर से सांसद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पार्टी संगठन को मौजूदा सीट को लेकर राय बता दी थी. यही कारण है कि पार्टी ने स्थानीय नेताओं के बगावती तेवर के चलते मुरैना से उम्मीदवार बनाया गया. वहीं अभी भी पार्टी के सामने मुरैना सीट से दावेदार रहे, दिवंगत अटल बिहारी वाजयपेयी के भांजे अनूप मिश्रा और प्रदेश भाजपा के महामंत्री वीडी शर्मा को मनाने की चुनौती है.  

जयस बना परेशानी का सबब
मध्यप्रदेश में जयस के संस्थापक और कांग्रेस के विधायक डॉ हीरालाल अलावा लोकसभा चुनाव में पार्टी से बगावत की खुली चेतावनी दी है. वे लोकसभा चुनावों में पांच सीटों पर जयस के उम्मीदवारों के लिए कांग्रेस से समर्थन की मांग कर रहे हैं. मनावर से विधायक अलावा बीजेपी से भी संपर्क में हैं.अलावा ने कहा कि वे राहुल गांधी से मिलना चाहते थे लेकिन उन्होंने मिलने के लिए वक्त नहीं दिया.मालवा-निमाड़ में जयस की मज़बूत मौजूदगी है. मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटों में 6 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. अलावा संभवत: इन्हीं में से पांच सीटों पर जयस के उम्मीवारों को उतारना चाहते हैं.

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छिंदवाडा में बगावत के सुर
छिंदवाडा में जहां बीजेपी को कांग्रेस उम्मीदवार माने जा रहे नकुलनाथ के लिए मजबूत चेहरे की तलाश है. इसी के तहत पार्टी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बडे नेता मनमोहन शाह बट्टी को पार्टी में शामिल करा उन्हें प्रत्याशी बनाने जा रही है, इसकी भनक लगते ही पार्टी संगठन के सामने स्थानीय नेता विरोध दर्ज कराने भोपाल पहुंच गए. 

सीधी में इस्तीफों का दौर
सीधी-सिंगरौली लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसद रीति पाठक को इस बार भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह स्थानीय स्तर पर नेताओं के साथ समन्वय और तवज्जो नहीं मिलना बताया जा रहा है. हालात ये हो गए हैं कि उम्मीदवार घोषित होने के बाद बीजेपी के जिलाअध्यक्ष समेत दर्जन भर से ज्यादा पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिये हैं.

शहडोल में हिमाद्री का विरोध  
कभी बीजेपी के खिलाफ ताल ठोंकने वाली कांग्रेस की नेता रही हिमाद्री सिंह को बीजेपी ने पार्टी में शामिल करा पहले तो कांग्रेस को झटका दिया फिर उन्हें शहडोल से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया.बीजेपी की ये बडी जीत जरुर मानी जा रही है. मौजूदा सांसद पार्टी के फैसले से खुश नहीं हैं.ओर पार्टी के बडे नेताओं को अपनी राय बता दी है.

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भोपाल में बगावत बनी चुनौती
भोपाल में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार जरुर दिग्विजय सिंह को घोषित कर दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा नाराज पार्टी के ही प्रदेश कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल नाराज हैं. ओर वो इतने नाराज हैं कि बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंच गए.यही नहीं गोयल की वैश्य समाज और व्यपारियों में अच्छी पकड मानी जाती है, दूसरी ओर भोपाल में भी बीजेपी के अंदर स्थानीय प्रत्याशी को लेकर घमासान है ओर पार्टी के बडे नेता पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर पर पार्टी के स्थानीय विधायक, मेयर से लेकर मौजूदा सांसद तक अपनी राय बता चुके हैं.

इंदौर में सत्तन ने ठोकी ताल
बीजेपी के मजबूत गढों में से एक माने जाने वाले इंदौर लोकसभा का पार्टी इस बार चेहरा बदलने के मूड में दिखाई दे रही है. यही कारण है कि बीजेपी ने अभी तक इंदौर लोकसभा की मौजूदा सांसद सुमित्रा महाजन का नाम जारी नहीं किया है. उधर पार्टी के बड़े नेता कवि सत्यनारायण सत्तन ने महाजन के खिलाफ ताल ठोक दी है ओर दो टूक कह दिया है कि यदि पार्टी ने महाजन को उम्मीदवार बनाया तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लडेंगे.