EVM-VVPAT मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब, 1 अप्रैल को अगली सुनवाई

विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू, अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, सतीश चंद्र मिश्र समेत विपक्ष के 21 नेताओं ने याचिका दायर की थी.

EVM-VVPAT मुद्दा: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब, 1 अप्रैल को अगली सुनवाई
1 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई. फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : चुनावों में इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट (VVPAT) के इस्‍तेमाल को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चंद्रबाबू नायडू और अखिलेश यादव समेत 21 विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पर्याप्त VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान की व्यवस्था पहले से है. इसे बढ़ाकर 50 फीसदी करना गैरजरूरी. इससे समय और संसाधन की बर्बादी होगी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को हलफनामा देने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी.

दरअसल, विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू, अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, सतीश चंद्र मिश्र समेत विपक्ष के 21 नेताओं ने याचिका दायर की थी. इस याचिका में EVM के जरिए होने वाले चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए 50 फीसदी तक VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान की मांग की गई थी.

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से इस बारे में जवाब मांगा है कि आगामी आम चुनाव और विधान सभा चुनावों में प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से वीवीपैट का एक एक नमूना सर्वेक्षण करने की बजाय क्या इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। आयोग को 28 मार्च को शाम चार बजे तक अपना जवाब देना है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग को यह बताने का निर्देश दिया कि क्या प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में वीवीपैट के एक एक नमूना सर्वेक्षण की जगह यह संख्या बढ़ाई जा सकती है.

पीठ ने संकेत दिया कि वह वीवीपैट सर्वेक्षण नमूनों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में है लेकिन उसने कहा कि यह किसी प्रकार का ‘आक्षेप लगाने का ’ सवाल नहीं है बल्कि यह ‘संतोष’ का मामला है और वह चाहती है कि आयोग नमूनों की संख्या बढ़ाने पर विचार करे.

पीठ ने कहा, ‘‘कोई भी संस्थान खुद को किसी सुझाव से परे नहीं मान सकता....हर चीज में सुधार की गुंजाइश है.’’पीठ ने इसके साथ ही याचिका की सुनवाई एक अप्रैल के लिये स्थगित कर दी. इस याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि लोक सभा चुनाव में प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी वीवीपैट मशीनों की अचानक जांच का निर्देश दिया जाए. 

इससे पहले मध्यप्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता कमलनाथ और सचिन पायलट की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें दोनों कांग्रेस नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को पारदर्शिता बनाने को लेकर याचिका दायर की थी. याचिका में यह भी मांग की गई थी कि वोटर लिस्ट की जानकारी चुनाव आयोग कांग्रेस को टेक्स्ट मोड में दें. याचिका में दस फीसदी मतों को वीवीपैट से मिलान कराने की भी मांग की गई थी. इसके अलावा मतदाता सूची में बड़ी संख्या मे फर्जी मतदाता होने की बात कही गई थी.

आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में हुए विधानसभा चुनाव से लेकर उपचुनाव में EVM में गड़बड़ी की शिकायत की गई थी. कई राजनीतिक पार्टियों ने EVM में गड़बड़ी की शिकायत करते हुए, चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की थी. कई पार्टियों ने तो सदन के अंदर तक EVM को किस तरह हैक किया जा सकता है, उसका डेमो दिखाने की भी कोशिश की थी. वहीं, इन बातों को चुनाव आयोग ने गलत ठहराया था. चुनाव आयोग का साफ कहना था कि हर चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुआ और आगे भी होगा और EVM में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं है. और ना ही उसे हैक किया जा सकता है.